FII Hindi is now on Telegram

एडिटर्स नोट : यह लेख फेमिनिस्ट अप्रोच टू टेक्नॉलजी के प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ी लड़कियों द्वारा लिखे गए लेखों में से एक है। इन लेखों के ज़रिये बिहार और झारखंड के अलग-अलग इलाकों में रहने वाली लड़कियों ने कोविड-19 के दौरान अपने अनुभवों को दर्शाया है। फेमिनिज़म इन इंडिया और फेमिनिस्ट अप्रोच टू टेक्नॉलजी साथ मिलकर इन लेखों को आपसे सामने लेकर आए हैं अपने अभियान #LockdownKeKisse के तहत। इस अभियान के अंतर्गत यह पांचवा लेख झारखंड के गिरीडीह ज़िले की लक्ष्मी ने लिखा है।

एक 14 साल की लड़की है। उसका नाम शिवानी कुमारी है। वह झारखंड के एक छोटे से शहर में रहती है। वह अपने घर के पासवाले सरकारी स्कूल में कक्षा आठवीं में पढ़ती है। शिवानी की मां स्कूल में साफ-सफाई का काम करती हैं और उसके पिता कपड़ों की दुकान में काम करते हैं। अभी पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर छाया हुआ है और सबको इससे बचने के लिए कई सावधानियां बरतने की ज़रूरत है। कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए के लिए हमें अपने हाथ साबुन से 20 सेकंड तक अच्छे से धोना है और मास्क लगाना। साथ ही अपने आस-पास साफ-सफाई रखनी ज़रूरी है। पर इस बीमारी की जानकारी शुरुआत में बहुत कम लोगों को थी कि आखिर यह वायरस है क्या और इससे कैसे बचें।

जैसे ही इस बीमारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन हो गया और अचानक सब लोग अपने घर में बंद हो गए। लॉकडाउन लागू होते ही सबको मदद की ज़रूरत महसूस हुई। यह वह समय था जब ज़रूरतमंद ज्यादा और मददगार कम थे। तब शिवानी एक मददगार के रूप में उभरी थी। उसे हमेशा से लोगों की मदद करना बहुत अच्छा लगता है। उसे फिर एक मौका मिल गया था लोगों की मदद करने का। सरकार ने जब स्कूल के छात्र-छात्राओं के बीच साबुन और पैड वितरण करने का निर्णय लिया तो शिवानी सबसे पहले मदद करने पहुंच गई। अपने शिक्षकों और शिक्षिकाओं के साथ मिलकर उसने सभी को बच्चों को साबुन दिया। लड़कियों को साबुन और पैड दोनों दिया गया। यह लॉकडाउन के बीच की बात है। जब ज़िला प्रशासन की तरफ से कोई चीज़ वितरण को आती थी तब कुछ शिक्षक और बच्चे भी स्कूल आते थे। 

लॉकडाउन के कारण सभी छात्राएं स्कूल नहीं आ पाती थी,खासकर दलित छात्राएं। उन छात्राओं तक सैनिटरी नहीं पहुंच पाता था क्योंकि उनका घर दूर था। वे गांव की तरफ से आती थी। उन तक इसकी जानकारी भी नहीं पहुंची थी कि स्कूल में पैड और साबुन बंट रहे हैं पर कोरोना के समय इन चीज़ों की जरूरत तो सबको थी। ऐसे में शिवानी और उसकी कुछ सहेलियों ने फैसला लिया कि जो लड़कियां लॉकडाउन के कारण स्कूल तक नहीं आ पाई हैं उन तक वे जाएंगी और ये सामना पहुंचाएंगी। अपने दोस्तों के साथ और अपने शिक्षक से अनुमति लेकर शिवानी चल पड़ी इन लड़कियों की मदद करने। बारी-बारी से उसने सबको साबुन और पैड दिया। इस काम के दौरान उसने अपनी सुरक्षा का भी बहुत अच्छे से ध्यान रखा। साथ ही अपने दोस्तों से भी इन नियमों का पालन करवाने की ज़िम्मेदारी उसने अच्छे से निभाई।

Become an FII Member

और पढ़ें : कैसे लॉकडाउन ने बदल दी सीमा की ज़िंदगी| #LockdownKeKisse

गाँव में सबको साबुन और पैड के साथ कोरोना वायरस के बारे में भी बताना बड़ी बात है। शिवानी इतना बड़ा काम आराम से कर रही थी। न कोई झिझक न शरम। एक अजीब से   उत्साह और निष्ठा से वह अपना काम किए जा रही थी। आमतौर पर देखा जाए तो पैड को लेकर बात करने में लडकियाँ शरमाती हैं, पर शिवानी इत्मीनान से अपने शिक्षकों से जानकारी इकट्ठा करती और अपने दोस्तों के साथ साझा करती थी। यही नहीं, अपने परिवार के साथ भी जानकारी को साझा करती थी जो उस समय में बहुत ही महत्त्वपूर्ण था।  

शिवानी और उसकी कुछ सहेलियों ने फैसला लिया कि जो लड़कियां लॉकडाउन के कारण स्कूल तक नहीं आ पाई हैं उन तक वे जाएंगी और ये सामान पहुंचाएंगी। अपने दोस्तों के साथ और अपने शिक्षक से अनुमति लेकर शिवानी चल पड़ी इन लड़कियों की मदद करने।

शिवानी साहसी तो है ही, होनहार भी है। उम्र छोटी है, पर उसका काम उतना ही बड़ा है। शिवानी की जिंदगी में भी कोरोना वायरस का असर हुआ। जिस परेशानी से उसका परिवार दूर हुआ था, वह इस लॉकडाउन के कारण वापस आ गई। कुछ सालों पहले शिवानी के पिता को एक रिश्तेदार के पास दिल्ली भेज दिया गया था। उनकी बुरी आदत थी शराब पीने की और पीकर घर में मार-पीट, गाली-गलौच करने की। वह अब दिल्ली से वापस आ गए थे। शिवानी और उसका परिवार उनसे परेशान रहने लगा था। वह घर पर दिन भर रहते थे। शराब पीकर अपने परिवार वालों से लड़ाई-झगड़ा करते थे। फिर अपनी पत्नी को और बच्चों को गाली देना, मार-पीट करना शुरू कर देते थे।

एक दिन शिवानी की मां काम पर से घर आई और उसके पिता गाली देने लगे। बात बढ़ गई। शिवानी के पिता ने उसकी मां को बहुत बुरी तरीके से पीटा। वह काफी घायल हो गई तो घरवाले बगल में ही रहनेवाले डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर बोले कि चोट काफी लगी है। मलहम पट्टी लगानी होगी। उस समय शायद किसी को घरेलू हिंसा कानून का ख्याल नहीं आया। कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई और इलाज होने के बाद शिवानी की मम्मी घर आ गई। घर में इतना लड़ाई-झगड़ा देखकर बच्चे डर गए थे। कोरोना और लॉकडाउन के कारण यह हिंसा सब झेल रहे थे। 

और पढ़ें : पढ़ें : प्रतिमा की कहानी, जिसने बताया कोविड ‘मइया’ नहीं वायरस है| #LockdownKeKisse

इस तरह तीन महीने बीत गए और अब बात बिगड़ती जा रही थी। शिवानी के दादा दादी भी अब बहुत परेशान हो गए थे। लगातार तीन महीनों से रोज लड़ाई-झगड़ा, मार-पीट होने से सब बहुत ही चिंता में थे। अब क्या किया जाए? शिवानी की मां भी कमज़ोर होती जा रही थी। बच्चों पर भी बुरा असर हो रहा था। ना तो उनको अच्छा भोजन मिल पा रहा था, ना ही अच्छा माहौल था जिससे बच्चे पढ़ाई भी कर पाएं। बात बिगड़ते देखकर सबने सोचा कि इसका तो कुछ करना होगा। शिवानी ने सोचा कि जैसे पापा को पहले बाहर भेज दिया गया था, वैसे ही इस बार भी कुछ किया जाए। क्यों ना उनको गांव भेज दिया जाए। इसके लिए शिवानी ने अपने दादाजी से बात की और कहा, ‘वहां गांव में खेत भी हैं और गांव ज़्यादा दूर भी नहीं है। आप बगलवाले चाचा जी को बोलिए कि वह अपनी गाड़ी से पापा को गांव छोड़ आंए। वहां पापा कुछ खेती का काम करेंगे तो अच्छा रहेगा और यहां लड़ाई झगड़ा भी नहीं होगा।’ 

दादाजी ने सोचा कि कि शिवानी बात तो सही कह रही है। शिवानी के दादा-दादी ने आपस में बात कि वह उनका अपना ही बेटा है, उसे तो सज़ा भी नहीं दिलवा सकते हैं, ना ही और कोई उपाय है। शिवानी ने जो कहा है वह सही ही है। हमलोग उसे गांव भेज देते हैं। वहां खेती का काम करेगा तो कुछ कमाई भी हो जाएगी और यहां शांति से सब रह पाएंगे क्योंकि उसकी शराब पीने की आदत नहीं छूट रही तो क्या कर सकते हैं। 

दूसरे दिन शिवानी के पिता को गांव जाने के लिए कहा गया पर उन्होंने इनकार कर दिया। वह शाम को फिर शराब पीकर घर आए और फिर से हंगामा करने लगे। उस समय घर पर सिर्फ शिवानी और उसकी मां मौजूद थी। माता-पिता को लड़ते देखकर शिवानी घबरा गई। एक दिन और उसके पिता शिवानी की मां को बुरी तरह पीट रहे थे। शिवानी से यह देखा नहीं जाता है। ऐसी हालत में उसने बहादुरी दिखाई और बाहर निकलकर आस-पास के लोगों को इकट्ठा कर लिया। लोगों ने बीच-बचाव करके उसकी मां को बचाया। बाद में उसके परिवारवाले घर आए और सीधा उसके पिता को गांव भेज दिया। इस तरह शिवानी ने अपनी सूझ-बूझ से मां को बचा लिया। उसके पिता के गांव जाने के बाद फिलहाल सब लोग चैन की सांस ले रहे हैं।

और पढ़ें :  पढ़ें : लॉकडाउन में कैद रीमा ने किन-किन चुनौतियों का सामना किया | #LockdownKeKisse


Feminist Approach to Technology (FAT) is a not‐for‐profit organization that believes in empowering women by enabling them to access, use and create technology through a feminist rights‐based framework.

Follow FII channels on Youtube and Telegram for latest updates.

नारीवादी मीडिया को ज़रूरत है नारीवादी साथियों की

हमारा प्रीमियम कॉन्टेंट और ख़ास ऑफर्स पाएं और हमारा साथ दें ताकि हम एक स्वतंत्र संस्थान के तौर पर अपना काम जारी रख सकें।

फेमिनिज़म इन इंडिया के सदस्य बनें

अपना प्लान चुनें

Leave a Reply