Sunday, January 19, 2020

ख़बर

कविता दलाल : भारत की पहली महिला रेसलर

कविता भारत की पहली महिला रेसलर हैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई में पहुंची हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए उनके वीडियो को 35 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

स्वास्थ्य

आंदोलन के इस दौर में रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख़ास ख़्याल

अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखना बहुत ज़रूरी है, खासकर तब, जब सियासत से संविधान के लिए लड़ना हो, तो ये और भी ज़रूरी हो जाता है।

मी लॉर्ड ! अब हम गैरबराबरी के खिलाफ किसका दरवाज़ा खटखटाएं – ‘सबरीमाला स्पेशल’

सबरीमाला पर एक कड़ा फैसला दे चुका सुप्रीम कोर्ट इस बार यह फैसला नहीं ले पाया कि सबरीमाला मंदिर की प्रथा की नींव पितृसत्ता की बुनियाद पर ही टिकी हुई है।

मानसिक स्वास्थ्य पर पहली पहल ‘अपनी भाषा और व्यवहार’ से हो

मानसिक स्वास्थ्य अब विश्व में अदृश्य अपंगता की श्रेणी में गिने जाने लगे हैं और ये सत्यापित हुआ है कि मानसिक विकारों में वृद्धि भी तेज़ी से हुई है।

माहवारी जागरूकता के लिए गांव-गांव जाती हैं मौसम कुमारी जैसी लड़कियाँ

मौसम कुमारी रजौली प्रखंड गांव की एक आम लड़की है। मौसम एक यूथ लीडर है जो पिछले तीन सालों से महिला स्वास्थ्य पर चर्चा करती है।

पुरुष होते नहीं बल्कि समाज में बनाए जाते हैं

हमेशा एक पुरुष से यह उम्मीद रखी जाती है कि वो अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखेगा जो किसी भी रूप में उसे कमजोर या असहाय दिखा सकती है।

सुरक्षित गर्भावस्था के लिए सेरेना विलियम्स की सशक्त पहल है ‘माहमी’

सेरेना ने बिजनेसमैन मार्क क्यूबन के साथ मिलकर एक ‘मेटरनल हैल्थ स्टार्टअप’ में इन्वेस्टमेंट किया है। इस हैल्थ स्टार्टअप का नाम ‘माहमी’ (MaahMee) है।

नारीवाद

हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती हूँ!

संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ़ कोई भी कानून बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं सीएए और एनआरसी का पुरज़ोर विरोध करती हूँ।

अनेकता में एकता वाले भारतदेश में ‘नारीवादी’ होना

लोगों को खुद को नारीवादी कहने में इसीलिए हिचक होती है क्यूंकि इस शब्द के बारे जानकारी से ज़्यादा इससे संबंधित तमाम ग़लतफ़हमियां प्रचलित हैं।

इतिहास के आईने में महिला आंदोलन

आजादी के बाद अस्सी का दशक भारत में स्त्री आंदोलन का दशक माना जाता है जब महिलाएं एक तरफ स्त्री के मसले पर लड़ रही थीं और दूसरी ओर राष्ट्रीय आंदोलन जारी थे।

सोशल मीडिया

4,902FansLike
662FollowersFollow
264FollowersFollow

आपके पसंदीदा लेख

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|

इतिहास

कविता दलाल : भारत की पहली महिला रेसलर

कविता भारत की पहली महिला रेसलर हैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई में पहुंची हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए उनके वीडियो को 35 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

मोना अहमद : भारत की एक मशहूर ट्रान्स शख़्सियत

मोना अहमद बंबई के फ़िल्मी सितारों से मिलने से लेकर बेहतरीन स्टेज प्रदर्शन तक अपने दौर की एक सबसे एक्टिव ट्रान्सजेंडर साबित हुई।

नंगेली का साहस और विरोध आज भी गूंजता है!

केरल के छेरतला में नंगेली अपने पति चिरुकंदन के साथ रहती थीं। साल 1800 में, जब राजसी शासन चलता था, तब कई तरह के कर वसूले जाते थे।

आदिवासी शहीद वीर नारायण सिंह से आज हम क्या सीख सकते हैं

शहीद वीर नारायण का उपनाम “सिंह” था। लोग उन्हें राजपूत समझते थे और शिक्षा विभाग ने 2018 में जब निर्देशित किया तब उन्हें आधिकारिक रूप से आदिवासी माना गया।

यौनिकता

कविता दलाल : भारत की पहली महिला रेसलर

कविता भारत की पहली महिला रेसलर हैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई में पहुंची हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए उनके वीडियो को 35 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

दोहरे मापदंडों के बीच ‘हमारे शहर और सेक्स’

भारत के किसी भी शहर में किसी युवा और अविवाहित महिला के लिए सेक्स कर पाना बिलकुल किसी चीज़ की स्मगलिंग करने जैसा ही होता है।

ऐसी है ‘पितृसत्ता’ : सेक्स के साथ जुड़े कलंक और महिलाओं के कामकाजी होने का दर्जा न देना

सेक्स वर्कर को और सेक्स वर्क से जुड़े इन विचारों को केवल कलंक, उनकी यौनिकता या मानवाधिकारों के बारे में समझ तक ही सीमित नहीं किया जा सकता।

‘तुम हो’ ! यह सिद्ध करने के लिए तुम्हारा होना काफ़ी है न की वर्जिनिटी चेक करने वाले प्रॉडक्ट का होना

मेडिकल साइंस में सुबूत के साथ यह साबित कर दिया कि कुंवारेपन में कौमार्य का पर्याय कही जाने वाली हाइमन झिल्ली सेक्स के अलावा भी कई दूसरी वजह से फट सकती है।

फॉलो करे

4,902FansLike
786FollowersFollow
264FollowersFollow

ट्रेंडिंग

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

2
संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

4
गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

1
आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
manto

मंटो की वो अश्लील औरतें

4
ऐसे ही झंझावतों वाले दौर में हिंदुस्तानी साहित्य में एक ऐसे सितारे का उदय हुआ, जिसने अपनी कहानियों से अपने समय और समाज को नंगा सच दिखाया। इस लेखक का नाम था- सआदत हसन मंटो।

दोहरे मापदंडों के बीच ‘हमारे शहर और सेक्स’

0
भारत के किसी भी शहर में किसी युवा और अविवाहित महिला के लिए सेक्स कर पाना बिलकुल किसी चीज़ की स्मगलिंग करने जैसा ही होता है।

#FIIExplains