हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ

इंटरसेक्शनल

स्वास्थ्य

संसाधनों की कमी के बीच कोविड-19 से लड़ते स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सरकारों ने क्या किया

दवा, ऑक्सीजन और बेड की कमी के कारण अपने मरीजों को न बचा पाने की असहायता और अपराधबोध से लड़ते स्वास्थ्यकर्मियों की तस्वीरें निश्चित ही हमें विचलित कर रही हैं।

पढ़ें : ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी की जीत ऐतिहासिक कैसे बनी| नारीवादी चश्मा

पश्चिम बंगाल चुनाव में तथाकथित देश की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को हराकर ममता बनर्जी के नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है।

समाज

एक-एक सांस के लिए संघर्ष करते देश में सेंट्रल विस्टा परियोजना की ज़रूरत क्या है ?

हालांकि, सेंट्रल विस्टा परियोजना सिर्फ एक संसद भवन बनाने के बारे में नहीं है। यह दिल्ली के दिल को मौलिक रूप से बदलने का प्रस्ताव देता है।

संस्कृति

आदिवासी समुदायों में भी क्या बढ़ रहे हैं दहेज लेन-देन के मामले?

जो आदिवासी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए शहर की ओर पलायन कर रहें वे बिल्कुल प्रत्यक्ष रूप से दहेज ले रहे हैं।

ख़ास बातचीत : साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता यशिका दत्त से (दूसरा भाग)

यशिका दत्त को साल 2021 में उनकी किताब 'कमिंग आउट एज़ अ दलित' के लिए साहित्य अकादमी का युवा पुरस्कार से नवाज़ा गया है। पढ़िए FII से उनकी ख़ास बातचीत।

ट्रेंडिंग

ख़ास बातचीत: साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता यशिका दत्त से (पहला भाग)

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"मेरा शरीर मेरा है, फिर इससे जुड़े फैसले कोई और क्यों ले"

‘मेरा शरीर मेरा है, फिर इससे जुड़े फैसले कोई और क्यों ले’

किसी भी महिला को खुद के जीवन के सारे फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता हो चाहे वह फैसला उसके शरीर से जुड़ा हो या फिर उसके भविष्य से जुड़ा हो।
आदिवासी समुदायों में भी क्या बढ़ रहे हैं दहेज लेन-देन के मामले?

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जो आदिवासी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए शहर की ओर पलायन कर रहें वे बिल्कुल प्रत्यक्ष रूप से दहेज ले रहे हैं।

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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इतिहास

नारीवाद

पोस्ट कोलोनियल फेमिनिज़म : क्या दुनिया की सभी महिलाओं को एक होमोज़िनस समुदाय की तरह देखा जा सकता है ?

पोस्ट कोलोनियल नारीवाद पश्चिमी नारीवादियों के अनुभव को नारीवादी सिद्धांतों का आधार बताकर अगुआई करने की आलोचना करता है। वैसे ही भारत में इस पर बात करते हुए यहां के सामाजिक ढाँचों को रेखांकित करना भी उतना ही जरूरी हो जाता है, तभी जाकर महिलाओं को एक होमोज़िनस समुदाय की तरह देखने से बचा जा सकता है।

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