डिजिटल आज़ादी के बीच पितृसत्ता और जातिगत हिंसा का विस्तार
एक वक्त था, जब इंटरनेट सीमित ही मिलता था और इसका इस्तेमाल बहुत जरूरी कामों के लिए किया जाता था। लेकिन आज लोगों के लिए इंटरनेट की अधिक उपलब्धता ने ऑनलाइन मंच को हिंसा के रूप में बदल दिया है, बल्कि इसका इस्तेमाल व्यक्ति को धमकी देने और गरिमा को भंग करने के लिए किया जाने लगा है।







