‘बाबासाहेब: माई लाइफ विद डॉ. अंबेडकर’: देखभाल, साथ और सविता आंबेडकर का भुला दिया गया इतिहास
वह बताती हैं कि इतिहास में उनकी भी एक जगह है; उस इतिहास में, जिसने अक्सर उनकी अपनी कहानी के उनके अपने संस्करण को स्वीकार करने से इनकार किया है। इस प्रकार, सविता अंबेडकर की विरासत को सिर्फ नए सिरे से परिभाषित नहीं करतीं बल्कि वह उसमें एक ऐसा अनूठा ताना-बाना और गहराई जोड़ती हैं, जो पहले कभी देखने को नहीं मिली थी।







