Intersectional Feminism—Desi Style!

इंटरसेक्शनल

घर की बंदिशें तोड़कर लॉकडाउन में आज़ादी चुनने वाली लक्षिता की कहानी| #LockdownKeKisse

यह लेख #LockdownKeKisse अभियान के तहत लक्षिता की कहानी है, जिसने लॉकडाउन के दौरान भी अपनी आज़ादी पर घरवालों को अंकुश नहीं लगाने दिया।

स्वास्थ्य

आइए, तोड़ें ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े पांच मिथ्य

डियोड्रेंट लगाने से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।''ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।''पुरुषों को ब्रेस्ट कैंसर नहीं हो सकता है।'ब्रेस्ट...

आइए जानें, क्या होती है ‘पीरियड पोवर्टी’ ?

पीरियड पोवर्टी यानी पीरियड के दौरान इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स जैसे सैनिटरी पैड्स, टैंपन आदि का पहुंच से दूर होना।

अर्जेंटीना में गर्भसमापन को मिली क़ानूनी वैधता के बहाने महिला अधिकारों की बात

इस बिल का पारित होना कई मायनों में महिलाओं के लिए एक सकारात्मक घटना है। यह बिल महिलाओं का अपने शरीर पर एकाधिकार क़ायम करता है।

लैंगिक भेदभाव के कारण होने वाले स्त्रियों के मानसिक तनाव पर चुप्पी क्यों

स्त्रियों के इस मानसिक असंतोष का बहुत बड़ा कारण पितृसत्ता भी रहा है। पितृसत्ता के कारण ही बचपन से उनके मन में खुद के लिए नफरत भर दी जाती है और उनका आत्मविश्वास हमेशा ही तोड़ने का प्रयास किया जाता, जिस उम्र में आत्मविश्वास बनना शुरू होता है उस उम्र में आत्मग्लानि जैसे भाव पैदा कर दिए जाते हैं।

मध्यमवर्गीय परिवार में परिवार नियोजन चुनौती क्यों है ?| नारीवादी चश्मा

भारतीय मध्यमवर्गीय के लिए परिवार नियोजन का मतलब ‘बच्चे पैदा करने की प्लानिंग नहीं,’ बल्कि ‘बच्चे पैदा होने से रोकने का उपाय’ होता है।

पी फॉर पैरेंटिंग : जानें, नई माओं के लिए पोषण क्यों ज़रूरी है ?

अगर गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान माताओं की खाने की आदतें स्वस्थ नहीं होती हैं तो इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

समाज

महिलाओं को मिलना चाहिए उनके घरेलू श्रम का हिसाब

औरतें द्वारा निभाई जाने वाली भूमिकाओं का विश्लेषण केवल एक भावनात्मक आवरण में लिपटी त्याग मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि अधिक खुलेपन के साथ सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यों में की जाए।

ग्राउंड रिपोर्ट : किसानों की कहानी, उनकी ज़ुबानी, बिहार से सिंघु बॉर्डर तक

अम्बाला से आए एक बुगुर्ज जिनका नाम बलकार सिंह था इस आंदोलन को क्रांति बताते हैं। उनके अनुसार इतिहास इन महीनों को वैसे दर्ज़ करेगा जैसे सदियों में होने वाली किसी एक क्रांति को करता है। बलकार सिंह ने कहा, "हमारे खाने कमाने का साधन हमसे छीनने की कोशिश की जा रही है। सरकार से हमें ये उम्मीद नहीं थी। हमारा काम सिर्फ़ खेतों में संघर्ष करना है। चार पांच बन्दे मिलकर क़ानून बना रहे हैं जिनको किसानी के बारे में पता नहीं है। अडानी अम्बानी जैसे लोग।

क्या राजनीतिक विचारधारा अलग होने से शादियां टूट सकती हैं ?

क्या कोई विवाहित दंपति राजनीतिक विचारधारा अलग होने की वजह से हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत विवाह विच्छेद की याचिका दे सकता?

संस्कृति

बेरिल कुक : ‘मोटी औरतों’ को कैनवास पर उतारने वाली चित्रकार

बेरिल कुक कहती हैं, मैं नहीं जानती ये चित्र कैसे बन गए हैं, बस बन गए हैं। वे मौजूद हैं लेकिन मैं अपने होने तक में उनकी व्याख्या नहीं कर सकती।

महिलाओं की नकारात्मक छवि और हिंसा परोसती ‘वेब सीरीज’

वेब सीरीज़ को वास्तविक रूप देने के लिए फ़िल्म में हिंसा और अभद्र भाषा का इस्तेमाल युवाओं की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

सिल्क स्मिता : पितृसत्ता पर चोट करने वाली अदाकारा| #IndianWomenInHistory

सिल्क स्मिता एक महत्त्वाकांक्षी महिला थी। उन्हें गुस्सा बहुत जल्दी आ जाता था पर वह किसी भी सवाल का जवाब देने से झिझकती नहीं थी।

ट्रेंडिंग

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

जो चरित्रहीन होते हैं, सुंदर वही होते हैं। आजाद लोग ही खूबसूरत होते हैं। कोने में, अपनी ही कुठाओं में दबी खामोश चरित्रशील औरत?

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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इतिहास

बेरिल कुक : ‘मोटी औरतों’ को कैनवास पर उतारने वाली चित्रकार

बेरिल कुक कहती हैं, मैं नहीं जानती ये चित्र कैसे बन गए हैं, बस बन गए हैं। वे मौजूद हैं लेकिन मैं अपने होने तक में उनकी व्याख्या नहीं कर सकती।

रमाबाई आंबेडकर : बाबा साहब की प्रेरणास्त्रोत जिनकी चर्चा नहीं होती| #IndianWomenInHistory

रमाबाई आंबेडकर की चर्चा शायद उतनी नहीं होती जितनी होनी चाहिए इसलिए आज हम अपने इस लेख में प्रेरणादायक और दृढ़-निश्चयी महिला रमाबाई...

सिल्क स्मिता : पितृसत्ता पर चोट करने वाली अदाकारा| #IndianWomenInHistory

सिल्क स्मिता एक महत्त्वाकांक्षी महिला थी। उन्हें गुस्सा बहुत जल्दी आ जाता था पर वह किसी भी सवाल का जवाब देने से झिझकती नहीं थी।

एनहेडुआना : विश्व का सबसे पहला साहित्य लिखने वाली मेसोपोटामिया की महिला

एनहेडुआना की एक जिम्मेदारी उन्हें धर्म के दायरे में बांध कर, शांति बहाल कर अक्काद साम्राज्य को मजबूत और समृद्ध बनाये रखने की भी थी।

नारीवाद

‘फेमिनिस्ट हो! फेमिनिज़म का झंडा उठाती हो!’ आखिर दिक्कत क्या है इस शब्द से

फेमिनिस्ट या फेमिनिज़म शब्द को बिना समझे अलग-अलग जगह, अक्सर अलग-अलग समय काल में अलग-अलग धारणाओं से जोड़ा गया है।

नए साल में नारीवादी रसोई का निर्माण| नारीवादी चश्मा

रसोई का हमारे समाज में महिला स्थिति से बेहद गहरा संबंध है। ये वही रसोई है, जो घर में बड़ी होती छोटी बच्ची की पहली प्रयोगशाला बना दी जाती है।

मेव वाइली: वेबसीरीज़ ‘सेक्स एजुकेशन’ की एक सशक्त नारीवादी किरदार

मेव वाइली का किरदार नारीवादी चेतना से परिपूर्ण है। मेव अपने 'चयन के अधिकार' को समझती है और उससे समझौता नहीं करती।

पितृसत्ता का शिकार होती महिलाओं को पहचानना होगा इसका वार| नारीवादी चश्मा

हमें ये भी याद रखना है कि जब हम पितृसत्ता के आगे घुटने टेकते है तो सिर्फ़ हम नहीं हमारी पूरी पीढ़ी उसके आगे अपना घुटना टेक देती है।

अच्छी ख़बर

अर्जेंटीना में गर्भसमापन को मिली क़ानूनी वैधता के बहाने महिला अधिकारों की बात

इस बिल का पारित होना कई मायनों में महिलाओं के लिए एक सकारात्मक घटना है। यह बिल महिलाओं का अपने शरीर पर एकाधिकार क़ायम करता है।

साल 2020 रहा इन सशक्त महिलाओं के नाम

ये तो सिर्फ 15 महिलाओं के नाम हैं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में रूढ़ियों और पितृसत्ता को चुनौती देते हुए एक नया मुकाम हासिल किया है। दुनियाभर में लाखों-करोड़ों ऐसी महिलाएं जो हर दिन इस पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती देती हैं अपने-अपने तरीके से।

श्यामली हलदर : एयर ट्रैफिक कंट्रोल की महाप्रबंधक बनने वाली पहली महिला

एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "घर के अंदर औरतें जिस तरह के दवाब लेते हुए शांत और अपने काम के प्रति समर्पित रहने की आदि होती है मुझे यह सामान्य व्यवहार के रूप में वहां से हासिल हुआ। सुनने में कितना भी अजीब लगे लेकिन मुझे मालूम था एक दिन मैं यहां पहुंचूंगी।"

India Love Project: नफ़रती माहौल के बीच मोहब्बत का पैगाम देती कहानियां

हमारे समाज में शादियों का, रिश्ते जोड़ने का हमेशा से एक तय खांचा रहा है जिसे हम अरेंज्ड मैरेज कहते हैं। जाति, वर्ग,जेंडर,नस्ल आदि के आधार पर होनेवाले भेदभाव को खत्म करने के रास्ते में अरेंज़्ड मैरेज एक बहुत बड़ी चुनौती है।