Thursday, October 17, 2019

ख़बर

दलित बच्चों की हत्या दिखाती है ‘स्वच्छ भारत’ का ज़मीनी सच

साल 2019 तक बहुतेरे गाँव में स्वच्छ भारत मिशन की गूँज तक भी सुनाई नहीं पड़ती और खुले में शौच करने के लिए दलित बच्चों की हत्या इसका जीवंत उदाहरण है।

स्वास्थ्य

पुरुष होते नहीं बल्कि समाज में बनाए जाते हैं

हमेशा एक पुरुष से यह उम्मीद रखी जाती है कि वो अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखेगा जो किसी भी रूप में उसे कमजोर या असहाय दिखा सकती है।

सुरक्षित गर्भावस्था के लिए सेरेना विलियम्स की सशक्त पहल है ‘माहमी’

सेरेना ने बिजनेसमैन मार्क क्यूबन के साथ मिलकर एक ‘मेटरनल हैल्थ स्टार्टअप’ में इन्वेस्टमेंट किया है। इस हैल्थ स्टार्टअप का नाम ‘माहमी’ (MaahMee) है।

‘हनीमून सिस्टाइटिस’ से बीमार न हो जाए आपकी सेक्स लाइफ़

'हनीमून सिस्टाइटिस' को आमभाषा में मूत्र मार्ग संक्रमण भी कहा जाता है। यह एक बैक्टीरिया से उत्पन्न होने वाला संक्रमण रोग है।

इमरजेंसी गर्भनिरोधक कितनी सुरक्षित है? आइए जानें !

अगर आप इमरजेंसी गर्भनिरोधक को आम गर्भनिरोधक की तरह लगातार लेती रहतीं हैं तो इसके कुछ गंभीर दुष्प्रभाव/साइड इफेक्ट्स आपको झेलने पड़ सकते हैं।

वजाइना को वॉश के बाज़ार से ज़्यादा स्वतंत्र छोड़ने की ज़रूरत है

कंपनियां वजाइना वॉश जैसे उत्पाद को बेचने में नहीं शर्माती। ये आपके वजाइना को पहले से सुन्दर और गोरा करने का गलत दावा करते हैं जिससे इनकी बिक्री अधिक हो।

‘पीरियड प्रोडक्टिविटी’ से बनाएं अपनी प्रोफेशनल लाइफ आसान

पीरियड प्रोडक्टिविटी को सरल शब्दों में समझा जाए तो इसका मतलब है पीरियड की तकलीफों की चिंता किये बिना, अपना काम बिना रुकावट के सफलतापूर्वक करते जाना।

नारीवाद

पितृसत्ता का ये श्रृंगार है महिलाओं के ख़िलाफ़ मज़बूत हथियार

पितृसत्ता के श्रृंगार को समझना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि स्त्री द्वेष जैसी समस्याओं का प्रमुख आधार है, जिसके अनुसार ये महिलाओं को बाँटने की कोशिश करती हैं।

मेरी यात्रा का अनुभव और महिला शौचालय की बात

किसी महिला यात्री के लिए जिसे महिलाओं के लिए अलग से बने शौचालय इस्तेमाल करने की आदत हो, इस तरह पुरुषों के लिए बने शौचालय को इस्तेमाल कर पाना खासा असुविधाजनक हो स

केट मिलेट की ‘सेक्शुअल पॉलिटिक्स’

मिलेट ने लैंगिक परिप्रेक्ष्य में ही नहीं जाति, नस्ल, वर्ग के आधार पर होने वाले दमन को भी इस राजनीति यानी शक्ति संरचना में देखने की सिफारिश की।

सोशल मीडिया

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आपके पसंदीदा लेख

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|

इतिहास

कादम्बिनी गांगुली : चरित्र पर सवाल का मुँहतोड़ जवाब देकर बनी भारत की पहली महिला ग्रेजुएट

कादम्बिनी गांगुली - भारत की सबसे पहले ग्रेजुएट हुई दो लड़कियों में से एक। शुरुआती स्त्री - चिकित्सकों में से एक !वह स्त्री जो एक पूरी व्यवस्था से लड़ गई।

होमी व्यारावाला : कैमरे में कहानियाँ कैद करने वाली पहली भारतीय महिला

होमी व्यारावाला ने फोटो पत्रकार के तौर पर भारतीय राजनीति की कई घटनाओं की तस्वीरें खींची। कई राजनीतिक हस्तियों की महत्वपूर्ण तस्वीरें भी उन्होंने ली।

आंदोलनों में औरतों की हिस्सेदारी से सत्ता में उनकी हिस्सेदारी तय नहीं होती है

शुरुआती दौर से भारत में स्त्रियों की श्रमिक पह्चान तो थी लेकिन वे स्त्री भी हैं जो उनकी ज़रूरतों को बदल/ बढा सकता है यह स्वीकार करना मुश्किल था।

साहिबान-ए-दीवान लुत्फुन्नीसा इम्तियाज़ : भारत की पहली मुद्रित लेखिका

लुत्फुन्नीसा की रचनाओं का विशाल भंडार सिर्फ शेरों में ही सीमित नहीं थीं। उन्होंने उर्दू साहित्य की हर लेखन-शैली को छूकर एक सम्पूर्ण दीवान लिखा।

यौनिकता

यौन-उत्पीड़न की शिकायतों को निगलना और लड़कियों को कंट्रोल करना – यही है ICC ?

अकादमिक संस्थानों में ICC यानी इंटरनल कंप्लेण्ट्स कमिटी का मुख्य काम यौन-उत्पीड़न की शिकायतों को दबाने का होता जा रहा है।

सुरक्षित गर्भावस्था के लिए सेरेना विलियम्स की सशक्त पहल है ‘माहमी’

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यहाँ गन्ना और ग़रीबी निगल रही हैं हज़ारों औरतों की कोख़

अभी भी मज़दूर औरतें माहवारी जुर्माना भरती हैं या फिर मासिकधर्म की आफ़त से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए अपने ही कोख़ फेंक देने में मजबूर हो जाती हैं।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
कादम्बिनी गांगुली

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