कैसे सोशल मीडिया पर ‘परफेक्ट मॉम’ का मिथक मातृत्व की अवास्तविक अपेक्षाएं गढ़ रहा है?
हर महिला की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में एक माँ की दूसरी माँ से तुलना करना उसके अनुभव और संघर्ष को नजरअंदाज करना है। स्क्रीन पर दिखने वाली सजी-धजी दुनिया कई बार वास्तविकता से कोसों दूर होती है।







