समानता के दावों के बीच भारतीय विश्वविद्यालयों में क्वीयर विद्यार्थियों की जद्दोजहद
उच्च शिक्षा संस्थान सभी के लिए समान रूप से सुरक्षित नहीं हैं, खासकर क्वीयर विद्यार्थियों के लिए, जिन्हें परिवार, समाज और कैंपस तीनों स्तरों पर स्वीकार्यता की कमी का सामना करना पड़ता है। शोध भी यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी पहचान खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते और भेदभाव झेलते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर गहरा असर पड़ता है।







