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ख़बर

स्वास्थ्य

महिलाओं का ‘प्रजनन अधिकार’ भी उनका ‘मानवाधिकार’ है

कानूनी मान्यताओं व योजनाओं के लागू होने के बावजूद हमारा समाज आज यह स्वीकारने को तैयार नहीं कि महिलाओं को समान अधिकार दिए जाएं।

कोविड-19 : किन परिस्थितियों में काम कर रही हैं आशा कार्यकर्ता

कोरोना के खिलाफ जंग में डॉक्टरों के साथ मिलकर सबसे आगे लड़ रही हैं हमारी सामाजिक स्वास्थ्यकर्मी जिन्हें हम ‘आशा’ कार्यकर्ती कहते हैं।

ट्राँस पुरुष और मानसिक स्वास्थ्य की बात समय की ज़रूरत है

आज ज़रूरी है कि हम ट्राँसपुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करें, इसे समझें और बिना किसी भेदभाव या निर्णय के सहयोगी बने।

बॉडी डिसमोर्फिक डिसॉर्डर : एक बीमारी जिसमें अपने शरीर से ही नफ़रत होने लगती है।

बॉडी डिसमोर्फिक डिसॉर्डर एक मानसिक बीमारी है जिससे ग्रस्त व्यक्ति को अपने चेहरे और शरीर से इस प्रकार नफ़रत हो जाती है।

फैट ऐकसेपटेंस : क्योंकि मोटे होने में शर्म कैसा?

फैट ऐकसेपटेंस मूवमेंट के अनुसार हर शरीर सुंदर और अनोखा है, चाहे मोटा हो या पतला। यह मोटापे को बुरी नज़र से नहीं देखता।

ऐनोरेक्सीया : एक मानसिक बीमारी जो आपको अंदर से खोखला करती है।

ऐनोरेक्सीया होने की संभावना औरतों को मर्दों से दस गुना ज़्यादा है। आमतौर पर यह 15 से 19 साल की लड़कियों में ज़्यादा देखा जाता है।

नारीवाद

लैंगिक समानता में विश्वास रखने वाले पुरुषों को करने चाहिए ये 20 काम

लैंगिक समानता में भरोसा करने वाले पुरुषों को महिलाओं की तरह घर के सभी काम सीखने चाहिए क्योंकि घर के काम की ज़िम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की नहीं होती।

जानिए, भारत की इन पांच महिला इतिहासकारों के बारे में

भारत के इतिहास को अध्ययन करते हमें उन महिला इतिहासकारों के बारे में भी पढ़ना चाहिए जो इतिहास की हमारी जानकारी को लगातार प्रभावित करती हैं।

इंडियन मैचमेकिंग : पितृसत्ता पर टिकी ‘अरेंज्ड मैरेज’ की जड़ें उजागर करता एक शो

अरेंज्ड मैरेज के सिस्टम को इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि खाने और सफाई के अलावा महिला में और भी कोई प्रतिभाएं, योग्यताएं और क्षमताएं हो सकती है।

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ट्रेंडिंग

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|

मिनीमाता : छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद

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सन् 1913 में जन्मी मिनीमाता इसी तरह की ख़ास शख्सियत थीं। उनका असली नाम मीनाक्षी देवी था। उनकी कर्म-भूमि छत्तीसगढ़ प्रदेश रहा।

इतिहास

ललद्यद : हिंदुओं की ‘लालेश्वरी’ और मुसलमानों की ‘अल आरिफ़ा’

ललद्यद संभवतः कश्मीरी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण कवियत्री हैं जिन्होंने उस दौर में पितृसत्तात्मक समाज में अपने लिए स्थान बनाया, रूढ़ियों को तोड़ा और धार्मिक मतभेदों को कम किया।

जानिए, भारत की इन पांच महिला इतिहासकारों के बारे में

भारत के इतिहास को अध्ययन करते हमें उन महिला इतिहासकारों के बारे में भी पढ़ना चाहिए जो इतिहास की हमारी जानकारी को लगातार प्रभावित करती हैं।

कंदील बलोच : पाकिस्तान की सबसे मशहूर सोशल मीडिया स्टार की कहानी

22 साल की उम्र में फ़ौज़िया कराची पहुंची और अपना नाम बदल लिया। फ़ौज़िया अज़ीम का अंत हुआ और ‘क़ंदील बलोच’ के तौर पर उसने नई ज़िंदगी शुरू की।

लक्ष्मी सहगल : आज़ाद हिन्द फौज में कैप्टन का पद संभालने वाली स्वतंत्रता सेनानी

कैप्टन लक्ष्मी सहगल ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेन एसोसिएशन के संस्थापक सदस्यों में से एक थीं, जिसका गठन साल 1981 में किया गया था।

यौनिकता

ट्राँस पुरुष और मानसिक स्वास्थ्य की बात समय की ज़रूरत है

आज ज़रूरी है कि हम ट्राँसपुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करें, इसे समझें और बिना किसी भेदभाव या निर्णय के सहयोगी बने।

बॉडी डिसमोर्फिक डिसॉर्डर : एक बीमारी जिसमें अपने शरीर से ही नफ़रत होने लगती है।

बॉडी डिसमोर्फिक डिसॉर्डर एक मानसिक बीमारी है जिससे ग्रस्त व्यक्ति को अपने चेहरे और शरीर से इस प्रकार नफ़रत हो जाती है।

देवी को पूजने वाले देश में औरतों के दंश दर्शाती फ़िल्म देवी

देवी में जितनी आस्था, विश्वास और सम्मान है, उसके ठीक उलट जीती-जागती औरत की ज़िंदगी। इसी दंश को बयान करती है शॉर्ट फिल्म ‘देवी।'

खुला ख़त : उन लोगों के नाम, जिनके लिए सुंदरता का मतलब गोरा होना है।

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी इस सड़ी और बदबूदार रंगभेदी सोच ने किस तरह महिला हिंसा और भेदभाव को बढ़ावा दिया है?

आपके पसंदीदा लेख

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|