हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ

इंटरसेक्शनल

कमिंग आउट के जंजाल के आगे जहां और भी है

हमें यह भी समझना होगा कि कहीं क्वीयर डिस्कोर्स के अमेरिकीकरण या पश्चिमीकरण होने से हम अपनी मूल और स्थानिक क्वीयर परिचर्चा की संभावनाओं का गला तो नहीं घोंट रहे हैं?

स्वास्थ्य

माहवारी पर बात की शुरुआत घर से होनी चाहिए| नारीवादी चश्मा

माहवारी, पीरियड, मासिधर्म या महीना आना। ये शब्द कुछ साल पहले तक ‘गंदी बात’ में शुमार हुआ करते थे। ये वो शब्द थे जिन्हें...

मानसिक स्वास्थ्य पर हर साल बढ़ते आंकड़े पर सुविधाएं आज भी नदारद

"समय सब सही कर देगा, रोना कमज़ोरी का लक्षण है।" अक्सर मानसिक समस्याओं से जूझते मरीजों की परेशानियों को नज़रअंदाज़ किया जाता है। इन भ्रांतियों को जल्द से जल्द तोड़ने की कोशिश करी जानी चाहिए और सही चिकित्सक मदद ली जानी चाहिए।

समाज

रूपाबाई फरदुनजी : दुनिया की पहली एनेस्थेटिस्ट| #IndianWomenInHistory

रूपाबाई एक ऐसे समय में डॉक्टर और विश्व की सबसे पहली एनेस्थेटिस्ट बनीं; जब दुनियाभर में महिला चिकित्सकों की संख्या ना सिर्फ गिनीचुनी थीं पर कहीं पर एक भी एनेस्थीसिया पर विशेषज्ञ डॉक्टर का अस्तित्व नहीं था।

संस्कृति

त्योहार के मौसम में महिलाओं पर बढ़ता काम का बोझ

त्योहारों में पूजा, व्रत, त्योहार की तैयारी और पकवान बनाने की पूरी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ महिलाओं के हिस्से आती है।

सेक्स एजुकेशन : क्यों सबको देखनी चाहिए ज़रूरी बातें सिखाती यह सीरीज़

नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुआ 'सेक्स एजुकेशन' सिरीज़ का तीसरा सीज़न बड़ी चर्चा में रहा। सेक्स और सेक्सुअलिटी से जुड़े मुद्दों को बड़ी सहजता के साथ प्रकाश में लाया गया है।

ट्रेंडिंग

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
कमिंग आउट की झोंझ के आगे जहां और भी है

कमिंग आउट के जंजाल के आगे जहां और भी है

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हमें यह भी समझना होगा कि कहीं क्वीयर डिस्कोर्स के अमेरिकीकरण या पश्चिमीकरण होने से हम अपनी मूल और स्थानिक क्वीयर परिचर्चा की संभावनाओं का गला तो नहीं घोंट रहे हैं?

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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इतिहास

रूपाबाई फरदुनजी : दुनिया की पहली एनेस्थेटिस्ट| #IndianWomenInHistory

रूपाबाई एक ऐसे समय में डॉक्टर और विश्व की सबसे पहली एनेस्थेटिस्ट बनीं; जब दुनियाभर में महिला चिकित्सकों की संख्या ना सिर्फ गिनीचुनी थीं पर कहीं पर एक भी एनेस्थीसिया पर विशेषज्ञ डॉक्टर का अस्तित्व नहीं था।

नारीवाद

कामिनी रॉय: भारत की पहली महिला ग्रैजुएट| #IndianWomenInHistory

1864 को बंगाल के बसुन्दा (अब बांग्लादेश में) गाँव में कामिनी राय जी का जन्म हुआ। वे एक उच्च वर्गीय परिवार से संबंध रखती थीं। कामिनी जी ने 1886 में बेथून कॉलेज में दाखिला लिया जहाँ उन्होंने संस्कृत में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। डिग्री खत्म होने के बाद उन्होंने ने बेथून कॉलेज में पढ़ाया भी।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अब एनडीए की परीक्षा में शामिल हो सकेंगी महिलाएं

कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक अब लड़किया भी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की परीक्षा में शामिल हो सकेंगी। इस फैसले के चलते इसी पांच सितंबर को होने वाली एनडीए की परीक्षा में लड़कियां हिस्सा ले पाएंगी।
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