कथकली के पितृसत्तात्मक दुनिया में महिलाओं की जगह और नारीवादी प्रतिरोध
कथकली में महिलाओं की यात्रा यह साफ़ करती है कि नारीवाद कोई विचारधारा नहीं, बल्कि एक ज़रूरत है। समानता अपने आप नहीं आती। जब महिलाओं को ‘परंपरा’ और ‘संस्कृति’ के नाम पर किसी मंच से बाहर रखा जाता है, तो यह एक राजनीतिक फ़ैसला होता है।







