मैत्रेयी पुष्पा का उपन्यास ‘फरिश्ते निकले’ और बेला बहू का संघर्ष और स्त्री चेतना
बेला समझती है कि जब उसकी माँ खुद अपने बल पर सब संभाल रही थीं, तो किसी और की मदद की क्या जरूरत थी। वह सोचती है कि जिसकी ढाल खुद्दारी और आत्मसम्मान हो, वह किसी दूसरे के सहारे क्यों जिए?







