Thursday, February 20, 2020

ख़बर

यौन शोषण की पीड़िताओं को कैसे करें इंटरव्यू

यौन शोषण की पीड़िताओं से बात करते समय हमें ये ध्यान में रखना चाहिए कि उनके साथ जो हुआ है, वो बेहद दर्दनाक है। इसे याद करना और इसके बारे में बात करना उनके लिए आसान नहीं है।

स्वास्थ्य

पीरियड की बात पर हमारा ‘दोमुँहा समाज’

हमारे भारतीय समाज में जहाँ एक तरफ़, पीरियड्स को अशुद्ध और गन्दा मानता है। वहीँ भारत में एक ऐसी देवी का मंदिर भी है, जिनके पीरियड को पूजनीय माना जाता है।

डिप्रेशन कोई हौवा नहीं है!

जब भी डिप्रेशन की शुरुआत होती है तो सभी को लगता है की वो व्यक्ति बस परेशान होगा किसी चीज़ को लेकर या हम ये सोच लेते है कि उसका मूड ख़राब होगा।

हिस्टीरिया : महिलाओं और एलजीबीटीआइक्यू की ‘यौनिकता’ पर शिकंजा कसने के लिए ‘मेडिकल साइंस में पुरुषवाद’

औरत की यौनिकता से पुरुषतांत्रिक समाज डरता है और ये कोई नई बात नहीं है। इसी के चलते इसने महिलाओं की यौनिक इच्छाओं को भी 'हिस्टीरिया' बीमारी का नाम दे दिया।

समाज की चुनौतियों से जूझता ‘एक मध्यमवर्गीय लड़की’ का मानसिक स्वास्थ्य

हमारे समाज के पितृसत्तात्मक ढाँचे के अनुसार महिलाओं पर ढेरों पाबंदियां लगाई जाती हैं। इन संघर्षों का महिलाओं की मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

आंदोलन के इस दौर में रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख़ास ख़्याल

अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखना बहुत ज़रूरी है, खासकर तब, जब सियासत से संविधान के लिए लड़ना हो, तो ये और भी ज़रूरी हो जाता है।

मी लॉर्ड ! अब हम गैरबराबरी के खिलाफ किसका दरवाज़ा खटखटाएं – ‘सबरीमाला स्पेशल’

सबरीमाला पर एक कड़ा फैसला दे चुका सुप्रीम कोर्ट इस बार यह फैसला नहीं ले पाया कि सबरीमाला मंदिर की प्रथा की नींव पितृसत्ता की बुनियाद पर ही टिकी हुई है।

नारीवाद

देश की औरतें जब बोलती हैं तो शहर-शहर शाहीन बाग हो जाते हैं

हमारे देश की बुनियाद क्या है, वह किन मूल्यों पर खड़ा हुआ है इसे जानना-समझना हो तो कभी अपने शहर में हो रहे प्रदर्शनों का चक्कर काट आइए।

आवाज़ बुलंद करती ‘आज की महिलाएँ’, क्योंकि विरोध का कोई जेंडर नहीं होता

महिलाओं के विरोध को चाहे पुरुषों की क्रान्ति से ढकने की कोशिश की गई हो, लेकिन महिलाओं का प्रतिरोध तो सूरज है जो ज़रूर सामने आएगा।

हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती हूँ!

संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ़ कोई भी कानून बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं सीएए और एनआरसी का पुरज़ोर विरोध करती हूँ।

सोशल मीडिया

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आपके पसंदीदा लेख

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|

इतिहास

भारत की पहली गायिका जिन्होंने कॉन्सर्ट में गाया था : हीराबाई बरोडकर

हीराबाई बरोडकर एक प्रतिभाशाली गायिका ही नहीं, बल्कि भारत की पहली महिला कलाकार थीं जिन्हें पुरुषों के वर्चस्व के दौर में लोग कॉन्सर्ट में सुनने आए।

कमला दास : प्रभावशाली और बेबाक़ एक नारीवादी लेखिका

कमला दास आजाद भारत की एक प्रभावशाली नारीवादी लेखिका थी,जिन्होंने मासिकधर्म, यौवन, महिलाओं के यौन जीवन, लेस्बियन सेक्स जैसे मुद्दों पर बेबाक़ी से लिखा।

सालगिरह पर ख़ास : बेहतरीन और बेबाक़ चित्रकार ‘अमृता शेरगिल’ से जुड़ी रोचक बातें

अमृता का जीवन उनकी पेंटिंग्स की तरह ही रंगीन और रहस्यमय था। भारतीय चित्रकला की दुनिया में वो एक लहर बनकर आईं थीं, भले ही बहुत कम समय के लिए आई हों।

कमल रणदिवे : मेडिकल रिसर्च की पुरुषवादी दुनिया में एक बेमिसाल औरत । #IndianWomenInHistory

विज्ञान की दुनिया से जुड़ीं औरतों के लिए कमल रणदिवे एक मिसाल हैं। उनके योगदान से भारत में मेडिकल रिसर्च को नई दिशा मिली है।

यौनिकता

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

सपना राठी का विरोध उनके विचारों के आधार पर किया जाना चाहिए। न की उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के आधार पर चारित्रिक टिप्पणी करके।

कविता दलाल : भारत की पहली महिला रेसलर

कविता भारत की पहली महिला रेसलर हैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई में पहुंची हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए उनके वीडियो को 35 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

दोहरे मापदंडों के बीच ‘हमारे शहर और सेक्स’

भारत के किसी भी शहर में किसी युवा और अविवाहित महिला के लिए सेक्स कर पाना बिलकुल किसी चीज़ की स्मगलिंग करने जैसा ही होता है।

ऐसी है ‘पितृसत्ता’ : सेक्स के साथ जुड़े कलंक और महिलाओं के कामकाजी होने का दर्जा न देना

सेक्स वर्कर को और सेक्स वर्क से जुड़े इन विचारों को केवल कलंक, उनकी यौनिकता या मानवाधिकारों के बारे में समझ तक ही सीमित नहीं किया जा सकता।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
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‘थप्पड़’ – क्यों मारा, नहीं मार सकता।’- वक्त की माँग है ये ज़रूरी सवाल

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मर्दों को पीटने का हक किसने दिया, वे अपने जीवनसाथी पर हाथ कैसे उठा सकते हैं। यही सवाल पूछती नज़र आती है तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा की नई फिल्म- थप्पड़।
पीरियड

हमारे समाज में पीरियड का क़िस्सा : भुज में ‘पीरियड’ के दौरान भेदभाव और...

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स्वामी कृष्णस्वरुप की इन बातों से साफ़ है कि किस तरह धर्म की हवा शिक्षा पर न केवल हावी होती है, बल्कि उसकी जड़ों को भी दीमक की तरह खोखली करने लगती है।

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