बराबरी के दावों के बीच महिलाओं पर काम का अदृश्य बोझ और मानसिक थकान
आज भी ज्यादातर घरों में घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ महिलाओं पर ही होता है, उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे घर का हर काम बिना थके और बिना शिकायत के करती रहें। यह सब इतना आम हो चुका है कि लोग इसे समस्या मानते ही नहीं हैं। लेकिन असल में यही जिम्मेदारियां धीरे-धीरे महिलाओं के ऊपर एक ऐसा अदृश्य बोझ बना देती हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।







