क्या सोशल मीडिया दलित विमर्श को दे रहा है एक नई दिशा?
इक्विटी लैब्स की 2019 की रिपोर्ट दिखाती है कि फेसबुक पर मौजूद 93 फीसद जातिवादी कंटेंट रिपोर्ट करने के बावजूद प्लेटफ़ॉर्म पर बने रहते हैं। लगातार ट्रोलिंग, एब्यूज और हैरसमेंट की वजह से बहुत सारे दलित एक्टिविस्ट अलग-थलग पड़ जाते हैं या फिर बोलना-लिखना बंद कर देते हैं।







