श्रमिक न्याय और समानता के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रम को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार माना। उनका मानना था कि असल में प्रगति तभी संभव है, जब असमानता के आर्थिक और सामाजिक दोनों आयामों को एक साथ देखा जाए।







