लघु पत्रिकाएं और दलित लेखन: इतिहास, ज़रूरत और विस्तार
दलित लेखन का भाषाई और क्षेत्रीय विस्तार एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव रहा है। इसकी जड़ें इतिहास से जुड़ी हैं। इसकी मजबूत शुरुआत महाराष्ट्र में 1960 और 1970 के दशक में दलित पैंथर आंदोलन के साथ हुई। इस समय ‘अस्मितादर्श’ जैसी पत्रिकाओं ने दलित साहित्य को एक विचारधारा और मंच दिया।







