स्वास्थ्यशारीरिक स्वास्थ्य रिप्रोडक्टिव कोअर्शन: प्रजनन संबंधी हिंसा का एक क्रूर रूप

रिप्रोडक्टिव कोअर्शन: प्रजनन संबंधी हिंसा का एक क्रूर रूप

हमारे समाज में सेक्स अभी भी एक वर्जित विषय है जिस कारण औरतें इन सब मामलों में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। न ही वे अपने साथ हो रही प्रजनन हिंसा को पहचान पाती हैं।

 “मैं अभी माँ बनने के लिए तैयार नहीं थी लेकिन घरवालों के दबाव के चलते मैं अबॉर्शन नहीं करवा पाई।” ससुरालवालों को लगा कि इस बार भी मेरे गर्भ में लड़की है, इसलिए उन्होंने मेरा जबरदस्ती अबॉर्शन करवा दिया।” ऐसी बातें शायद आपने कभी अपने घर या आस-पास ज़रूर सुनी होंगी। हो सकता है ऐसा आपका खुद का अनुभव भी रहा हो। गर्भधारण करना है, नहीं करना है, अबॉर्शन करवाना है आदि फैसलों में औरतों की मर्ज़ी की कुछ ख़ास अहमियत नहीं होती है। ये फै़सले या तो पति करता है या ससुराल के अन्य सदस्य। गर्भधारण से जुड़े फैसले को प्रभावित करना रिप्रोडक्टिव कोअर्शन यानी प्रजजन संबंधी हिंसा की श्रेणी में आता है।

क्या है रिप्रोडक्टिव कोअर्शन

रिप्रोडक्टिव कोअर्शन को हिंदी में हम प्रजनन संबंधी जबरदस्ती या हिंसा कह सकते हैं। इसे पहली बार साल 2010 में एलिज़ाबेथ मिलर और उनके साथियों ने परिभाषित किया था। महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों में हस्तक्षेप करना रिप्रोडक्टिव कोअर्शन कहलाता है। यह कई प्रकार का होता है। मान लीजिए किसी महिला को गर्भधारण करने के लिए बाध्य किया गया हो, इसे प्रेग्नेंसी कोअर्शन कहते हैं। यह बाध्यता महिला के पार्टनर, घर के अन्य सदस्यों द्वारा की जाती है।

अगर कोई पुरुष किसी महिला का रेप इसलिए करता है ताकि वह गर्भवती हो जाए तो यह भी प्रेग्नेंसी कोअर्शन के अंतर्गत ही आता है। प्रेग्नेंसी कोअर्शन में जबरन गर्भवती करना या किसी को गर्भधारण न करने देना दोनों ही तरह के मामले शामिल होते हैं।

कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें इंटरकोर्स के दौरान पुरुष साथी महिला की मर्ज़ी जाने बिना ही कॉन्डम हटा देते हैं।ऐसा करने के पीछे कई बार मकसद उनके ऊपर अनचाही प्रेगनेंसी को थोपना होता है। साथ ही गर्भनिरोधक के तरीकों के साथ औरत की जानकारी के बिना छेड़छाड़ करना भी रिप्रोडक्टिव कोअर्शन ही होता है। इसके तहत अक्सर गर्भनिरोधक गोलियों को किसी सामान्य गोली से बदल दिया जाता है। इसकी जानकारी उस गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करनेवाली महिला से छिपाई जाती है।

प्रेग्नेंसी कोअर्शन में जबरन गर्भवती करना या किसी को गर्भधारण न करने देना दोनों ही तरह के मामले शामिल होते हैं।

वहीं, कई मामलों में इसका उल्टा भी होता है। महिला से बिना पूछे या धोखे से उसे गर्भनिरोधक गोलियां खिलाना, जबरन अबॉर्शन करवाना ये सब रिप्रोडक्टिव कोअर्शन की श्रेणी में आता है। इंटरकोर्स के दौरान कॉन्डम पहनने से मना करना जबकि महिला यह चाहती हो कि उसका पार्टनर कॉन्डम पहने, महिला को सेक्स करने के लिए विवश करना या उसे यह धमकी देना कि अगर वह सेक्स नहीं करेगी, तो पार्टनर रिलेशनशिप को खत्म कर देगा ये सब रिप्रोडक्टिव कोअर्शन के ही रूप हैं।

औरतों के साथ होनेवाली हिंसा का एक रूप है रिप्रोडक्टिव कोअर्शन

दुनिया की आधी आबादी यानी कि औरतों के साथ होनेवाली हिंसा का इतिहास बहुत पुराना है। आज भी औरतों को पुरुषों के मुकाबले कमतर आंका जाता है। उन्हें अपने शरीर से जुड़े फै़सले लेने तक के अधिकारों से वंचित रखा जाता है। रिप्रोडक्टिव कोअर्शन औरतों के साथ की जानेवाली हिंसा का ही एक रूप है। इसे हम हिंसा का एक छिपा हुआ रूप भी कह सकते हैं।जिसके बारे में लोगों को कम जानकारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन रिप्रोडक्टिव कोअर्शन को लैंगिक हिंसा एक अहम रूप मानता है।

हमारे देश में बेटे की चाहत रिप्रोडक्टिव कोअर्शन की एक मुख्य वजह है। कई औरतों को जब तक वे बेटे को जन्म नहीं देतीं, तब तक उन्हें बार-बार गर्भवती होने के लिए मजबूर किया जाता है।

रिप्रोडक्टिव कोअर्शन के लिए कई बार शारीरिक हिंसा का भी सहारा लिया जाता है। जब औरतें प्रेग्नेंसी से जुड़े पार्टनर या घरवालों द्वारा जबरन थोपे जा रहे फैसलों को मानने से इनकार करती हैं, तो उनके साथ मारपीट की जाती है। उन्हें तलाक देने, रिश्ता खत्म करने, घर से निकालने तक की धमकी दी जाती है।

बेटे की चाहत भी है प्रजनन संबंधित हिंसा की एक बड़ी वजह

साल 2019 में उत्तर प्रदेश के 49 ज़िलों में की गई एक रिसर्च के मुताबिक, इसमें शामिल लगभग 12% औरतों ने रिप्रोडक्टिव कोअर्शन झेला है। इनमें से 42% औरतें ऐसी हैं, जिनके साथ रिप्रोडक्टिव कोअर्शन उनके पति ने किया है। वहीं, 48% महिलाओं के साथ ससुरालवालों ने ऐसा किया। वहीं 10% महिलाएं ऐसी थीं जिनके साथ पति और ससुराल वालों दोनों ने उनके साथ प्रजनन संबंधी हिंसा की। रिप्रोडक्टिव कोअर्शन का अनुभव करनेवाली महिलाओं में एक तिहाई से ज्यादा महिलाएं ऐसी होती हैं, जिनकी प्रेग्नेंसी अनचाही थी।

बड़ी संख्या में आज भी औरतें बर्थ कंट्रोल के विकल्पों के लिए पुरुषों पर निर्भर होती हैं। रिप्रोडक्टिव कोअर्शन महिलाओं को उनके प्रजनन संबंधी अधिकारों से वंचित करता है।

हमारे देश में बेटे की चाहत रिप्रोडक्टिव कोअर्शन की एक मुख्य वजह है। कई औरतों को जब तक वे बेटे को जन्म नहीं देतीं, तब तक उन्हें बार-बार गर्भवती होने के लिए मजबूर किया जाता है। बार-बार प्रेग्नेंसी औरतों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। कई मामलों में इन महिलाओं को जबरन अबॉर्शन से भी गुज़रना पड़ता है, अगर उनके गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़की होती है तो।

पितृसत्तात्मक मानसिकता का वर्चस्व

रिप्रोडक्टिव कोअर्शन के पीछे पुरुष वर्चस्ववादी मानसिकता भी काम करती है। बिना अपनी साथी की सहमति के कॉन्डम हटाने के पीछे की वजह जानने के लिए जब रिसर्च की गई तो यह बात सामने आई कि कई बार पुरुष अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए और महिलाओं को कमतर दिखाना चाहते हैं। इसलिए वे इंटरकोर्स के दौरान महिला पार्टनर को अपना सीमन लेने के लिए विवश करते हैं। पितृसत्तात्मक समाज में उनका ऐसा करना महिलाओं पर उनके अधिकार को दर्शाता है।

हमारे समाज में सेक्स अभी भी एक वर्जित विषय है जिस कारण औरतें इन सब मामलों में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। न ही वे अपने साथ हो रही प्रजनन हिंसा को पहचान पाती हैं। बड़ी संख्या में आज भी औरतें बर्थ कंट्रोल के विकल्पों के लिए पुरुषों पर निर्भर होती हैं। रिप्रोडक्टिव कोअर्शन महिलाओं को उनके प्रजनन संबंधी अधिकारों से वंचित करता है। बता दें कि महिलाएं घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत प्रजनन संबंधी की शिकायत भी दर्ज़ करवा सकती हैं।


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