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आपके साथ क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने महिला-अधिकारों या महिला-पुरुष समानता की बात की हो और आपके किसी दोस्त ने तुरंत कहा हो कि ‘ज्यादा फेमिनिस्ट मत बनो|’ पर समान अधिकारों की बात करने में कुछ भी गलत नहीं है| और अगर ऐसा करना आपको ‘फेमिनिस्ट’ बनाता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है|

उल्लेखनीय है कि फेमिनिज्म या नारीवाद का मतलब सिर्फ आंदोलन की बात करना या पुरुषों को नीचा दिखाना नहीं है| बल्कि, इसका संबंध स्त्री-पुरुष समानता की विचारधारा में विश्वास करने से है| और नारीवाद ही हमें बता सकता है कि किस समाज में नारी-सशक्तीकरण के कौन-कौन से तरीके या रणनीति अपनाई जानी चाहिये।

नारीवाद की उपयोगिता एक शब्द और विचारधारा से कहीं ज्यादा है| यह जीवन जीने का एक ऐसा तरीका है, जिसके ज़रिए आप उस सामाजिक बदलाव की ओर कदम बढ़ाती है जैसा समाज आप चाहती है| बेहद छोटी-छोटी आदतों के ज़रिए आप नारीवाद को अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बना सकती है| पर वो आदतें कौन-सी हो? आइये जानें –

1. महिला-केंद्रित किताबों व लेखों को बनाये अपनी पक्की सहेली

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कहते है किताबों से अच्छा और सच्चा दोस्त कोई नहीं होता| क्योंकि ये कभी आपका साथ नहीं छोड़ती| किताबें आपके सोचने-समझने की जड़ों को मजबूत करती है| इसलिए फेमिनिस्ट बनने के लिए यह ज़रूरी है कि महिला-केंद्रित विषयों पर लिखी किताबें और लेखों का अधिक से अधिक अध्ययन किया जाए, जिससे इस विषय पर आपकी अच्छी समझ विकसित हो सके|

2. नारीवादी मुद्दों पर करें बातें

अपनी महिला-मित्रों से महिलाओं के अधिकारों या उनसे जुड़े मुद्दों के बारे में बातें करें| अपनी कामवाली को बचत के नुस्खे बतायें और अपने सहकर्मी से पुरुष-महिला को बराबर वेतन मिलने या कार्यस्थल पर उनके अधिकारों के बारे में चर्चा करें| या फिर सोशल मीडिया पर किसी फेमिनिस्ट ग्रुप को फॉलो करके भी आप नारीवाद को बढ़ाने में अपनी भूमिका अदा कर सकती हैं|

3. महिला-विषयक फिल्म और डाक्यूमेंट्री की बने नियमित दर्शक

फ़िल्में समाज का आईना होती है| पर कई बार फ़िल्में समाज को आईना दिखाने का भी काम करती है| यह भी सच है कि फ़िल्में हमारे विचार-व्यवहार को सक्रियता से प्रभावित करती हैं| ऐसे में, महिला-विषयक फिल्म और डाक्यूमेंट्री के ज़रिए आप महिला-स्थिति व उनसे जुड़े मुद्दों का विश्लेषण भलीभांति कर सकती है|

4. बोलें बेबाक

अपने विचार एवं मत को साझा करने में कभी न हिचकें| जो बातें आपको खराब लगें या किसी विचार से आप सहमत न हो तो उसपर अपनी बातों को बेबाकी के साथ रखें| महिला संबंधित मुद्दों पर होने वाली बातचीत में बढ़चढ़कर हिस्सा लें|

5. खुद से करें प्यार और निकालें ‘अपना वक़्त’

अपनी ज़िंदगी के लिए सिर्फ यह बात हमेशा कायम रखें कि आप सुंदर है| और हमेशा खुद से प्यार करें| अपने तन और मन को अपने हिसाब से ढालें न कि दुनिया के हिसाब से| साथ ही, कोशिश करें कि दिनभर में कुछ समय ऐसा हो जो आपका अपना वक़्त हो, जिसमें आप अपना पसंदीदा काम कर सकें| साथ ही, आप अपने विचारों और रुचियों को भी समय दे सकें| |

6. ‘ना’ कहना सीखें

अगर आपको किसी व्यक्ति का व्यवहार, प्रस्ताव या बातें उचित न लगें तो उन्हें बिना डरे ‘ना’ कहना सीखें| यह न केवल आपको मानसिक तौर पर सशक्त करेगा बल्कि दूसरों के सामने भी आपका सशक्त व्यक्तित्व प्रस्तुत करने में मदद करेगा|

7. दूसरी महिलाओं को करें सशक्त

आप अपने घर या ऑफिस में साथ काम करने वाली या जान-पहचान की महिलाओं को उनकी समस्याओं को समझकर उनकी मदद करने की कोशिश करें, जिससे वे आत्मनिर्भर बने और आगे बढ़ सके| महिलाओं के लिए काम करने स्वंयसेवी संगठन से भी जुड़कर आप समाज में अपना योगदान दे सकती है| इससे आपके ज़रिए नारीवाद को भी बढ़ावा मिलेगा|

8. साझेदारी का बनाये हर रिश्ता

‘रिश्ता’ चाहे आपके और पार्टनर के साथ हो या अपने बच्चों के साथ हो| हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि खासतौर पर जिम्मेदारी और कर्तव्यों के संदर्भ में वह साझेदारी का हो| पार्टनर या बच्चों को अपने व्यवहार के ज़रिए यह सिखाएं कि उनका लड़का या लड़की होना, उन्हें किसी ख़ास तरह की सुविधा न तो देगा और न उससे वंचित रखेगा| घर के कामों का बंटवारा करें|

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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