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विकास के संदर्भ में अक्सर कहा जाता है कि अगर आप समय के साथ और ज़रूरत के हिसाब से अपने आपमें बदलाव नहीं लायेंगे तो आप विकास की दिशा में आगे नहीं बढ़ पायेंगे|

सोशल मीडिया, वेबसाइट और हिंदी| यह बात चंद सालों पहले तक सुनने में बहुत अज़ीब लगती थी| हिंदी के लोग इंटरनेट की दुनिया को अंग्रेजी और अंग्रेजीवालों का एक ऐसा औज़ार समझते थे जिसमें वो संवाद करते थे| हिंदी के चंद उत्साही लोग तो इसको सामाजिक तानाबाने पर बाजारवाद का बड़ा हमला मानते थे| सोशल मीडिया को आपसी भड़ास निकालने का मंच माननेवालों की तादाद भी हिंदी में कम नहीं थी, अब भी कुछ लोग हैं| दरअसल शुरुआत में इंटरनेट की दुनिया में अंग्रेजी का वर्चस्व था| वेबसाइट से लेकर सोशल मीडिया तक| हिंदी भाषियों को यह अंग्रेजीवालों की चोचलेबाजी जान पड़ती थी| लेकिन हमारे यहां कहते हैं ना कि मनुष बलि नहीं होत है समय होत बलवान| तो वक़्त बदला और सारी स्थितियां भी बदलती चली गयीं| पिछले एक दशक में देश में तकनीक का फैलाव काफी तेज़ी से हुआ है| हर हाथ को काम मिले ना मिले हर हाथ को मोबाइल फ़ोन ज़रूर मिल गया है| घर में काम करनेवाली मेड से लेकर रिक्शा चलानेवाला तक अब मोबाइल पर उपलब्ध हैं|

ज़रूरी है महिला-अभिव्यक्ति के तरीकों को बदलना

समय बदला और अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के साधन भी बदलते चले गए| तकनीकें भले बदल गयी हो लेकिन समाज और सामाजिक मुद्दों में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है| खासतौर पर महिलाओं के संदर्भ में| कानून में प्रावधान तो कई किये गए पर समाज ने उन्हें आज भी नहीं स्वीकारा है| इस बात का अंदाजा हम आये दिन महिलाओं के साथ हो रही हिंसा और असमानता से जुड़े तमाम मुद्दों के माध्यम से देख सकते हैं|

पर उम्मीद पर दुनिया कायम है| यदि अपने लक्ष्य को पाने के लिए हम निरंतर प्रयास करें तो हमारी सफलता तय होती है| इसी तर्ज पर आज के इस तकनीकी दौर में भी यह ज़रूरी है कि महिलाओं से जुड़े हर मुद्दों पर निरंतर चर्चा और लेखन ज़ारी रहे| साथ ही, यह भी ज़रूरी है कि विमर्श व लेखन कार्य में इस बात का ख़ास ख्याल रखा जाए कि मुद्दों के साथ-साथ भाषा और शैली का चयन इस तरह हो कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके| यह न केवल वैचारिक तौर पर हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने में मदद करेगा बल्कि इसके माध्यम से हम किसी भी मुद्दे पर कई दृष्टिकोण और अनकहे पहलुओं को उजागर करने में आसानी से सक्षम हो पायेंगे|

इंटरनेट क्रांति ने दिया अभिव्यक्ति का नया पैतरा

मोबाइल फ़ोन की क्रांति के बाद जो विकास हुआ वह था इंटरनेट का फैलाव| तकनीक के विकास ने आज लोगों के हाथ में इंटरनेट का एक ऐसा अस्त्र पकड़ा दिया है जो उनको अपने आपको अभिव्यक्त करने के लिए एक बड़ा प्लेटफोर्म प्रदान करता है| स्मार्ट फ़ोन के बाज़ार में आने और उसकी कीमत मध्यवर्ग के दायरे में आने और थ्री-जी जैसे इंटरनेट तकनीक के लागू होने से यह और भी आसान हो गया है| हाथ में इंटरनेट के इस औज़ार ने सोशल मीडिया पर लोगों की सक्रियता बेहद बढ़ा दी है|

समय की मांग है हिंदी में भी उपलब्ध हो फेमिनिस्ट विचार

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर हिंदी का प्रभाव काफ़ी बढ़ा है, इसकी वजह है उसके उपभोक्ता| ऐसे में भारतीय महिला-अभिव्यक्ति या यों कहे फेमिनिज्म के संदर्भ में यह ज़रूरी हो जाता है कि महिला से जुड़े विमर्शों, दर्शन, विचारधारओं और मुद्दों पर हिंदी में भी लेख उपलब्ध हो| महिला विषयक दर्शन ‘नारीवाद’ व उनसे जुड़े सिद्धातों की बात करें तो इंटरनेट में ज्यादातर उपलब्ध लेख अंग्रेजी में है| यह न केवल सिद्धांतों का किस्सा है बल्कि इंटरनेट पर महिला से जुड़े मुद्दों पर ज्यादातर लेख व सूचनाएं अंग्रेजी में उपलब्ध है| ऐसे में यह न केवल समय बल्कि समाज और भाषा के विकास के लिए भी ज़रूरी हो जाता है कि इंटरनेट की दुनिया में फेमिनिस्ट मुद्दों पर हिंदी में भी सूचनाएं व विचार मौजूद हो|

हिंदी की छह फेमिनिस्ट वेबसाइटें

आज इंटरनेट पर सामाजिक सरोकारों और मीडिया संबंधी अधिकतर वेबसाइटों में महिला का कॉलम या उनसे जुड़ी खबरें उपलब्ध है| पर दुर्भाग्यवश इनमें उपलब्ध ज़्यादातर लेखों में आपस में एक विरोधाभास दिखाई पड़ता है| कभी कोई लेख महिला संबंधी किसी गंभीर मुद्दे पर केंद्रित होता है तो वहीं दूसरे लेख में महिलाओं को अलग-अलग वर्गों में बांटकर उनकी आलोचना की जाती है| दूसरे शब्दों में कहा जाए तो हिंदी में बेहद सीमित ऐसी महिला केंद्रित वेबसाइट है जहां महिला विषयक मुद्दों पर किसी स्थिर विचार के तहत सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर लेख उपलब्ध हों|

उन्हीं सीमित वेबसाइटों में कुछ ऐसी महिला-केंद्रित, फेमिनिस्ट वेबसाइट है जिनपर महिला-विषयक मुद्दों, विचारों और दर्शन को हिंदी भाषा के माध्यम से समाज में एक वृहत स्तर पर पहुँचाने का सक्रिय प्रयास किया जा रहा है और वे इस प्रयास में सफल होती भी दिखाई दे रही है| महिला-अभिव्यक्ति पर यह एक ठोस वैचारिक पहल है| इन फेमिनिस्ट वेबसाइटों के माध्यम से महिला संबंधी मुद्दों के विचारों की एक ऐसी श्रृंखला बन रही है जो पितृसत्ता के खिलाफ़ संवाद के स्वस्थ माहौल का निर्माण करने और महिला स्वतंत्रता व समानता के नए प्रतिमान गढ़ने में भी सहायक है| अपने संक्षिप्त परिचय के साथ महिलाओं पर केंद्रित ये है वो छह फेमिनिस्ट वेबसाइटें

1. मेरा रंग

मेरा रंग एक वैकल्पिक मीडिया है जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है| यह स्त्रियों के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, उनके संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है| वेबसाइट के अलावा इसका एक फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल भी है|

मेरा रंग
मेरा रंग

2. आधी आबादी

आधी आबादी हिंदी भाषा में महिला पर केंद्रित पहला वेबपोर्टल है| इस वेबपोर्टल के माध्यम से महिलाओं को सूचनाओं, विमर्शों और उनकी भागीदारी के ज़रिए सशक्त करने का काम किया जाता है|

आधी आबादी
आधी आबादी

3. फेमिनिज्म इन इंडिया

फेमिनिज्म इन इंडिया एक इंटरसेक्शनल डिजिटल प्लेटफार्म है| यह मूलत: नारीवाद कि दिशा में महिलाओं को शिक्षित करने और बेहतर समझ विकसित करने की दिशा में काम करता है|

फेमिनिज्म इन इंडिया
फेमिनिज्म इन इंडिया

4. योर स्टोरी का ‘वुमनिया’

योर स्टोरी का ‘वुमनिया’ हिंदी भाषा में महिला केंद्रित कॉलम है| यहां महिला विषयक मुद्दों को नारीवादी नजरिए से उजागर कर उनपर चर्चा और विमर्श किया कर लेख, विचार और सूचनाओं को प्रस्तुत किया जाता है|

योर स्टोरी का ‘वुमनिया’
योर स्टोरी का ‘वुमनिया’

5. स्त्रीकाल 

स्त्रीकाल’, स्त्री समय और सच हिंदी में स्त्री मुद्दों पर एक ठोस वैचारिक पहल है, जो पाठकों और अध्येताओं का विश्वास हासिल करने में सफलता पा रहा है| स्त्रीकाल की ओर से देश के विभिन्न शहरों में स्त्रीवादी मुद्दों पर विचार श्रृंखलाओं का आयोजन कर पितृसत्ता के खिलाफ़़़़ एक संवाद का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा ह|

स्त्रीकाल
स्त्रीकाल

6. खबर लहरिया

खबर लहरिया देश का एकमात्र डिजिटल ग्रामीण मीडिया नेटवर्क है| खबर लहरिया एक शक्तिशाली स्थानीय प्रहरी और जमीनी जवाबदेही तय करने का मजबूत तंत्र बना है| यह खासतौर पर सरकार की ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण के लिए बनाई गयी योजनाओं के दावों और उनकी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करता है|

खबर लहरिया
खबर लहरिया

हो रहा है विकसित हिंदी का एक बड़ा सक्रिय वर्ग

आज हिंदी में एक बड़ा वर्ग है जो सोशल मीडिया को अभिव्यक्ति का बेहतर माध्यम मानता है| उनका मानना है कि सोशल मीडिया अपने आपको उद्घाटित करने का बेहतर मंच है और वो हिंदी के फैलाव के हित में है| सोशल मीडिया की वजह से हिंदी के फैलाव के हित में है| सोशल मीडिया की वजह से हिंदी तो वृहत्तर पाठक वर्ग तक पहुंच ही रही है, साहित्य भी लगातार लोगों तक पहुंचकर स्वीकृति पा रहा है| यह महिला केंद्रित फेमिनिस्ट वेब्सीटेस के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी एक शुभसंकेत है|

उल्लेखनीय है कि वैश्वीकरण के इस युग में जब पूरे विश्व के लोग मिलकर एक समाज बना रहे हैं, एक साथ कार्य कर रहे हैं, आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और राजनीतिक ताकतों का एक संयोजन बन रहा है तो हिंदी को थोड़ी अहमियत मिलनी शुरू हुई है| वर्तमान भूमंडलीयकरण के युग में हिंदी की आवश्यकता बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अनुभव की जा रही हैं| संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की भूमंडलीकरण के युग में और अधिक सशक्त हो गयी है|


पाठक से अनुरोध – वेबसाइटों की यह सूची फेमिनिज्म इन इंडिया के द्वारा तैयार की गयी है| यदि इनमें कोई नाम बाकी रह गया हो तो कृपया कमेन्ट बॉक्स में वेबसाइट का नाम देने की कृपा करें|

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