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मौजूदा समय में इंटरनेट की दुनिया ने सूचना और ज्ञान के प्रसार में अहम भूमिका निभाई है। इंटरनेट की सकारात्मक भूमिका को आंकने के लिए किए गए सर्वेक्षणों में ये तथ्य सामने आए हैं कि इंटरनेट वूमन एम्पॉवरमेंट का एक अदृश्य लेकिन सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। इसके साथ ही, धीरे-धीरे महिलाएं अब न केवल अपने से जुड़े तमाम अनुभवों को अपने विचार सोशल मीडिया में साझा कर रही है बल्कि अपने खिलाफ होने वाली हिंसा के विरोध में भी अपनी आवाज़ बुलंद कर रही है|

हाल ही में, सोशल मीडिया में #MeToo के साथ एक नये अभियान की शुरुआत की गयी है| इस अभियान के ज़रिए दुनियाभर की महिलाएं अपने साथ हुई यौन-उत्पीड़न की आपबीती सोशल मीडिया में साझा कर रही है| इस आंदोलन की शुरुआत हॉलीवुड अभिनेत्री एलीसा मिलाने ने ट्विटर पर की| उन्होंने हॉलीवुड फिल्म निर्माता हार्वे वीनस्टीन पर अपने यौन-शोषण का आरोप लगाया और उन्होंने एक ट्वीट के जरिए लोगों को मी टू के साथ अपने बुरे अनुभव साझा करने के लिए कहा। साथ में उन्होंने लिखा कि ‘अगर आपका भी यौन-शोषण हुआ है या आप पर यौन हमला हुआ है, तो जवाब में “हैशटैग मी टू” लिखें।’

बेहद कम समय में इस अभियान को दुनियाभर में इस कदर समर्थन मिला कि करोड़ों की संख्या में महिलाओं ने सोशल मीडिया में इस हैशटैग के साथ अपनी साथ हुई यौन-उत्पीड़न की घटना के बारे में साझा करना शुरू कर दिया| भारतीय महिलाओं ने भी इस अभियान के ज़रिए अपने साथ हुई यौन-उत्पीड़न की घटना के बारे में लिखना शुरू कर दिया|  इतनी अधिक संख्या में महिलाओं के साथ होने वाली यौन-उत्पीड़न की घटनाएँ हैरान करने वाली है| किसी महिला ने बचपन में अपने साथ हुई यौन-उत्पीड़न की घटना को साझा कि तो किसी ने पीएचडी के दौरान गाइड पर यौन-उत्पीड़न का आरोप लगाया|

‘क्योंकि हमारे यहाँ तो इसे घर की इज्जत बाज़ार में उछालना कहा जाता है न…?’

इस आंदोलन के ज़रिए ही सही महिलाओं का इस तरह अपनी आपबीती बेबाकी के साथ सोशल मीडिया पर साझा करना समाज के लिए अच्छा संदेश है, क्योंकि ये समाज की बेहतरी (खासकर महिलाओं के संदर्भ में) बेहद ज़रूरी है| लेकिन इसकी अच्छाई कायम तभी रह सकती है जब महिलाओं की इन आपबीती को गंभीरता के साथ लिया जाये| वरना ये सच्ची कहानियाँ भी सिर्फ अफ़साने तक सिमटकर रह जायेंगे|

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समर्थन और विरोध के साथ प्रसिद्ध होता अभियान #MeToo

भारत में भी बॉलीवुड व अभिनय जगत से जुड़ी महिलाओं ने इस अभियान पर अपनी मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है| किसी ने इसका समर्थन करते हुए अपने साथ हुई यौन-उत्पीड़न की घटना के बारे में बताया तो किसी ने इसे सिर्फ फैशन बनाने तक सीमित करने के खिलाफ अपने विचार रखे|

कॉमेडियन मल्लिका दुआ ने भी अपने इंस्टाग्राम पर MeToo का हैश टैग लगाते हुए बचपन में अपने साथ हुए यौन-शोषण के बारे में बताया|

मल्लिका ने अपने फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक पोस्‍ट के जरिये बताया कि सात साल की उम्र में उनके साथ भी यौन शोषण की घटना हुई| मल्लिका ने घटना का जिक्र करते हुए लिखा ‘मैं भी (#MeToo)| खुद अपनी कार में| मेरी मां कार ड्राइव कर रही थीं जबकि वह हमारे साथ पीछे सीट पर बैठा था| पूरे समय उसका हाथ मेरी स्‍कर्ट में था| उस वक्त मैं सिर्फ सात साल की थी और मेरी बहन ग्यारह साल की| उसका हाथ मेरी स्‍कर्ट के अंदर हर जगह और मेरी बहन की पीठ पर घूमता रहा| मेरे पिता, जो उस समय दूसरी कार में थे उन्होंने उसका मुंह तोड़ दिया क्‍योंकि उसी रात उन्‍होंने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया|’

पाकिस्तान की एक पत्रकार रिम्मेल मोहिदीन ने भी सोशल मीडिया पर एक घटना का जिक्र किया| उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ”पाकिस्तान में दर्जी सात बार आपके शरीर का माप लेते हैं|”

इसके अलावा उन्होंने अपनी जॉब से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया| उन्होंने लिखा एकबार एक रिपोर्टर ने उन्हें खुद के साथ शराब पीने का ऑफर देते हुए कहा कि अगर वो ऐसा करती हैं तभी वह स्टोरी चलाएगा और जब मोहिदीन ने इनकार कर दिया तो उनकी स्टोरी नहीं चलाई गई|

हमारे समाज में जब कभी भी महिला अपने विचार अभियक्त करती है तब उसे आलोचना और विरोध का शिकार होना पड़ता है|

वहीं इस कैंपेन के बारे में मशहूर एक्सट्रेस और फिल्म डायरेक्टर पूजा भट्ट का कहना हैं-

कोई मुझे बताये कि जो औरतें या मर्द फेसबुक पर नहीं है, जिन्हें सोशल साइट्स का आइडिया नहीं है उनकी बातें कौन सुनेगा? केवल फेसबुक अपडेट पर सेक्शुअल अब्यूज़ मैसेज को वायरल करने मात्र से ही यह समस्या खत्म नहीं हो सकती। हम ऐसी सोसायटी में रहते हैं, जहां लोग अपने घरों की बात को बाहर लाने से डरते हैं। जिस दिन लोगों में यह हिम्मत आ जाये और अपने बाप, चाचा, मामा, आंटी का नाम लेने लगें, तभी शायद बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। मैं ही क्या, मुझे बताइए कि कौन सी ऐसी महिला है, जो इसका शिकार नहीं हुई हैं। लड़के भी सेक्शुअली अब्यूज़्ड होते हैं। इंडस्ट्री में तो लड़कियों से ज्यादा लड़के इसका शिकार होते हैं, लेकिन वह अगर किसी से इसका ज़िक्र करते हैं, तो लोग मज़ाक बनाते हैं। मुझे लगता है हमें इस मुद्दे पर एक समान ही सोचना चाहिए।

समय नजरिया बदलने का

कोई भी नज़ारा अच्छा है या बुरा ये सीधे तौर पर हमारे देखने के नजरिए पर निर्भर करता है| इस अभियान का किसी ने समर्थन किया तो किसी ने विरोध| कुछ ने कहा कि ये सिर्फ ‘पब्लिसिटी’ पाने का तरीका है| अगर हम मान भी लें कि ये सब पब्लिसिटी पाने के लिए किया गया है तो क्या इस अभियान का हिस्सा बनने वाली हर महिला पब्लिसिटी के लिए अपनी आपबीती साझा कर रही है…? ऐसा सोचना भी गलत है| क्योंकि इसबात को हम आप अच्छी तरह से जानते है कि हमारे समाज में जब कभी भी महिला अपने विचार अभियक्त करती है तब उसे आलोचना और विरोध का शिकार होना पड़ता है और ऐसे में अगर महिला अपने साथ हुई यौन-उत्पीड़न की घटना के बारे में अपने अनुभव साझा कर रही है, तो ऐसे में विरोध होना लाज़मी है| ‘क्योंकि हमारे यहाँ तो इसे घर की इज्जत बाज़ार में उछालना कहा जाता है न…?’

अब विरोध हो या समर्थन लेकिन इस अभियान के ज़रिए ये बात साफ़ हो गयी है कि हमारे समाज में महिलाओं के साथ होने वाली यौन-हिंसा एक गंभीर समस्या है, जिससे हर दूसरी महिला जूझ रही है और जिसके लिए ज़रूरी है कि ‘महिला अपनी बात सोशल मीडिया में साझा करके इज्जत उछाल रही है’ इस नजरिए को बदलकर ‘इज्जत उछालने के किस्सा दुबारा न कहा जाये कुछ ऐसा काम किया जाये’ वाला होना चाहिए|

Also Read: To The Straight Gender Binary Men Using The #MeToo Handle

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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