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जेंडर असमानता किसी भी समाज में ढ़ेरों जटिल समस्याओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है| इन समस्याओं का परिणाम कई बार इतना भयानक होता है कि ये सीधेतौर पर लोगों के जीवन को जोखिम में डालने लगता है| इसी तर्ज पर, आज अपने इस लेख के माध्यम से मैं बात करने जा रही हूँ तंजानिया के ग्रामीण इलाकों में जेंडर आधारित मानदंड, यौन शोषण और किशोरावस्था में गर्भधारण के विषय में, जो वहां की लड़कियों के जीवन को बुरी तरीके से प्रभावित कर रहा है| उल्लेखनीय है कि यह लेख सहभागी अनुसंधान और कार्य परियोजना (विटू नेवाला) द्वारा आयोजित एक सर्वेक्षण पर केंद्रित है|

आमतौर पर किशोरावस्था में गर्भधारण करने से लड़कियों में असुरक्षित गर्भसमापन, बच्चे के जन्म के समय कठिनाई, गर्भावस्था के दौरान बीमारियों, मौत और एचआईवी व बाकी यौन संचारित संक्रमणों के साथ, स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है| जो किशोरियां गर्भवती हो जाती हैं, उनके स्कूल छोड़ने के साथ ही आगे की शिक्षा भी रुक जाती है, जिसका सीधा संबंध उनकी आजीविका के विकल्प कम हो जाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता के सीमित हो जाने से है| किशोरावस्था में गर्भधारण होने से वयस्क होने पर उनके विकास का स्तर कम होता है, जिसके कारण वैवाहिक रिश्तों में पत्नियों पर हिंसा के ज्यादा मामले और फैसले करने में उन्हें कम महत्व दिए जाने जैसे परिणाम देखने को मिलते हैं|

तंजानिया के ग्रामीण इलाकों में किशोरावस्था में गर्भधारण

तंजानिया में किशोरावस्था में गर्भधारण एक बड़ी समस्या है, जहाँ करीब एक-तिहाई (28.4%) लड़कियाँ 18 साल की उम्र होने तक माँ बन जाती हैं और आधे से ज्यादा (56.4%) महिलाएं 20 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले अपने पहले बच्चे को जन्म देती हैं| राष्ट्रीय जनसांख्यिकी और स्वास्थ्य सर्वेक्षण (डीएचएस) के 2010 तक के पांच साल के आंकड़े दर्शाते हैं कि तंजानिया में सभी गर्भधारणों का करीब 25 फीसद अनियोजित गर्भ होता है| 20 साल से कम उम्र की तंजानियाई महिलाओं में से कम से कम 26.6% महिलाओं को उस समय बच्चा पैदा हुआ, जब वे बच्चा नहीं चाहती थी| जबकि कुछ अनचाहे गर्भधारण, गर्भनिरोधक तरीकों के इस्तेमाल और उनके स्रोतों की जानकारी की कमी के कारण हो जाते हैं, यह भी उस सामाजिक और ढांचागत असमानता का ही परिणाम है, जिसमें किशोरियों के यौन संबंधी निर्णय लेने के साथ समझौता किया जाता है|

जेंडर असमानता किसी भी समाज में ढ़ेरों जटिल समस्याओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है|

अनचाहे गर्भ की समस्या और इसके कारण

लड़कियों के अनचाहे गर्भधारण के मामले बढ़ने के सबसे ज्यादा असरदार कारणों में से हैं – एक ही समय में कई यौन साथी बनाना, अंतर-पीढ़ीगत और पैसे के लिए सेक्स और यौन हिंसा| 15 से 19 साल की तंजानियाई लड़कियों में से करीब एक-चौथाई (23.8%) ने 15 साल की उम्र से हिंसा का अनुभव किया है और 13.2% ने कम से कम एक बार अपने साथ यौन हिंसा होना बताया| 15 से 49 साल की उम्र की दस फीसद तंजानियाई महिलाओं ने भी बताया कि उनका पहला यौन अनुभव जबरदस्ती वाला था और जब 15 साल की उम्र से पहले यौन संबंध की शुरुआत को इसमें शामिल कर दिया गया तो यह अनुपात और भी ज्यादा हो गया| हिंसा पर एक बहु देशीय अध्ययन से पता चला कि प्रांतीय तंजानिया में 1,100 महिलाओं के नमूने में से 17% में जबरन सेक्स की बात कही गयी और उनमें से 43% ने इसे 14 साल की कम उम्र में अनुभव होना बताया|

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जेंडर असमानता की मार झेलती तंजानिया की लड़कियां

तंजानिया में एक अन्य अध्ययन से पता चला कि कभी न कभी सेक्स का अनुभव करने वाली 127 किशोरी उत्तरदाताओं में से एक चौथाई ने आर्थिक और भौतिक लाभों के लिए सेक्स किया था| इसे चाहे अपने साथियों के बराबर बने रहने और भौतिक वस्तुएं हासिल करने के लिए स्वैच्छिक विकल्प के रूप में देखा जाए या अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कोई दूसरा रास्ता न होने पर लिए गये फैसले के रूप में, लेकिन पूरे उप सहारा क्षेत्र में धन/वस्तु के बदले सेक्स करना किशोरियों में बहुत ही आम बात है| इन आंकड़ों में यह वास्तविकता छिपी है कि लड़कियों के जीवन की दिशा जेंडर असमानता और उन जेंडर मानदंडों से तय होती है, जो उनके सामाजिक और यौन संबंधों पर नकारात्मक असर डालते हैं और उनके इस अधिकार को काफी सीमित कर देते हैं कि वे सेक्स करें या नहीं और करें तो कब और किसके साथ और यह कितना सुरक्षित है|

किशोरावस्था में गर्भधारण होने से वयस्क होने पर सशक्तिकरण का स्तर कम होता है|

लेकिन लड़कियों का जीवन और निर्धारित जेंडर भूमिकाएं और अशक्तिकरण जो उन्हें परंपरागत रूप से निचले दर्जे पर रखे हुए हैं, इन्हें बदला जा सकता है| पूरे तंजानिया में, कार्यक्रम निर्माताओं, नीति निर्माताओं और डोनरों ने न केवल एचआईवी और कम उम्र में गर्भधारण की रोकथाम के लिए, बल्कि व्यापक स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भी लड़कियों की क्षमता के उपयोग पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है|

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ये निष्कर्ष इन समुदायों की किशोरियों के यौन स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर गरीबी, ज्यादा उम्र के पुरुषों और हमउम्र लड़कों की यौन अपेक्षाओं, बलात्कार और जबरन सेक्स और अनचाहे गर्भधारण के साथ खतरों के स्रोतों पर प्रकाश डालते हैं| ज्यादातर लड़कियों को अपेक्षाएं परिवार बनाने, कोई छोटा व्यवसाय करने और अपना घर होने पर केंद्रित थीं और पीएलए प्रतिभागियों ने यह माना कि ज़ल्दी गर्भधारण और माध्यमिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाना उनके सपनों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं|


यह लेख क्रिया संस्था की वार्षिक पत्रिका यौनिकता, जेंडर और युवा अधिकार (अंक 8, 2014) से प्रेरित है| इसका मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें|

अधिक जानकारी के लिए – फेसबुक: CREA | Instagram: @think.crea | Twitter: @ThinkCREA

तस्वीर साभार : ruceni.info

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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