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भारत में एचआईवी संक्रमण की महामारी के प्रसार के बारे में अभी भी पूरी जानकारी मौजूद नहीं है| ऐसे अनुमान लगाये जाते हैं कि 4 से 10 मिलियन लोग पहले ही इससे प्रभावित हो चुके हैं| लंबे समय तक भारत में संक्रमण के प्रसार से यह कहकर इनकार किया जाता रहा है कि सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था के अंतर्गत विवाह करने और पारंपरिक वैवाहिक संबंधों से एचआईवी से सुरक्षा मिलती है| जब साल 1994 में कई क्षेत्रों में स्थापित निगरानी व्यवस्थाओं से यह जानकारी मिलने लगी कि यौनकर्मियों, यौन संचारित संक्रमण क्लीनिकों में आने वाले लोगों और प्रसव पूर्व जांच के लिए आने वाली महिलाओं में संक्रमण के प्रसार के रुझान बढ़ते जा रहे हैं तब लक्षित समूहों के लिए एचआईवी की रोकथाम के तुरंत प्रयास किये जाने की ज़रूरत महसूस हुई| सरकारी विभागों और गैर सरकारी संगठनों ने लोगों के यौन संबंधों और यौन स्वास्थ्य के बारे में व्यवस्थित आंकड़ों के उपलब्ध न होते हुए भी एचआईवी जागरूकता अभियान शुरू कर दिए|

गुजरात में यौन नेटवर्किंग और एचआईवी/एड्स की समस्या

गुजरात राज्य के एक औद्योगिक क्षेत्र में यौन नेटवर्किंग और यौन स्वास्थ्य की वास्तविक हालत का विश्लेष्ण करने से पता चला कि यहाँ नवयुवकों के मन में हस्तमैथुन और वीर्य खत्म होने को लेकर लगातार चिंताएं बनी रहती थी| इसी तर्ज पर, साल 1997 में दीपक चेरिटेबल ट्रस्ट नामक एक गैर सरकारी संगठन ने अपने कार्यक्षेत्र में स्थिति का आकलन करने के बाद एचआईवी रोकथाम गतिविधियों को अपने सामाजिक विकास कामों के साथ जोड़ने की संभावना पर विचार किया| दीपक चेरिटेबल ट्रस्ट पिछले कई सालों से नंदानगर (बदला हुआ नाम) नामक औद्योगिक विकास क्षेत्र में काम कर रहा है| यह क्षेत्र गुजरात में वड़ोदरा के पास बीस गांवों वाला क्षेत्र है, जहाँ रहने वाले 40 हज़ार निवासियों में से अधिकतर करीब 200 वहां मौजूद रसायनिक कारखानों में काम करते हैं| एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग इस क्षेत्र से होकर गुजरता है और बहुत से ट्रक यहाँ रुकते हैं| यहाँ बहुत से पेट्रोल पंप, ढाबे और दुकानें हैं और यहाँ मुसाफिरों को सफर में आराम करने का मौक़ा मिलता है| राजमार्ग के आसपास स्थानीय देशी शराब और यौनकर्मी भी मिल जाते हैं|

दीपक चेरिटेबल ट्रस्ट के कर्मचारियों को एक चिकित्सीय एंथ्रोपोलॉजी ने एचआईवी रोकथाम प्रयास करने के लिए महिलाओं और पुरुषों की ज़रूरत को समझने का प्रशिक्षण दिया| उन्होंने कई लोगों के बीच अनुसंधान किये जाने की एन्थ्रोग्राफिक पद्धति का इस्तेमाल करते हुए इन कर्मचारियों का मार्गदर्शन भी किया| अनुसंधान की इस प्रक्रिया में सामाजिक मैपिंग, समूह चर्चा, विस्तृत पहले से तैयार की गयी प्रश्नावली से साक्षात्कार और प्रमुख सूचना प्रदाताओं से बातचीत करना शामिल था|

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राजमार्ग, यौनकर्म और यौन संचारित संक्रमण

राजमार्ग पर यौन व्यवहार से जुड़े बहुत से यौनकर्मी किसी एजेंट (आमतौर पर महिला) की मार्फत काम करते हैं| यह एजेंट महिला कोई चाय की दुकान चलाती है या फिर शराब बेचती है और ग्राहकों को इन महिलाओं के पास भेजती है| इन ग्राहकों में न केवल ट्रक चालक बल्कि गाँव के पुरुष भी होते हैं| हाइवे में काम करने वाली इन महिलाओं के साथ यौनकर्म आमतौर पर बिना जान पहचान होता है और यह व्यवसाय बड़े ही सुनियोजित ढंग से चलता है| आमतौर पर नियमित चलने वाले इन संबंधों में यौन साथियों की संख्या और भावनात्मक जुड़ाव में काफी अंतर होता है| गांवों की जिन 23 महिलाओं के साथ साक्षत्कार किये गये उनमें से 5 ने यह बताया कि उनके 4 ज्यादा नियमित यौन साथी है| राजमार्ग पर यौनकर्म करने वाली महिलाओं ने हर रोज 10 से अधिक ग्राहकों के साथ संबंध बनाये जाने की जानकारी दी|

महिलाओं के साथ साक्षत्कार करने पर यह पता चला कि उनमें यौन संचारित संक्रमण और कंडोम के सुरक्षात्मक इस्तेमाल के बारे में जागरूकता बहुत कम थी| महिलाओं ने लगातार ऐसे स्त्री रोग संबंधी समस्याओं की जानकारी दी जो दवाएं लेने पर भी ठीक नहीं होती थी| हम यह अनुमान नहीं लगा पाए कि इनमें से कितनी समस्याएं यौन संचारित संक्रमण के कारण थी| कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें इलाज के लिए जाने पर शर्म महसूस होती थी|

एचआईवी/एड्स कार्यक्रम में शामिल की गयी वीर्य नष्ट की चिंता

वीर्य खत्म होने से संबंधित जानकारियों को एचआईवी/यौन संचारित संक्रमण शिक्षण गतिविधियों के साथ एकीकृत किया गया है| दीपक चेरिटेबल ट्रस्ट के कर्मचारियों को अविवाहित नवयुवकों में हस्तमैथुन और सोते समय वीर्य स्खलित हो जाने के कारण मन में उत्पन्न होने वाली चिंताओं के बारे में और अधिक शोध करने की ज़रूरत महसूस हुई| हालांकि दक्षिण एशिया में वीर्य खत्म होने से जुड़ी चिंताओं के बारे में पुरानी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई तरह के साहित्य में काफी चर्चाएँ की गयी है, फिर भी इन विषयों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों के अंतर्गत यौन स्वास्थ्य सेवाएं देने के प्रयास करने के सभी कार्यक्रम केवल यौन संचारित संक्रमणों की रोकथाम और उपचार तक सीमित रह गये हैं| दक्षिण एशिया में पुरुषों में वीर्य खत्म होना महिलाओं में योनिस्राव होने जितना ही महत्व रखता है और इससे प्रजनन और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती है| वीर्य के खत्म होने से जुड़ी चिंताओं के रूप में देखा जाना ही इन्हें एचआईवी रोकथाम प्रयासों के अंतर्गत शामिल किये जाने के लिए काफी है|

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क्या वीर्य खत्म होने से जुड़ी चिंताओं के कारण जोखिमपूर्ण यौन व्यवहार पनपते हैं? अधिक जोखिमपूर्ण व्यवहार करने वाले पुरुषों में यौन अनुभवों से इसतरह के संबंधों का पता चलता है| सैद्धांतिक रूप से हस्तमैथुन और सोते समय वीर्य स्खलित हो जाने से होने वाले नुकसान से जुड़ी मान्यताओं को देखते हुए यौन संबंधों को आमतौर पर कम नुकसानदायक समझा जाता है| इस संबंध में संख्यात्मक आंकड़ों के अभाव है| प्रभावी एचआईवी रोकथाम कार्यों, लक्षित अन्तक्षेप प्रयासों के आधार को विस्तृत करते हुए इनमें समुदाय की पहचानी गयी स्वास्थ्य समस्याओं को जोड़ने का लगातार समर्थन किया जाना ज़रूरी है| दीपक चेरिटेबल ट्रस्ट ने गुजरात राज्य एड्स नियन्त्रण सोसायटी को इसबात के लिए तैयार कर लिया है कि गुजरात में एचआईवी/ एड्स से जुड़े सभी नए कार्यक्रमों में वीर्य खत्म होने के बारे में शिक्षा दिए जाने को शामिल किया जाए|


यह लेख क्रिया संस्था की वार्षिक पत्रिका एचआईवी/एड्स और मानवाधिकार : एक विमर्श (अंक 4, 2009) से प्रेरित है| इसका मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें|

अधिक जानकारी के लिए – फेसबुक: CREA | Instagram: @think.crea | Twitter: @ThinkCREA

तस्वीर साभार : zocalopoets

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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