‘पीरियड का खून नहीं समाज की सोच गंदी है|’ – एक वैज्ञानिक विश्लेषण

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पीरियड
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घर में पहली बार मेरे लिए पूजा रखी गयी थी| मैं अपने परिवार की पहली लड़की थी, जिसने बारहवीं में इतने अधिक नम्बर लाये थे और साथ में इतनी अच्छी यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम पास किया था| घरवालों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था| चूँकि हम मध्यमवर्गीय परिवार से है तो हमारे यहाँ खुशियों में पार्टी नहीं होती, बल्कि पूजा होती है| खैर, ये मेरे लिए बेहद गर्व और ख़ुशी का पल था| मारे ख़ुशी के मैं रातभर सो नहीं पायी थी| क्योंकि आज तक मैंने अपने परिवार में सिर्फ पुरुषों के नामपर पर उनकी सलामती और सफलता के नामपर पूजा होते और उनकी हिस्सेदारी को देखा था|

पूजा के लिए दूर-दूर से रिश्तेदार घर में आ चुके थे| घर में त्यौहार जैसा माहौल था| लेकिन अब इसे संयोग कहें या दुर्भाग्य कि अगले दिन सुबह मेरे पीरियड शुरू हो गये| माँ को जैसे ही पता चला उन्होंने माथा पीट लिया और कहा ‘लो! जिसके लिए इतनी तैयारी की गयी, वही पूजा में नहीं रहेंगीं|’ ये सुनते ही मेरे होश उड़ गये| मैंने कहा ‘क्यों, ये तो प्राकृतिक है|’ इसपर माँ और बाकी की महिला रिश्तेदारों से मेरी जमकर बहस हुई| कोई मेरे पक्ष को सुनने-समझने को तैयार नहीं हुआ| मैंने पीरियड के वैज्ञानिक पहलू पर बात करने की कोशिश की, पर सबका यही कहना था कि ‘पीरियड का खून गंदा होता है और तुम अब अपवित्र हो गयी हो, क्योंकि तुम्हारे पीरियड शुरू हो गये है| अब तुम पूजा में हिस्सा नहीं ले सकती हो|’

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मेरी किसी ने एक न सुनी और मुझे पीछे होना पड़ा| आज माहवारी स्वच्छता दिवस है तो सोचा माँ को तो उस वक़्त ये बात नहीं समझा पायी थी| क्यों न आज आप सभी से इसके वैज्ञानिक पहलू को आपसे साझा करूँ|

माहवारी स्वच्छता दिवस पर आज देश के करीब हर क्षेत्र में बात होने लगी है| कहने को तो अब पीरियड शर्म का विषय नहीं रहा| अब महिलाएं आसानी से सेनेटरी पैड खरीदती हैं| हाँ ये अलग बात है कि वो सेनेटरी पैड आज भी काली पोलिथीन में पेपर में लपेटकर दिया जाता है| अब हम पैड के साथ सेल्फी लगाते हैं| हाँ ये अलग बात है कि इसपर कुछ बोलना या अपने घर में महिलाओं के साथ इसपर बात करना ज़रूरी नहीं समझते हैं| इतना ही नहीं, अब हम सिनेमाघरों में पैडमैन भी देखने जाते है| हाँ ये बात अलग है कि पीरियड से जुड़ी भ्रांतियों का नियम की तरह पालन करते हैं|

आप ये अच्छे तरीके से जानते है कि पीरियड पर पैड के साथ सेल्फी लेने से नहीं इसपर तर्कों के साथ स्वस्थ बात करने से बदलाव आएगा|

खैर वो कहते हैं न कि हर सिक्के के दो पहलू होते है, ठीक उसी तरह पीरियड पर आधुनिकता के नामपर बढ़ते अपने समाज के भी दो पहलू है, जिनकी खोल और वास्तविकता में जमीन-आसमान का फ़र्क है| माहवारी स्वच्छता दिवस पर ख़ास आज हम बात करने जा रहे है पीरियड से जुड़े एक ऐसे ही पहलू की, जो इससे जुड़े मिथ्यों का मूल आधार है| या यों कहें कि जिसके आधार पर पीरियड से जुड़े मिथ्य सदियों से हमारे समाज और संस्कृति का हिस्सा बन चुके हैं|

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मेरी ही तरह अक्सर आपने सुना होगा कि लोग कहते हैं ‘पीरियड का खून गंदा होता है|’ सभ्यता-संस्कृति चाहे जो भी हो पीरियड से जुड़ा ये मिथ्य अपने आप में बेहद मजबूत पैठ हमारी ज़िन्दगी में बनाये हुए है| आइये जानते है विज्ञान क्या कहता है इस बात पर?  

पीरियड में निकलने वाले पदार्थ का ‘वैज्ञानिक विश्लेषण’

पीरियड के एक चक्र में अधिकतम 50-60 मिलीलीटर खून हमारी योनि से निकलता है| अब पहला सवाल ये आता है कि इस 50-60 मिलीलीटर खून में आखिर कौन-कौन से पदार्थ होते हैं?

आपको बता दें पीरियड के दौरान हमारी योनि से निकलने वाले खून में निम्नलिखित पदार्थ शामिल है –

1- रक्त
2- एंडोमेट्रियल तरल पदार्थ
3- एंडोमेट्रियल ऊतक
4- सरवाइकल और योनि म्यूकोसा
5- योनि से सूक्ष्मजीव

गौरतलब है कि पीरियड के दौरान निकलने वाले पदार्थ में खून की मात्रा सबसे कम होती है| मात्रात्मक रूप से, एक अध्ययन (फ्रेजर, मेकार्रोन, मार्खम, और रेस्टा, 1985) बताते है कि पीरियड में हीमोग्लोबिन एकाग्रता 35 फीसद, शिरापरक (हमारी नसों में रक्त) सांद्रता 4-5 मिलीग्राम / 100 मिलीलीटर के बीच है।

कहने को तो अब पीरियड शर्म का विषय नहीं रहा| अब महिलाएं आसानी से सेनेटरी पैड खरीदती हैं| हाँ ये अलग बात है कि वो सेनेटरी पैड आज भी काली पोलिथीन में पेपर में लपेटकर दिया जाता है|

क्या होता है एंडोमेट्रियल अस्तर ?

एंडोमेट्रियल अस्तर कोशिकाओं की एक परत से बना होता है। पीरियड चक्र के के दौरान, हार्मोनल प्लेटर धमनी की आपूर्ति को काट देता है, जिससे एंडोमेट्रियल ऊतक की मृत्यु हो जाती है और संयोजी ऊतक में खून के बदले रक्तस्राव होता है।तार्किक रूप से, पीरियड के समय निकलने वाला पदार्थ प्राकृतिक क्रम में एंडोमेट्रियम, गर्भाशय ग्रीवा या योनि से निकलने वाले अधिक द्रव से बना होता है|

ऐसे में यह सवाल हमारे मन में उठ सकता है कि क्या पीरियड के दौरान निकलने वाले पदार्थ में जो हिस्सा मरे हुए ऊतक होता है, वो अशुद्ध होता है? तो आपको बता दें, ऐसा बिल्कुल नहीं है| एंडोमेट्रियल ग्रंथियों के स्राव के साथ संयुक्त एंडोमेट्रियम के स्ट्रोमल / ऊतकों के साथ एंडोमेट्रियल अस्तर का खून, पीरियड में निकलने वाला पदार्थ को बनाता है। इन ऊतकों की आयनिक प्रकृति होती है, जो कम पीएच स्थिति के साथ-साथ लैक्टोबिक एसिड के उत्पादन में लैक्टोबैसिलस के विकास में मदद करती है जो अनिवासी जीवाणु (विशेष रूप से संपन्न होने से ई.कोली) में मदद करती है। संक्षेप में, इसमें एक सक्रिय एंटी-माइक्रोबियल गतिविधि (वेलोर, पार्क, इग्रेटी, और गेंज, 2002) है।

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सरल शब्दों में, इसे समझा जाए तो हर महीने महिला के शरीर में बनने वाला अंडा पीरियड के रूप में योनि से बाहर निकलता है| पीरियड के दौरान गाढ़े खून जैसे निकलने वाले में खून की मात्रा बेहद कम होती है, बल्कि इसमें अन्य तत्वों की मात्रा ज्यादा होती है| ये वही तत्व हैं जो महिला के गर्भ में पलने वाले भ्रूण के निर्माण और विकास में अहम भूमिका निभाते है| साफ़ है कि पीरियड के दौरान निकलने वाला पदार्थ गंदा या अशुद्ध नहीं होता है| बल्कि ये महिला के शरीर में बनने वाला ऊर्वरक बीज होता है, जो ढ़ेरों उपयोगी रसायनों से मिलकर बना होता है|

मानती हूँ कि सदियों से हमारे दिमाग में ये बात बैठायी गयी है कि पीरियड का खून गंदा होता है और इसे एकबार में नकारना आपके मुश्किल होगा| पर पूरा भरोसा है कि ये नामुमकिन नहीं है| माहवारी स्वच्छता दिवस पर आप यह लेख पढ़ रहे हैं, जाहिर है आप पीरियड से जुड़े और पहलुओं को उजागर करने उन्हें जानने के लिए इच्छुक है और ये भी विश्वास है कि आप इसके वैज्ञानिक पहलू को तर्कों के आधार पर स्वीकार कर इसे अपने जीवन में लागू भी करेंगें| क्योंकि आप ये अच्छे तरीके से जानते है कि पीरियड पर पैड के साथ सेल्फी लेने से नहीं इसपर तर्कों के साथ स्वस्थ बात करने से बदलाव आएगा|

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तस्वीर साभार : www.rt.com

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