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मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) द्वारा विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श के बाद तैयार की गई प्रारूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2019, जिसे जनता से टिप्पणियों के लिए रखा गया है, इसमें एक खंड शामिल है जो ट्रांसजेंडर छात्रों और इसकी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करता है।  

यह ड्राफ्ट अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार किया गया था और यह ‘सहायक, समता, गुणवत्ता, सामर्थ्य  और उत्तरदायित्व’ के आधारभूत स्तंभों पर बनाया गया है और भारत की शिक्षा प्रणाली में विभिन्न परिवर्तनों का प्रस्ताव करता है, जिसमें शिक्षकों के प्रशिक्षण और उनकी गुणवत्ता शामिल है। इस नीति के अध्याय 6 का शीर्षक है ‘समतामूलक और समावेशी शिक्षा’ जिसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों पर भी एक भाग दिया गया है।

प्रारूप के भाग 6.7 का शीर्षक है ‘ट्रांसजेंडर बच्चों की शिक्षा’ जो कि यह विवरण देता है कि नई शिक्षा नीति को किस प्रकार समावेशी होना चाहिए। अनुभाग का पहला अनुच्छेद (P6.7.1) ‘स्कूली शिक्षा में ट्रांसजेंडर बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने’ के बारे में बात करता है- ‘यह नीति ट्रांसजेंडर बच्चों की शिक्षा से संबंधित मामलों को संबोधित करने और शिक्षा के संबंध में उनके जीवन में आने वाले कलंक और भेदभाव को दूर करने के लिए उचित उपाय शुरू करने की तत्काल आवश्यकता को स्वीकार करती है।’ नीति में ट्रांसजेंडर बच्चों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना और उनके लिए सुरक्षित और सहायक स्कूल वातावरण का निर्माण करना है, ‘स्कूलों, स्कूल परिसरों, और सामाजिक कार्यकर्ताओं को ट्रांसजेंडर छात्रों और उनके माता-पिता के साथ परामर्श करने के लिए एक योजना विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जो उनके नाम, उनके लिंग के अनुसार शौचालयों और अन्य स्थानों तक पहुंच के संबंध में है।’

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इसके अलावा, प्रारूप नीति में कहा गया है कि शिक्षकों को ट्रांसजेंडर छात्रों की जरूरतों के बारे में संवेदनशील और प्रशिक्षित किया जाएगा और पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों को ट्रांसजेंडर बच्चों, उनकी चिंताओं, और दृष्टिकोणों से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए फिर से तैयार किया जाएगा जो उनकी सीखने की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे।’

इस नीति के अध्याय 6 का शीर्षक है ‘समतामूलक और समावेशी शिक्षा’ जिसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों पर भी एक भाग दिया गया है।

अगले अनुच्छेद (P6.7.2) में कहा गया है: सामाजिक शिक्षा के साथ संयोजन के रूप में नागरिक समाज समूहों की सक्रिय भागीदारी के लिए स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों में ट्रांसजेंडर बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।” प्रारूप नीति राज्यों में शिक्षा निदेशालय और NCPCR/SCPCR के सक्रिय जुड़ाव का प्रस्ताव ‘यह सुनिश्चित करने के लिए है कि स्कूली उम्र के सभी ट्रांसजेंडर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्कूल शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाया जाए।’

प्रारूप नीति ने माध्यमिक विद्यालय में यौन शिक्षा के साथ-साथ स्कूलों में लैंगिक संवेदनशीलता का भी प्रस्ताव किया है।  अनुच्छेद P6.2.5 में, लड़कियों की शिक्षा के साथ काम करने वाली धारा 6.2 के तहत, नीति में कहा गया है – ‘सभी शैक्षणिक संस्थानों और संबद्ध कार्यालयों को उत्पीड़न मुक्त वातावरण के महत्व पर जकड़ी हुई लैंगिक भूमिकाओं को तोड़ने के लिए लैंगिक मुद्दों पर जागरूकता सत्र आयोजित करना अनिवार्य होगा  और  साथ ही इसमें लिंगों के समान उपचार, और लड़कियों और महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा और अधिकारों पर, जिनमें यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), बाल विवाह निषेध अधिनियम, मातृत्व लाभ अधिनियम (इसके संशोधन के साथ) और कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम।  प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों और शैक्षिक प्रशासकों के लिंग-संवेदनशील और समावेशी कक्षा प्रबंधन के बारे में जागरूकता को बढ़ाना होगा।’

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पर ड्राफ्ट नीति, युवा किशोरों को विभिन्न लैंगिकताओं के बारे में ज्ञान के साथ शिक्षित करने का कोई उल्लेख नहीं करती है। MHRD वर्तमान में प्रारूप NEP 2019 पर जनता से प्रतिक्रिया मांग रहा है, और आपकी टिप्पणियां और प्रतिक्रिया 30 जून तक सीधे nep.edu@nic.in पर मेल करके प्रस्तुत की जा सकती हैं।

आप अपनी टिप्पणियों को Google docs (लिंक) में भी जोड़ सकते हैं जो कि  टिप्पणियों को सामूहिक रूप से भेजने के लिए तैयार किया जा रहा है।


यह लेख इससे पहले गेलैक्सी मेगेज़ीन में प्रकाशित किया जा चुका है|

तस्वीर साभार : ppcugdisosdm

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