भारतीय महिला खिलाड़ियों ने भारत का नाम रौशन करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। खेल चाहे जो भी हो, जहाँ भी हो, भारतीय महिलाएं कहीं भी अपने देश का परचम लहराने से नहीं चूक रहीं। चाहे पुरुष हो या महिलाएं, यह साल वैसे भी भारतीय खिलाड़ियों के लिए सफलता से भरे रंगों वाला रहा है। और गोल्ड मेडल  तो जैसे थमने का नाम ही नहीं ले रहे। ऐसे में भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में अपनी छाप छोड़ देना एक खिलाड़ी के लिए बहुत ही गौरव और उल्लास की बात है।

36 वर्षीय एमसी मैरी कॉम जो पहले ही बॉक्सिंग में वर्ल्ड चैंपियन बनकर भारत का नाम ऊँचा कर चुकी हैं। बीते मंगलवार को उन्हें एशिया की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट घोषित कर दिया गया। यह ख़िताब उन्हें एशियन स्पोर्टसराइटर यूनियन (एआईपीएस एशिया) अवार्ड्स की ओर से नवाज़ा गया। ये अवार्ड्स अपने आप में अनोखे इसलिए हैं क्योंकि इन्हें इस साल पहली बार संचालित किया गया है। हालांकि एआईपीएस नामक इस संस्था को साल 1978 में स्थापित किया गया था। मलेशिया में आयोजित किये गए ये अवार्ड्स एशिया के उन खिलाड़ियों के नाम थे जिन्होंने अपने प्रदर्शन को सर्वश्रेष्ठ से भी ऊपर रखा। आयोजन में तीस एशियाई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।

क्यों हैं मैरी कॉम सर्वश्रेष्ठ

मैरी कॉम की उपलब्धियां तो हम सभी जानते हैं। उन्होंने साल 2000 में बॉक्सिंग में अपने करियर की शुरुआत की थी। वे उसी वर्ष राज्य स्तरीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती थीं। इसके बाद उनकी कामयाबी का सफर नये मुकाम हासिल करता गया। शादी और बच्चे होने के कारण उन्हें कुछ वक़्त खेल से छुट्टी लेनी पड़ी थी। जब वे अपने इस ब्रेक के बाद वापस लौटीं तो उन्होंने साल 2008 में ‘एशियाई महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप’ में सिल्वर मेडल  जीतकर पदकों और अवार्ड्स की झड़ी लगा दी। बता दें कि मैरी कॉम पहली ऐसी एमेच्योर खिलाड़ी हैं जिसने साल 2015 में प्रोफेशनल खिलाड़ियों को कमाई, इंडोर्समेंट और अवार्ड तीनों में पीछे छोड़ दिया।

मैरी कॉम जिन्हें ‘मैग्निफिसेंट मैरी’ के नाम से भी जाना जाता है, वे एकलौती ऐसी महिला खिलाड़ी हैं जिसने ‘वर्ल्ड एमच्योर बॉक्सिंग अवार्ड’ को लगातार छह बार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही वे एकलौती ऐसी बॉक्सर हैं जिसने विश्व की पूरी सातों चैंपियनशिप में अपनी जगह बनाकर मेडल जीते हैं। हाल ही में जब नवंबर 2018 में इंडोनेशिया के ‘तेइसवे प्रेसिडेंट्स कप’ में गोल्ड हासिल कर उन्होंने ट्विटर पर अपना वीडियो डाला था, तब भारतीय लोगों में एक अलग ही उमंग और उत्साह देखने को मिला था। सचमुच मैरी कॉम अपने जीवन की उपलब्धियों के सहारे जिस तरह से महिलाओं और खिलाड़ियों के लिए एक आदर्श बन गयी हैं, वह बहुत प्रेरणादायक है।

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जब बड़े-बड़े और बेहद महत्वपूर्ण खिताबों सहित रिकॉर्ड्स  की बात आती है तब मैरी कॉम का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने साल 2003 में बॉक्सिंग में ‘अर्जुन अवार्ड’ पाया था। उन्हें 2009 में ‘राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड’ से नवाज़ा गया था। साल 2007 में उनका नाम ‘लिम्का बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया था। साल 2006 की स्पोर्ट्स श्रेणी में उन्हें ‘पद्मश्री अवार्ड’ और फिर साल 2013 की स्पोर्ट्स श्रेणी में ‘पद्म भूषण’ अवार्ड मिला। जब साल 2018 के ‘कामनवेल्थ गेम्स’ में उनकी बॉक्सिंग श्रेणी को आखिरकार सम्मिलित कर लिया गया, तब उसमें  भी गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने सभी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल जीत लिए हैं।

मैरी कॉम पहली ऐसी एमेच्योर खिलाड़ी हैं जिसने साल 2015 में प्रोफेशनल खिलाड़ियों को कमाई, इंडोर्समेंट और अवार्ड तीनों में पीछे छोड़ दिया।

केवल खेल में कमाए नाम और पदक ही नहीं, बल्कि मैरी कॉम की अन्य उपलब्धियां भी उनको दूसरों से अलग करती हैं। कॉम 26 अप्रैल 2016 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा की सांसद के रूप में नियुक्त हुई थीं। इसी के साथ ही साल 2017 में उन्हें खेल मंत्रालय की निगरानी में ‘बॉक्सिंग की राष्ट्रीय पर्यवेक्षक’ के रूप में नियुक्त किया गया। वे एक पशु अधिकार कार्यकर्ता भी हैं जो ‘पीटा इंडिया’ की समर्थक है।

कॉम पर साल 2014 में प्रियंका चोपड़ा अभिनीत बहुचर्चित जीवनी फ़िल्म ‘मैरी कॉम’ भी बनाई गयी है जिसे लोगों से काफी सराहना मिली थी। इसके पहले साल 2013 में उनकी ऑटोबायोग्राफी ‘अनब्रेकेबल’ का प्रकाशन भी हो चुका है जो युवाओं के लिए एक अच्छा-खासा प्रोत्साहन है। हाल ही में मणिपुर के मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भी की है कि जिस रोड के पास कॉम का घर है उसका नाम  ‘एमसी मैरी कॉम रोड’ रखा जायेगा।

इन सभी उपलब्धियों और बेहतरीन कामयाबी से उन्होंने भारतीयों की शान बढ़ाकर सबका दिल जीत लिया। उन्होंने अपना ध्यान पूरी तरह करियर पर केंद्रित किया। यह उसी मेहनत का फल है जो आज उन्हें सर्वश्रेष्ठ पदकों से नवाज़ा जा रहा है और अपने सुन्दर प्रदर्शन से वे और आगे जाएंगी। इस दुनिया में बहुत लोग होते हैं जो अपना नाम बनाते हैं, पर चुनिंदा ही होते हैं जिनका नाम हमेशा के लिए दुनिया में रह जाता है। मैरी कॉम उनमें से एक हैं।


तस्वीर साभार : etvbharat.com

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