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अपने मज़बूत विचारों और सक्रियता के बल पर छात्रों के हक के लिए लड़ने वाली गुरमेहर कौर को जब कुछ वर्ष पहले जब राष्ट्रवाद के लिए एक खतरा बता दिया गया था तब वे काफी चर्चित हुई थी। उन्होंने राइट विंग की विचारधारा पर ठोस सवाल करते हुए जब राजनीती के गंदे चेहरे का का सामना किया, तब लोगों को लगा कि आम छात्रों की तरह वे भी भारतीय मीडिया में कुछ समय की मेहमान है। लेकिन सबका यह अंदाजा गलत सबित हुआ। उस वक़्त छात्र सक्रियता इतनी तेज़ी से बढ़ी की सरकार पर सवाल उठाने वाले हर व्यक्ति को चमचों ने बुरी तरह घेर लिया। यह परंपरा आज भी कायम है और जिन छात्रों ने अपनी आवाज़ नहीं दबाई उन्हें आज भी राष्ट्र विरोधी कहा जा रहा है। उन्ही में से एक हैं – गुरमेहर कौर।

द यंग एंड द रेस्टलेस: यूथ एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया
लेखिका –
गुरमेहर कौर
प्रकाशक –
पेंगुइन रैंडम हॉउस इंडिया
भाषा –
अंग्रेजी

गुरमेहर कौर की यह किताब इसी वर्ष प्रकाशित हुई है। वे इससे पहले भी एक किताब लिख चुकी हैं और लेखन में शुरुआत से ही सफलता प्राप्त कर चुकी हैं। अपनी नई किताब में कौर ने उन युवा लीडर की ज़िन्दगी और उनके राजनैतिक सफर को गहराई से जाना है, जो अपनी आवाज़ उठाने की क्षमता से काफी विवादों में घिरे रहते हैं। ये कुछ ऐसे लोग हैं जो भारतीय मीडिया के पसंदीदा ‘राष्ट्र विरोधी’ भी हैं। राइट विंग के पदाधिकारियों और ‘गोदी मीडिया’ ने इनकी छवि इस तरह से बनाई कि आज इनका नाम सुनकर ही लोगों के मन में ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का ख्याल आ जाता है। लेखिका को खुद भी इस गैंग से जोड़ा जाता है। कौर ने इन हस्तियों के सामाजिक और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ इनके व्यक्तिगत जीवन को भी बेहतरीन तरीके से किताब में संजोया है।

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आज जितने भी सामाजिक और राजनैतिक अव्यवस्थाओं के बारे में हम सोच सकते हैं, जैसे कश्मीर के बिगड़े हालात, भारत में शिक्षा की स्थिति, औरतों की गंभीर हालत, जाति और धर्म से जुड़ी समस्या, नारीवाद का असली मुद्दा आदि को कौर ने बखूबी समझाया है। जिन भी राजनेताओं की सोच से देश में ये परिस्थितयां आयी या आ रही हैं,  उनकी कटटरपंथी सोच पर भी घातक वार किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण विषय रखा है देश में बदलती राजनीती को। आज जिस तरह राइट विंग और लेफ्ट विंग राजनीती का दौरान चल रहा है, उससे लोगों के विचारों को गंभीर रूप से तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

इस किताब में उन सभी युवा नेताओं के इंटरव्यू लिए गए हैं जो इस वक़्त भारत को असली राजनीति से मिलाने की बात करते हैं।

गुरमेहर कौर ने इसबात पर भी खासा ज़ोर दिया है कि किस तरह से भारत में युवा राजनेताओं की कमी है। किताब के शुरुआती पन्नों में ही उन्होंने यह बताया है कि भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 साल की उम्र से कम की है लेकिन उसके बावजूद लोक सभा के केवल 12 प्रतिशत सदस्य ही 40 साल से कम के हैं। इसी के साथ सांसदों की औसतन उम्र 60 वर्ष है। इससे साफ साफ पाता चलता है की भारत को युवा नेतृत्व की सख्त ज़रूरत है। अगर यहीं महिलाओं की बात की जाये तो बिगड़े हालातों से हम सभी वाकिफ हैं।

इस किताब में उन सभी युवा नेताओं के इंटरव्यू लिए गए हैं जो इस वक़्त भारत को असली राजनीति से मिलाने की बात करते हैं। भले ही उन सभी के लिए आज के राष्ट्रवाद को पार करना बहुत कठिन है लेकिन वो देश के लोगों की भलाई के लिए जुझारू रूप से काम कर रहे हैं। इस किताब में किसी भी राजनैतिक पार्टी को सराहा या नाकारा नहीं गया है।

इसमें सिर्फ उन लोगों के राजनैतिक सफर की कहानियाँ हैं जो अलग अलग सामाजिक परिवेश से आते हैं और जिनकी राजनैतिक विचारधाराएं प्ररूपी व्यवस्था को कड़ी चुनौती देती है। गुरमेहर कौर की सबसे अच्छी बात यह है कि उन्होंने इस किताब से आज की उस पीढ़ी को राजनीती में आगे आने की प्रेरणा दी है जो कभी अपने करियर के लिए इस क्षेत्र को नहीं चुनेगी। उन्होंने भारतीय समाज के लिए सकारात्मक और नई आशा जगाई है जो कहीं नहीं कहीं खो चुकी है। यह किताब आपको आलोचनात्मक तरीके से सोचने पर ज़रूर बल देगी।

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तस्वीर साभार : youthkiawaaz.com

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