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महाराष्ट्र से स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता हैं ‘सपना राठी’। हाल ही में खूब चर्चे में आईं थीं, जब उन्होंने ‘छपाक’ फिल्म का विरोध करने का आह्वान किया था। इस वजह से कि अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने जेएनयू के तथाकथित ‘देशद्रोही’ छात्रों का समर्थन किया था। उन्होंने शाहीन बाग़ में एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करतीं महिलाओं पर भी ‘बिकाऊ’ होने का इलज़ाम लगाया था, जिसकी वजह से उनकी बहुत आलोचना हुई।

पिछले हफ़्ते इंटरनेट पर उनके नाम से एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में दो लोग शारीरिक तौर पर अंतरंग होते नज़र आते हैं। हालांकि दोनों का ही चेहरा ब्लर किया गया है, ऐसा कहा जा रहा है कि इस वीडियो में औरत सपना राठी है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी शेयर हुआ है और इस पर कई तरह के भद्दे और घिनौने कमेन्ट भी आए हैं। कुछ लोग सपना राठी को ‘पॉर्न स्टार’  कहकर उनके ‘परफॉरमेंस’ पर टिप्पणी कर रहे हैं तो वही कुछ कह रहे हैं कि जिस औरत ने विरोध प्रदर्शन करती औरतों को बिकाऊ कहा था, उसका खुद का चरित्र ढीला है। कुछ तो ‘पूरा वीडियो’ अपलोड करने की भी मांग कर रहे हैं।

सपना अकेली नहीं हैं जिनका व्यक्तिगत वीडियो उनका चरित्र हनन करने के लिए वायरल किया गया हो। इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश से बीजेपी युवा मोर्चा के दो नेताओं (उपेन पंडित और रीना ठाकुर) का ऐसा ही वीडियो निकाला गया था, जिसपर ऐसी ही प्रतिक्रिया आई थी।

सपना राठी का विरोध उनके विचारों के तौर पर किया जाना चाहिए। उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के तौर पर उनका अपमान करके नहीं।

किसी महिला के साथ मतभेद होने पर उसके व्यक्तिगत जीवन या उसकी यौनिकता पर आक्रमण करना मर्दों के लिए सबसे आसान काम है, उनका राजनैतिक झुकाव चाहे कुछ भी हो। जहां बीजेपी आईटी सेल पर विरोधी महिलाओं को रेप थ्रेट या मौत की धमिकयां देने के कई आरोप हैं, तथाकथित ‘प्रगतिशील’ लेफ्टिस्ट मर्द भी एक महिला को उसकी यौनिकता के आधार पर ज़लील करने से नहीं कतराते। कइयों का तो ये कहना रहा है कि सपना राठी को अपने किए की सज़ा मिली है। दूसरी औरतों के चरित्र पर सवाल उठाने वाली औरत को खुद अपने चरित्र का अपमान सहना पड़ता है तो उसमें कुछ गलत नहीं है। बल्कि उसे अपने ‘कर्मों का फल’ मिला है।

ये एक बेहद घटिया और गिरी हुई मानसिकता को दिखाता है। पहली बात तो ये है कि सपना को जिस चीज़ के लिए टारगेट किया गया है, वो कोई ग़लत या आपत्तिजनक चीज़ है ही नहीं। सेक्स कोई बुरी चीज़ नहीं है जो करने से किसी औरत या मर्द का चरित्र ‘ढीला’ हो जाता हो। ये एक इंसान का व्यक्तिगत मामला है कि वो कब और किसके साथ अंतरंग होता है और इसके लिए वो बाहर की दुनिया का जवाबदेह नहीं है। दूसरी बात, किसी महिला के अंतरंग पलों का फोटो या वीडियो लेकर उसे पब्लिकली पोस्ट करना एक कानूनन जुर्म है और इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 354C के तहत इसके लिए तीन साल तक की सज़ा हो सकती है।

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किसी औरत को ‘सज़ा देने’ या ‘सबक सिखाने’ के लिए यौनिक तौर पर उसे लांछित करना एक बहुत गिरी हुई हरक़त है। ये सच है कि सपना राठी के विचार और बयान बेहद ग़लत और निचले स्तर के हैं, जिनकी आलोचना होनी ही चाहिए, मगर क्या इसके लिए उन पर जुर्म करना ठीक है? क्या किसी की प्राइवेसी का उल्लंघन करके, उसके शरीर को अपनी हवस मिटाने का साधन बनाकर उसके विचारों से लड़ा जा सकता है?

पितृसत्ता औरतों के शरीर को संपत्ति समझता है। समझा जाता है कि औरतों की इज़्ज़त उनके शरीर में ही होती है और अपनी मर्ज़ी से किसी के साथ संबंध बनाने पर वे इज़्ज़त खो बैठती हैं और समाज में मुंह दिखने लायक़ नहीं रहतीं। यही सोच है विरोधी विचारधारा या राजनैतिक दल की महिलाओं की यौनिकता पर चर्चा करने के पीछे।  और समाज में प्रगति और बराबरी लाने के लिए ऐसी ही मानसिकता से लड़ना ज़रूरी है जो दो बालिगों की रज़ामंदी से होनेवाले शारीरिक संबंध को गंदी नज़र से देखता है और ख़ासकर औरतों को ऐसा करने के लिए दोषी ठहराता है।

सपना राठी का विरोध उनके विचारों के तौर पर किया जाना चाहिए। उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के तौर पर उनका अपमान करके नहीं। बहुत अफ़सोस की बात है कि हमारे समाज का तथाकथित ‘प्रगतिशील’ वर्ग भी वैचारिक लड़ाई में किसी औरत को हराने के लिए ख़ुद को इतना नीचा गिराता है और ऐसी नीच-बेहूदा हरक़तों पर उतर आता है।

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तस्वीर साभार : indiantime

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