FII Hindi is now on Telegram

भारत कई बेमिसाल संगीतकारों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। हर एक संगीतकार ने संगीत की दुनिया में अपना छाप छोड़ी है। चाहे वो खुद आज हमारे साथ न हो लेकिन उनकी कला हम सबके लिए अमर रह गयी। आज हम एक ऐसी ही कलाकार के बारे में बात करनेवाले हैं, जो सिर्फ एक प्रतिभाशाली गायिका ही नहीं, बल्कि भारत की पहली महिला कलाकार थीं जिन्हें लोग कॉन्सर्ट में सुनने आए। एक ऐसे दौर में जब कला की दुनिया में पुरुषों का वर्चस्व था। ये थीं – हीराबाई बरोडकर।

हीराबाई का जन्म 29 मई 1905 में महाराष्ट्र के मिरज में हुआ था। पिता उस्ताद अब्दुल करीम खां बरोडा के राजघराने के शाही गायक थे और मां ताराबाई माने उस राजघराने की सदस्य थीं। परिवारों की रज़ामंदी न होने की वजह से दोनों ने भागकर शादी की थी और मिरज आने के बाद उनके पांच बच्चे हुए। इनमें से दूसरी बच्ची थी हीराबाई, जिनका नाम उनके मां और पिता ने चंपाकली रखा था।

हीराबाई की संगीत की शिक्षा बचपन से ही शुरू हो गई थी। तब तक उनके बड़े भाई, सुरेशबाबू माने, भी संगीत की दुनिया में अपना कदम रख चुके थे। आगरा घराने के गायक उस्ताद अहमद खां ने हीराबाई को गाना सिखाना शुरू किया। बाद में जब साल 1922 में उस्ताद अब्दुल करीम और ताराबाई का तलाक़ हो गया तब हीराबाई अपने भाई-बहनों के साथ अपनी मां के साथ चली गईं और सुरेशबाबू से संगीत सीखने लगी। बाद में उन्होंने उस दौर के कुछ जानेमाने संगीतकारों से भी शिक्षा ली, जैसे भास्करबुवा बखळे और उस्ताद अब्दुल वाहिद, जो उनके पिता के भाई भी थे।

साल 1921 में हीराबाई ने बंबई में गांधर्व महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव में अपना पहला परफॉरमेंस दिया था। इसके बाद उन्होंने साल 1937 में कलकत्ता के ऑल इंडिया म्यूजिक कांफ़्रेंस में भी गया। उनकी प्रतिभा ने सुननेवालों को चौंका दिया था क्योंकि किसी ने सोचा नहीं था कि दुबली-पतली, दिखने में साधारण हीराबाई में इतना टैलेंट होगा। हीराबाई का नाम धीरे-धीरे सब जानने लगे थे और आनेवाले कुछ सालों में उन्होंने अपना पहला पब्लिक कॉन्सर्ट दिया। तब साधारण समाज में महिलाओं के स्टेज पर परफॉर्म करने को बुरी नज़र में देखा जाता था। उनके ‘चरित्र’ पर सवाल उठाए जाते थे। ऐसे में हीराबाई भारत की पहली महिला गायिका बनीं जिन्होंने आमजनता के लिए स्टेज पर गाया हो और जिन्हें लोग टिकट खरीदकर सुनने भी गए।

Become an FII Member

और पढ़ें : गौहर जान: ‘भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार’ | #IndianWomenInHistory

साल 1924 में मानिकचंद गाँधी से अपनी शादी के बाद हीराबाई पुणे में चली आईं। उनकी संगीत की चर्चा रुकी नहीं और कॉन्सर्ट में गाने के साथ-साथ वे अपने घर में बच्चों को गाना सिखाने लगीं। वे ख़याल और ठुमरी जैसी शैलियों से लेकर भजन, नाट्य संगीत और मराठी लोकगीत भी गाती थीं। उन्होंने इस बीच एक जर्मन रिकॉर्डिंग कंपनी और ओडियन के साथ अपने गानों का रिकॉर्ड निकाला। इसमें उनके कुछ मशहूर गाने थे जैसे ‘नाच रे नंदलाला’ और ‘उपवनी गात कोकिला।’इस रिकॉर्ड में उनके भाई-बहन और पिता के भी कुछ गाने थे।

हीराबाई बरोडकर एक प्रतिभाशाली गायिका ही नहीं, बल्कि भारत की पहली महिला कलाकार थीं जिन्हें लोग कॉन्सर्ट में सुनने आए। एक ऐसे दौर में जब कला की दुनिया में पुरुषों का वर्चस्व था।

साल 1947 में हीराबाई ने अपनी ज़िन्दग़ी का सबसे ख़ास परफॉरमेंस दिया था। 15 अगस्त के दिन जब देश आज़ाद हुआ, उन्हें लाल किले पर ख़ास तौर पर आमंत्रित किया गया था, जहां उन्होंने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाया। इसके बाद साल 1953 में उन्होंने चीन और कुछ अफ़्रीकन देशों में परफॉर्म किया। उन्हें कई उपाधियों और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। जगद्गुरु शंकराचार्य ने उन्हें ‘गान सरस्वती’ की उपाधि दी और सरोजिनी नायडू ने ‘गान कोकिला’ नाम दिया। साल 1955 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी साल 1970 में पद्म भूषण से नवाज़ा गया।

बड़े भाई और गुरु सुरेशबाबू माने की मृत्यु साल 1952 में हो गई, जिसकी वजह से हीराबाई को बहुत बड़ा धक्का लगा था। वो धीरे-धीरे अपने अंदर सिमटती रहीं और कम कॉन्सर्टस देने लगीं। संगीत का अभ्यास उन्होंने फिर भी छोड़ा नहीं और साल 1968 में अपनी सबसे छोटी बहन, सरस्वती माने के साथ उन्होंने एक रिकॉर्ड निकाला। साल 1984 में भी मराठी गानों का एक रिकॉर्ड निकला था जिसमें उनके और उनके पिता के गाने थे।

20 नवंबर 1989 में हीराबाई अपने पुणे के घर में चल बसीं। अपने आख़िरी दिन तक वे गाती रहीं और बच्चों को गाना सिखाती रहीं, भले ही उन्होंने खुद बाहर परफॉर्म करना छोड़ दिया हो। उनका घर संगीत के प्रेमियों के लिए एक अलग दुनिया था, जहां हर किसी का स्वागत था चाहे वो कोई मशहूर कलाकार हो या पहली बार संगीत सीख रहा हो। हीराबाई आज नहीं हैं, पर उनकी आवाज़ उनके चाहनेवालों के कानों में गूंजना बंद नहीं करेगी, जिसकी वजह से वो आज भी सबके मन में अमर हैं।

और पढ़ें : रसूलन बाई: उत्तर भारत की वो प्रसिद्ध लोक गायिका | #IndianWomenInHistory


तस्वीर साभार : esakal

Eesha is a feminist based in Delhi. Her interests are psychology, pop culture, sexuality, and intersectionality. Writing is her first love. She also loves books, movies, music, and memes.

Follow FII channels on Youtube and Telegram for latest updates.

नारीवादी मीडिया को ज़रूरत है नारीवादी साथियों की

हमारा प्रीमियम कॉन्टेंट और ख़ास ऑफर्स पाएं और हमारा साथ दें ताकि हम एक स्वतंत्र संस्थान के तौर पर अपना काम जारी रख सकें।

फेमिनिज़म इन इंडिया के सदस्य बनें

अपना प्लान चुनें

Leave a Reply