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‘तुम तो दिनभर घर में रहती हो।’
‘घर में काम ही क्या करना होता है औरतों को?’
‘अरे! सिलाई करके क्या कमा लेगी ये?’

ये बातें आपने अक्सर सुनी होगी, महिलाओं के संदर्भ में, जब वो बिना किसी स्वार्थ के मशीन की तरह अपने परिवार को खुशहाल बनाने में जुटी होती है। या जब वो अपने हिस्से किए गये सारे कामों को ख़त्म कर घर की आमदनी में अपना योगदान देना चाहती है। ये सब हमारे समाज में बेहद आम है, क्योंकि औरतों की जगह तो घर ही मानी जाती है हमारे पितृसत्तात्मक समाज में।

इतना ही नहीं, अगर एक मध्यमवर्गीय परिवार की औरत घर के सारे कामों से समय निकालकर अगर अपना कोई व्यवसाय शुरू करती है तो उसकी आमदनी को भी कोई तवज्जो नहीं दी जाती है। ये सब सुनने में हो सकता है थोड़ा अजीब लगे, लेकिन ये हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का सच है। हमारे यहाँ घर के कामों को कोई काम नहीं समझा जाता, क्योंकि इसकी कोई सैलरी नहीं मिलती। पर जो काम हमारे घरों की महिलाएँ, माँ, बहन, भाभी या बहु जैसी अलग-अलग भूमिकाओं में करती हैं, उसी काम को दूसरों के घरों में करने पर उन्हें सैलरी मिलती है। पर अपने घर में उन्हें कुछ मिलता है तो वो है – उनके काम को सिरे से नकारना।

हाल ही में, घर में औरतों के काम और उसके आधार पर महिला के अस्तित्व को आंकने वाले हमारे रोज़मर्रा के साधारण से दिखने वाले क्रूर व्यवहार पर चोट करती हुई एक संजीदा विडियो सोनी की तरफ़ से लाँच की गयी है। साक्षी तंवर की बेहतरीन अदाकारी ने एक मध्यमवर्गीय परिवार की महिला के घर के काम, उसके अपने रोज़गार और उसकी पहचान का बक़ायदा हिसाब किया है। कहते हैं कि जिस दिन महिला श्रम का हिसाब किया जायेगा उस दिन हमारे समाज की सबसे बड़ी चोरी पकड़ी जाएगी। इसी तर्ज़ पर ये विडियो भी है। देखिए और समझने की कोशिश करिए कि ‘आख़िर आपके घर की औरतें क्या काम करती हैं? उनके काम की क्या अहमियत है? और अपने ब्यूटी पार्लर या सिलाई जैसे आपको छोटे दिखने वाले रोज़गार से कितना कमा लेती है? या फिर जब एक हाउसवाइफ़ ब्रेक लेने की बात करती है तो किस तरह पूरी परिवार की सत्ता हिल जाती है।’  

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आप इस विडियो को पूरा इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।

तस्वीर साभार : youtube

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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