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पितृसत्तात्मक विचारधारा में ‘अच्छी औरत’ और ‘बुरी औरत’ का भेद बड़े कायदे से किया गया है। यह भेद यह तय करने के लिए किया गया है कि कौन सी औरतें इज़्ज़त के लायक़ हैं और कौन लांछन, उत्पीड़न और हिंसा के लायक। ‘अच्छी औरतें’ घर में रहतीं हैं, बच्चे पैदा करतीं हैं, परिवारवालों की खिदमत करतीं हैं, पर्दे में रहतीं हैं और ज़रूरत से ज़्यादा बोलतीं नहीं हैं। वहीं ‘बुरी औरतें’ अपने लिए जीती हैं, वे स्वाभिमानी और स्वतंत्र होती हैं। ये औरतें अपने अलावा किसी और के कहने पर नहीं चलती। अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहनती हैं और अपने हिसाब से चलती हैं। बेबाक होती हैं और सामाजिक पाबंदियों में खुद को बंधने नहीं देती। पितृसत्ता के लिए इन औरतों पर नियंत्रण रखना मुश्किल होता है, इसलिए उन्हें काबू में लाने के लिए वह शारीरिक और मानसिक शोषण से लेकर हत्या जैसे कदम उठाने के लिए भी तैयार हो जाता है।

ऐसी ही एक ‘बुरी औरत’ थी कंदील बलोच थी। वह वे सारी चीज़ें किया करती थी जो रूढ़िवादी पाकिस्तानी समाज को नामंज़ूर थीं। एक उभरती सोशल मीडिया स्टार के तौर पर मशहूर होती कंदील को कैसे एक क्रूर पुरुषवादी मानसिकता ने कैसे खत्म किया, यह उसी कि कहानी है।

गांव में बचपन 

कंदील बलोच का असली नाम था फ़ौज़िया अज़ीम। वह पाकिस्तान के पश्चिम पंजाब के डेरा ग़ाज़ी ख़ान इलाके में पैदा हुई थी। पिता मोहम्मद अज़ीम और मां अनवर बीबी दोनों किसान थे। 1 मार्च 1990 को जन्मी फ़ौज़िया तेरह भाई-बहनों में से एक थी। एक कट्टर, धर्मांध परिवार में जन्मी फ़ौज़िया बचपन से कठोर पाबंदियों में बंधी थी। उसके गांव में औरतें आमतौर पर अपने घरों से नहीं निकला करती थी। पिता अज़ीम भी बेटियों पर कड़ी निगरानी रखते थे और अगर उसकी मां ने ज़िद न की होती तो उन्होंने फ़ौज़िया को कभी स्कूल भी न भेजा होता। इन्हीं परिस्थितियों में बड़ी होती फ़ौज़िया छोटी-छोटी चीज़ों में अपनी खुशी, अपनी आज़ादी ढूंढ लेती थी। बाकी लड़कियों की तरह पर्दे में रहना उसे नामंज़ूर था और उसे पेड़ों पर चढ़ने में ज़्यादा मज़ा आता था। वह अपने भाइयों से भी तेज़ पेड़ों पर चढ़ जाती थी और डालियों से लटकते हुए अपने भाइयों और बाकी लड़कों को चिढ़ाती थी। 

फ़ौज़िया का सपना था कि वह कुछ कर दिखाएगी। पढ़-लिखकर बहुत मशहूर बनेगी और अपने परिवार को एक बेहतर ज़िंदगी देगी। उसका भाई जब फ़ौज में भर्ती हुआ तो उसने भी सोचा कि वह ऐसा ही कुछ बड़ा करके अपने गांव का नाम रोशन करेगी। उस वक़्त उनके गांव में टीवी का प्रभाव पड़ना शुरू हुआ था। कुछ ही घरों में टीवी था जहां शाम को लोग अलग-अलग कार्यक्रम देखने के लिए इकट्ठा होते थे। अनवर बीबी को भी मन था कि घर में टीवी हो। लड़कियां देर रात तक दूसरे के घर में टीवी देखने के लिए रुकें, यह उन्हें पसंद नहीं था। पति से मिन्नतें करने का कोई फ़ायदा नहीं हुआ तो उन्होंने चोरी-छिपे अपने बेटे को पैसे देकर टीवी खरीदने को कहा। घर में एक छोटी टीवी लाया गया और अंदर के कमरे में रख दिया गया ताकि मोहम्मद अज़ीम को पता न चल सके। 

घर में टीवी आने के बाद फ़ौज़िया की आंखों के सामने एक नई दुनिया उजागर हो गई। उसे टीवी पर नाच-गाने के कार्यक्रम और सीरियल देखने का नशा सा चढ़ गया। टीवी देख-देखकर उसने नाचना और गाना और मॉडलिंग सीखी। अब उसे टीवी कलाकार बनने का जुनून चढ़ा। वह टीवी पर आने और अपने मनपसंद कलाकारों जैसे कपड़े पहनने, उनकी तरह नाचने-गाने के सपने पालने लगी। कलाकारों की नकल करने लगी। उसके घरवालों को एहसास हो गया कि ‘लड़की हाथ से निकलने’ लगी है। 

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शादी और उसके बाद बदली पहचान

फ़ौज़िया शादी नहीं करना चाहती थी। उसने कहा भी था कि वह कभी भी किसी से शादी नहीं करेगी। बावजूद इसके साल 2008 में जब वह महज़ 17 साल की थी, उसकी शादी ज़बरदस्ती उसके चचेरे भाई आशिक हुसैन से करवा दी गई। तब उसकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई थी और उम्र में पांच साल बड़ा आशिक हुसैन उसका नियमित शोषण करता था। फ़ौज़िया से मार-पीट करना, उसे सिगरेट से जलाना, और उसके चेहरे पर ऐसिड फेंकने की धमकी देना उसके लिए रोज़ का मामला था। 

साल 2009 की एक रात फ़ौज़िया अपने पति के घर से भाग गई। अपने एक साल के बेटे को लेकर वह मुल्तान के एक शेल्टर होम में पहुंच गई। शेल्टर होम के गंदे, अंधेरे कमरों में दम घुट जाता था और वह किसी इंसान के रहने लायक जगह नहीं थी। पैसों की कमी भी थी और अपने छोटे बच्चे के लिए फ़ौज़िया दूध का इंतज़ाम भी नहीं कर सकती थी। अपने बेटे को वापस अपने पति के पास रख आने के सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं था। उसने वादा किया कि एक दिन वह इतने पैसे कमाएगी कि अपने बेटे को अपने साथ ले जाकर उसे एक अच्छी ज़िंदगी दे सके पर आशिक हुसैन ने कहा कि वह उसे कभी अपने बेटे के पास आने तक नहीं देगा। 22 साल की उम्र में फ़ौज़िया कराची पहुंची और यहां उसने अपना नाम बदल लिया। फ़ौज़िया अज़ीम का अंत हुआ और ‘कंदील बलोच’ के तौर पर उसने नई ज़िंदगी शुरू की। 

22 साल की उम्र में फ़ौज़िया कराची पहुंची और यहां उसने अपना नाम बदल लिया। फ़ौज़िया अज़ीम का अंत हुआ और ‘कंदील बलोच’ के तौर पर उसने नई ज़िंदगी शुरू की। 

‘फौज़िया’ से ‘कंदील’ बनना

कराची में कुछ समय बस कंडक्टर का काम करने के साथ साथ कंदील ने टीवी धारावाहिकों में काम करने की कोशिश की। सरकारी टीवी चैनल ‘पीटीवी’ के एक-दो धारावाहिकों में उसने कुछ छोटे-मोटे किरदार निभाए भी। उसकी मां कहती हैं कि वह हर बार अपने घर फोन करके बताया करती थी कि आज फ़लाने सीरियल में वह नज़र आनेवाली है। मां ने एक बार उसे कहा कि हो सके तो रात आठ बजे के किसी प्रोग्राम में आए क्योंकि घर में बिजली उसी समय रहती थी। इसके बाद वह सचमुच एक आठ बजे के शो में नज़र आई और बाद में अपनी मां से कहा कि ख़ास उन्हीं के लिए उसने इस शो में हिस्सा लिया था।

साल 2013 में कंदील ने ‘पाकिस्तानी आईडल’ के लिए ऑडिशन दिया। उसके बेसुरे गाने और ऊट-पटांग हरकतों की वजह से ऑडिशन का वीडियो यूट्यूब पर वायरल हो गया। देशभर के लोग अब उसे पहचान गए और उस साल कंदील बलोच का नाम गूगल पर सबसे ज़्यादा सर्च किए गए नामों में से एक था। इसी समय कंदील ने सोशल मीडिया पर सक्रिय होना शुरू किया और बड़ी जल्द ही वह सोशल मीडिया का एक मशहूर नाम बन गई।

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‘पाकिस्तानी आइडल’ में क़ंदील का ऑडिशन

अपने यूट्यूब चैनल पर वह वे सारी चीजें करती थी जो उसके समाज की कोई लड़की सोच भी नहीं सकती थी। वह नहाते हुए अपने वीडियो रिकॉर्ड करती, बिकनी पहनकर कमर मटकाकर नाचती, स्क्रीन से अपने दर्शकों को चूमती और दुनियाभर की बातें करती, जिसमें शरीर और यौनिकता की बातें भी शामिल होती थीं। उसके सबसे वायरल वीडियोज़ में से एक है साल 2016 का वीडियो। अपने बिस्तर पर लेटे हुए वह कहती नज़र आती है कि अगर पाकिस्तान टी-ट्वेंटी के मैच में भारत को हरा दे तो वह पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान शाहिद अफ़्रीदी के लिए ‘स्ट्रिप डांस’ करेगी। पाकिस्तान मैच तो हार गया, मगर कंदील मशहूर गई। उसके जितने चाहनेवाले थे, उसे उतनी गालियां भी पड़ने लगीं। 

पाकिस्तानी समाज की आंखों में कंदील एक घटिया, बेशर्म, सिरफिरी औरत थी और इसलिए हर रोज़ उसे सोशल मीडिया पर गालियां और गंदी टिप्पणियां मिलती। अपने अनोखे अंदाज़ में इन गालियों को वह हंसकर उड़ा देती थी और अपने आलोचकों के दोगलेपन का मज़ाक उड़ाती। वह कहती कि जो लोग उसे इतनी गालियां देते हैं, दरअसल वही उसके वीडियो सबसे ज़्यादा देखते हैं। 

कंदील टॉक शोज़ में मौलानाओं के साथ अपने काम और जीवन-शैली को लेकर बहस करती थी। वह वर्तमान प्रधानमंत्री और पूर्व विपक्ष नेता इमरान ख़ान से शादी का इज़हार करने के लिए उनके घर तक पहुंच जाती थी और वह बात करती थी औरतों के अधिकारों की। पाकिस्तान में औरतों के शोषण और उनके बुरे हालातों की। वह हमेशा कहती थी कि वह इसलिए खास है क्योंकि वह एक औरत है, और मौका दिए जाने पर औरतें दुनिया जीत सकतीं हैं।

कंदील की मौत

साल 2016 में ईद के दिन वह वापस अपने घर आई। उस दिन उसने जीन्स-टी शर्ट की जगह बुर्का पहन रखा था। उसकी मां का कहना है वह उस दिन बहुत डरी हुई थी और घर से बिल्कुल नहीं निकली। वह अपने घरवालों को बार-बार कह रही थी कि लाइटें बंद रखें और कहीं बाहर न जाएं। कुछ दिनों बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसके पिता ने बताया कि उनके परिवार को मौत की धमकियां दी गईं थीं। 14 जुलाई 2016 को ‘एक्स्प्रेस ट्रिब्यून’ के एक पत्रकार को फोन पर इंटरव्यू देते हुए कंदील ने भी कहा कि उसकी जान खतरे में है और उसने पाकिस्तान के गृहमंत्री से मदद की मांग भी की है मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 

16 जुलाई 2016 की सुबह कंदील अपने बिस्तर में मृत पाई गई। वह सिर्फ़ 26 साल की थी। 15 जुलाई की रात को करीब साढ़े ग्यारह बजे गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई थी। हत्यारा उसका भाई वसीम निकला, जिसने उसे मारने का कारण ‘खानदान की इज़्ज़त बचाना’ बताया। वसीम को उम्रकैद की सज़ा मिली है। उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। 

आज भी हम एक ऐसे ज़माने में जी रहे हैं जहां ‘परिवार की इज्ज़त’ बचाए रखने के लिए औरतों पर कठोर नियंत्रण रखा जाता है और अपनी मर्ज़ी से ज़िंदगी जीने के लिए उनकी हत्या तक कर दी जाती है। कंदील की तरह न जाने कितनी होनहार, महत्वाकांक्षी लड़कियों की इच्छाओं और पनों को रोज़ गला घोंटकर मार दिया जाता है। ‘मर्यादा’ और ‘परंपरा’ की दुहाई देकर उन्हें पिंजरे में क़ैद करके रखा जाता है। ऐसा तब तक होता रहेगा जब तक पुरुष-प्रधान सामाजिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त न किया जाए और औरतें अपने बंधन तोड़कर बाहर न आएं। 

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तस्वीर साभार: patrika

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