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लैंगिक समानता में भरोसा करने वाले पुरुषों को महिलाओं की तरह घर के सभी काम सीखने चाहिए क्योंकि घर के काम की ज़िम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की नहीं होती। ऐसी बहुत सी साधारण और छोटे-छोटे काम हैं जिनमें पुरुष सहयोग कर सकते हैं, जिन कामों को आमतौर पर लैंगिक भेदभाव के रूप में देखा जाता है।

1. भले ही आप सिंगल हैं, शादीशुदा हैं या दोस्तों के साथ रह रहे हैं, रसोई में जाएं और अपने लिए खाना खुद परोसें। खाना बनाना, फिर उन बर्तनों को साफ करना ये मामूली बातें हैं जो आपको आत्मनिर्भर बना सकती हैं।

2. अगर आपका परिवार है, बच्चे हैं तो यह इन कामों में सहयोग दे सकते हैं जैसे – सामान को समेटें, डायपर बदलें, बच्चों को खाना खिलाएं, उन्हें नहलाएं। इन छोटे-छोटे कामों की ज़िम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं होती है। ये काम पिता को भी करने चाहिए।

3. जब आपके बच्चे हो या बच्चे पैदा करने की योजना हो तो अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को बराबर बांट लें जिससे बच्चे की देखभाल में माता-पिता दोनों सहयोग कर सकें।

4. अगर आपकी पत्नी ऑफिस के साथ घर भी संभालती है तो कोशिश करें कि आपका भी उसमें योगदान हो क्योंकि वह अकेली परिवार के पूरे स्तंभ को लिए खड़ी है। इसलिए ऑफिस से समय पर घर आएं और योगदान दें।

5. किसी भी महिला के खिलाफ़ पूर्वाग्रह पर आधारित जोक्स न बनाएं। किसी भी तरह का मज़ाक जो महिलाओं के हार्मोनल, मूडी, सख्त पत्नियों के इर्द-गिर्द घूमता है, वास्तव में मजाकिया नहीं हैं। यह स्वभाव काम के बोझ के कारण भी हो सकता है।

6. रेप या बलात्कार शब्द का इस्तेमाल किसी वाक्य में करना बहुत ही गंभीर है, यह एक पीड़ा है, अपराध है इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसका प्रयोग न करें। महिलाओं पर आधारित महिला-विरोधी गालियों का इस्तेमाल न करें।

7. ऑफिस को अपना घर न समझे क्योंकि घर में भी आपके परिवार को आपके समय से लौटने का इंतजार रहता है इसलिए ऑफिस से घर समय पर जाएं और घर के कामों में हाथ बटाएं।

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8. यह एक महिला की पसंद है कि वह कौन से कपड़े पहनना चाहती है ठीक वैसे ही जैसे आपकी इच्छाएं है इसलिए कोई भी महिला हो, उसे वह पहनने से न रोकें।

9. धूम्रपान करने वाली, नशा करने वाली, किसी तलाकशुदा महिलाओं पर सवाल उठाना और उन्हें अलग नज़रिए से देखना बंद करें।

10. अपनी पत्नी को शादी करने के बाद उसका अंतिम नाम बदलने के लिए मजबूर न करें। अगर वह अपना पुराना नाम जोड़े रखना चाहती है तो उस फैसले के पीछे की वजह को जाने और उनका सहयोग करें।

11. अगर आपकी ऑफिस टीम में कोई अकेली महिला है जो लंच और आउटिंग के दौरान अलग-थलग पड़ जाती है तो उनसे बात करें उन्हें सुरक्षित महसूस कराएं। 

12. अगर आप किसी महिला को रिपोर्ट करते हैं, तो उसे उसके लिंग से परे देखें। जरूर कड़ी मेहनत के बाद महिला ने वह ओहदा हासिल किया होगा।

13. महिला मित्र बनाएं, जो सिर्फ दोस्त हैं उससे ज्यादा और कुछ नहीं।

14. अपने परिवार की महिलाओं का साथ दें। अगर आपको लगता है कि आपके पिता घरेलू कामों को बांट नहीं रहे हैं, तो उनसे इसके बारे में बात करें और इसके बारे में समझाएं। अगर आपका सहकर्मी या दोस्त किस महिला सहकर्मी के साथ अलग या गलत व्यवहार करता है, तो उससे ऐसा करने से मना करें।

15. अगर आपके माता-पिता आपकी पत्नी की आज़ादी में बाधा डाल रहे हैं, किसी काम में रोक-टोक करते हैं उन्हें इस बारे में समझाएं। अगर आपको लगता है कि वे उसकी स्वतंत्रता को रोक रहे हैं, हस्तक्षेप करें और चीजों को सही तरीके से सुलझाने की कोशिश करें।

16. अपनी बेटी को एक गुड़िया लाकर उसके दिमाग में मानसिकता न बनाएं उसे कार, टॉय भी लाकर दे यही समानता की पहली सीढ़ी है और अपने बेटे को भी कार, टॉय, गुड़िया के साथ एक सॉफ्ट टॉय दें।

17. बेटी को पिंक और बेटे को ब्लैक या ब्लू रंग तक सीमित न रखें उन्हें हर तरह के रंग की चीज़ और कपड़े लाकर दें।

18. अगर आप पुरुषों के एक समूह के साथ हैं जो सेक्सिस्ट/ महिला-विरोधी चुटकुले बनाते हैं, उन पर हंसते हैं, तो उन्हें बताएं कि यह सेक्सिस्ट है और किसी विशेष वर्ग का अपमान है।

19. जब भी कोई महिला बलात्कार या शोषण पर कोई विचार प्रकट करती है तो यह कहना बंद करें कि हर पुरुष बलात्कारी नहीं, माना कि हर पुरुष बलात्कारी नहीं पर हर महिला जरूर शोषित है उसके जीवन में कभी न कभी किसी न किसी प्रकार का शोषण जरूर हुआ होगा, जिसका उदाहरण हमें #metoo अभियान में देखने को मिल चुका है।

20. अपने आप को नारीवादी कहने पर गुरेज़ न करें क्योंकि समानता का दूसरा मतलब ही नारीवाद है।

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तस्वीर साभार: huffingtonpost

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