मल्टीमीडियाइन्फोग्राफिक्स तस्वीरों में: पत्रकारों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में दंडमुक्ति खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस

तस्वीरों में: पत्रकारों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में दंडमुक्ति खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस

पत्रकारों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में दंडमुक्ति खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर तस्वीरों में देखिए मौजूदा समय में कितने सुरक्षित हैं पत्रकार।

1. पत्रकारों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में दंडमुक्ति खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस

2. पत्रकारों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में दंडमुक्ति खत्म करने के लिए साल 2013 से हर साल 2 नवंबर संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक साल 2006-2019 के बीच अब तक अपने काम के कारण करीब 1200 पत्रकारों की हत्या हुई है।

3. पत्रकारों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराध के हर 10 मामलों में से 9 मामलों में हत्यारों को सज़ा नहीं मिलती।

4. हर साल एक पत्रकार को पुलित्ज़र पुरस्कार दिया जाता है और करीब 100 पत्रकारों की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है।

5. कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स के ग्लोबल इम्प्यूनिटी इंडेक्स 2020 में भारत 12वें पायदान पर है। इस सूची के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां पत्रकारों के हत्यारे आसानी से छूट जाते हैं।

6. इंटरनैशनल प्रेस इंस्टिट्यूट के अनुसार अक्टूबर 2019 से लेकर अब तक 52 पत्रकारों की मौत उनके काम की वजह से हुई है। इसमें भारत के भी 2 पत्रकार शामिल हैं। इन 52 मामलों में से सिर्फ 10 मामलों में ही अब तक गिरफ्तारी हुई है।

7. भारत में कोरोना वायरस के कारण लागू हुए लॉकडाउन के दौरान करीब 24 पत्रकारों को उनके काम की वजह से गिरफ्तार या प्रताड़ित किया गया है। साथ ही इनमें से कई पत्रकारों को उनके काम के कारण हिरासत में लिया गया और उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज़ की गई।

8. मनिला टाइम्स में छपे एक ‘ओपिनियन ऑन पेज कॉलम’ के अनुसार “यदि आप फिलीपींस में एक सच्चे, ईमानदार पत्रकार हैं, जो अन्याय, राजनीतिक साज़िशों के बारे में सच लिखते हैं और बोलते हैं, तो आप किसी भी दिन, किसी भी समय मोटरसाइकिल सवार हत्यारों द्वारा मारे जा सकते हैं।”

9. एक अध्ययन के मुताबिक पाकिस्तानी में कानूनी मामलों का सामना करने वाले पत्रकारों में से एक तिहाई को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत आरोपित किए जाने का खतरा होता है।

10. सशस्त्र संघर्ष को कवर करते वक्त अक्टूबर 2019 से अब तक सीरिया में 7, ईराक में 2 और अफगानिस्तान में 1 पत्रकार की मौत हुई है।

Comments:

  1. Social media activist and journalist are not safe in construction.

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