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साल 2020 में प्रकाशित हुई पुस्तक ‘क्रिक पांडा पों पों पों’ एक कहानी संग्रह है जिसे ऋषभ प्रतिपक्ष ने लिखा है। यह उनकी पहली पुस्तक है। अगर हम पुस्तक के लेखक की बात करें तो ऋषभ प्रतिपक्ष उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं और बचपन से ही कहानियां पढ़ने के शौकीन रहे हैं।  इनका अल्बर्ट कोमू और रूसो इत्यादि से भी खासा लगाव रहा। कहने का मतलब है कि अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान और फिल्म स्क्रिप्ट जो हाथ लग जाए पढ़ डालते हैं। क्रिक पांडा पों पों पों के लेखक ने उन सभी महत्वपूर्ण घटनाओं को अपने इस कहानी संग्रह में उतरा है जिनसे हम सभी वाकिफ तो हैं लेकिन उन घटनाओं का कड़वा सच और घूंट ग्रहण नहीं करना चाहते हैं। 

अपने अनोखे नाम के साथ प्रकाशित पुस्तक क्रिक पांडा पों पों पों में कुल मिलाकर 14 कहानियां है और हर कहानी अपने शीर्षक की तरह एक–दूसरे से अलग है। अगर इन सारी कहानियों में कुछ समानता है तो वह है सामाजिक मुद्दे जैसे, गैंगरेप, एसिड अटैक, जातिवाद, आत्महत्या, लिंचिंग और पीरियड्स आदि। साथ ही साथ इन कहानियों में किसी न किसी प्रकार की मानसिकता पर चोट का प्रयास किया गया है जिन्हें या तो हम अनदेखा कर देते हैं या उन्हें देखकर भी अपनी आंखें मूंद लेते हैं। 

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‘क्रिक पांडा पों पों पों’ में अगर हम सबसे पहली कहानी की बात करें तो महात्मा गांधी को कहानी का मुख्य बिंदु बनाकर आरक्षण, हिंदुत्व और लिंचिंग जैसी समस्याओं को कहानी के माध्यम से हमारे समक्ष रखा गया है। ‘गैंगरैप वाली मैया’ एक ऐसी कहानी है जिसे पढ़कर पाठक का मन, मस्तिष्क तो विचलित होगा ही साथ ही साथ हमारे हृदय के लिए भी मर्मभेदी होगा। वहीं ‘मर्द’ कहानी एक व्यक्ति की चेष्ठा के इर्द-गिर्द घुमती कहानी है जिसे पढ़कर हमें यह केवल एक सामान्य घटना मात्र लगेगी लेकिन इसमें हमारे समाज की कड़वी हकीकत शामिल है। वहीं ‘माफ़ी’ कहानी एक ऐसी परिवार की है जो भीड़-तंत्र का शिकार हो जाता है। ‘मरा हुआ श्रवण कुमार’ दो पीढ़ियों की सोच को हमारे सामने रखती है जिसमें अभिभावकों का अपने बच्चों के लिए निरंकुशता, असहयोगी रवैय्या और आज के दौर में युवा पीढ़ी की आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके आलावा ‘बैडमैन द गुड बैडमैन द बैड’, ‘सवर्ण की प्रेम कथा’, ‘फ्रेंड जोन’, ‘लालपुर का डीएम’ ये सभी कहानियां उल्लेखनीय हैं जो कि हमें हमारे पूर्वाग्रहों से निकलकर सोचने के लिए मजबूर करती हैं। जिस सच्चाई के साथ लेखक ने समाज के नकारात्मक पहलुओं को हमारे सामने रखा है उससे हमें अंदाज़ा लग जाता है कि कहानीकार किस तरह जमीनी हकीकत से जुड़ा हुआ है।

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अपने अनोखे नाम के साथ प्रकाशित पुस्तक क्रिक पांडा पों पों पों में कुल मिलाकर 14 कहानियां है और हर कहानी अपने शीर्षक की तरह एक–दूसरे से अलग है।

अगर हम इन सभी कहानियों के मुद्दों से हटकर एक नए विषय की कहानी कि बात करें तो इन सब में अलग है ‘पीरियड का पहला दिन’ जिसे पढ़कर पाठक के चहरे पर मुस्कान आ जाएगी। लेखक ने इस कहानी के माध्यम से सबसे अलग और नए मुद्दे को हमारे सामने रखा है जिसपर कोई खुलकर बात नहीं करता ईमानदारी के साथ-साथ उन्होंने बेबाकी से इस मुद्दे को रखा है।

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पुस्तक क्रिक पांडा पों पों पों में लेखक ने केवल अपनी कल्पनाशक्ति को ही नहीं उतारा है बल्कि उन्होंने हमारे समाज की सच्चाई को हमारे सामने रखा, चाहे यह सब उन्होंने देख हो या अनुभव ही क्यों न किया हो। ये कहानियां सोचने को विवश करती हैं कि हम कैसे समाज में जी रहे हैं? कहानियों के मुद्दे ऐसे हैं जिनसे हम सभी परिचित हैं लेकिन इन सभी हकीकतों को देखने की बजाए इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इन सभी विषयों पर सोचने-सुनने की बजाए, इन्हें अनदेखा करना अधिक पसंद करते हैं। लेकिन ऋषभ प्रतिपक्ष ने इन सभी कहानियों के मध्य से हमारे अन्तर्मन पर गहरी छोट की है और पाठकों को कहानी के जरिए इन मुद्दों पर सोचने पर मजबूर किया है।

इसके अतिरिक्त लेखक की भाषा और लेखन कला पर बात करें तो उन्होंने सरल हिंदी भाषा का ज्ञान रखने वाले हर पाठक को ध्यान में रखकर पुस्तक को लिखा है। इसे पढ़ते वक़्त पाठकों को कोई परेशानी नहीं होगी। जिन मुद्दों पर उनकी कहानियां आधारित है उसी प्रकार, उन्होंने पुस्तक की भाषा में बिना किसी संकोच और विचार के कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया है जो शायद पाठकों को पसंद ना आए। अपनी सोच के दायरे को बढ़ाते हुए लेखक ने परिपक्व सोच और दृष्टि को उजागर किया है। एक अच्छी भाषा शैली के साथ क्रिक पांडा पों पों पों केवल कहानियों का समावेश नहीं है बल्कि दोहरे समाज की सच्चाई का आयना है। इस प्रकार की पुस्तक को पाठकों को शांत मन से पढ़ना चाहिए और केवल इसे पढ़कर नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि इन कहानियों के हर पक्ष पर अवश्य विचार करना चाहिए जिसकी हर कहानी हमें आज के समाज से रूबरू करती है। 

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Currently a media student. I did my graduation from DU in Mass communication and now persuing PG Diploma in Hindi Journalism from Jamia Millia Islamia University.

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