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नलिनी जमीला केरल की एक सेक्स वर्कर रह चुकी हैं। वह एक एक लेखक और एक्टिविस्ट हैं जो सेक्स वर्क और सेक्स वर्कर्स के प्रति समाज के रवैये में बदलाव लाने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रही हैं।। वह केरल में सेक्स वर्कर्स के संघ के समन्वयक के रूप में भी काम करती हैं। इसके साथ ही वह पांच एनजीओ की सदस्य भी हैं। 18 अगस्त, 1955 को एझावा जाति में जन्मी नलिनी जमीला की सामाजिक रूढ़ीवादी सोच और पितृसत्ता के साथ लड़ाई बहुत छोटी उम्र में शुरू हो गई थी। जब वह तीसरी कक्षा में थी तब ही उनकी आगे की शिक्षा रोक दी गई थी क्योंकि उनके परिवार के अनुसार, उन्होंने घर के कामों को करने के लिए पर्याप्त पढ़ाई कर ली थी। इसके बाद, उनके पिता ने उन्हें ईंट के खदानों में काम करने के लिए भेजना शुरू कर दिया।

नलिनी जमीला के पिता कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े थे। आगे चलकर उनकी मां ने कताई मिलों में अपनी नौकरी गंवा दी। नौकरी जाने के बाद, जब नलिनी की मां खर्चों के लिए उनके पिता पर निर्भर हो गई थी, तब उनके पिता मां का बहुत अधिक शोषण करने लगे। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि उनके इस प्रकार के व्यवहार पर कभी किसी ने सवाल नहीं उठाया। इसका ज़िक्र उन्होंने अपनी बहुचर्चित आत्मकथा- ‘द ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ अ सेक्स वर्कर’ में बताया है। अपनी इसी आत्मकथा में वह बताती हैं कि कैसे उन्होंने अपने भाई के अपने से उम्र में बड़ी महिला से शादी करने के फैसले का समर्थन किया था। नतीजतन, नलिनी जमीला के परिवार ने उन्हें घर से निकाल दिया था। तब उनके अपने भाई ने भी उनका साथ नहीं दिया था।

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18 साल की उम्र में नलिनी जमीला की शादी अवैध शराब बनाने वाले एक व्यक्ति से हुई। शादी से पहले उन्हें कभी एक आरामदायक जिंदगी नहीं मिली थी। लेकिन कम से कम उन्हें शादी के बाद जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं मिली, जैसे कि आश्रय, सुरक्षा और भोजन। नलिनी दो बच्चों की मां बन गई। लेकिन जीवन का ये आराम ज्यादा लंबा नहीं चला और कुछ ही सालों में कैंसर के कारण उनके पति की मौत हो गई। उनके पहले पति की मौत के बाद था जब नलिनी के पास नौकरी करने के लिए कोई औपचारिक शिक्षा नहीं थी। तब उन्होंने एक पेशे के रूप में सेक्स वर्क की ओर रुख किया। उसके बाद, उन्होंने दो बार शादी की और शाहुल हमीद से उनकी तीसरी शादी हुई। इस शादी के लिए उन्हें अपना नाम जमीला रखना पड़ा ताकि शाहुल के रिश्तेदार उन्हें स्वीकार कर लें लेकिन उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला। उनकी शादी 12 साल तक चली लेकिन बाद में जब नलिनी को पता चला कि शाहुल ने अपनी पहली पत्नी से बदला लेने के लिए उनसे शादी की थी तो नलिनी ने शाहुल से अलग होने का फैसला कर लिया।

नलिनी कहती हैं कि एक वैज्ञानिक अपने दिमाग का उपयोग करता है, एक शिक्षक अपनी मौखिक क्षमताओं का उपयोग करता है, एक मजदूर अपने हाथों का उपयोग करता है, उसी तरीके से एक सेक्स वर्कर अपने शरीर का उपयोग करती है।

नलिनी जमीला अब तक दो किताबें लिख चुकी हैं- द ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ अ सेक्स वर्कर (2005) और रोमांटिक एनकाउंटर्स ऑफ़ अ सेक्स वर्कर(2018)। ये दोनों बेस्टसेलर हैं और कई भाषाओं में अनुदित हो चुकी हैं। एक लेखक के रूप में उनकी सफलता के बावजूद, साहित्य जगत द्वारा उनका पर्याप्त स्वागत नहीं किया गया है। इन सब के पीछे की वजह एक वजह यह है कि वह एक सेक्स वर्कर के रूप में पैसा कमाती हैं। वह खुद को सेक्स वर्कर कहती हैं और इसे परिभाषित करने के लिए किसी अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल नहीं करती हैं बल्कि इस पेशे और सेक्स को एक कला का रूप मानती हैं। सेक्स वर्कर के रूप में अपने अनुभवों को वे अपनी 2005 की किताब में साझा करती हैं। लेकिन जैसा की हम जानते हैं हमारा भारतीय समाज नैतिकता की आड़ और संस्कारों के नाम पार नलिनी और उनके काम को बार-बार अपमानित करता रहता हैं। 

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एक तरह से देखे तो हम पाते हैं कि नलिनी जमीला अपने काम से हमारे समाज के हर उस खांचे को चुनौती देती हैं जो लड़की की वजाइना में अपनी इज्जत रखता हैं, जो उसकी सेक्स करने की इच्छा को उसके कैरेक्टर (चरित्र) से जोड़ता है और जो उसकी सेक्सुअल फ्रीडम का उपयोग करने को परंपराओं के खिलाफ मानता हैं।  इन सभी खांचों को वे चुनौती देती हैं अपने लेखन से। द ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ अ सेक्स वर्कर (2005) में नलिनी जमीला ने सेक्स वर्कर के रूप में अपने जीवन के बारे में बात की है। इस मकसद के साथ कि सेक्स के काम के प्रति लोगों के नजरिए में बदलाव आए। इस किताब में वे अपने 25 साल के करियर के बारे में बात करती ंहै। पिछले 25 सालों में वे लगभग 3000 पुरुषों के साथ काम कर चुकी हैं। वे बताती है कि उनका पहला ग्राहक एक पुलिसकर्मी था जिसने उनके साथ सोने के बाद अगले ही दिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वह कहती हैं कि यह घटना बताती है कि लोग कितने बड़े ढोंगी है, हर किसी की यौन ज़रूरतें और इच्छाएं होती हैं।

नलिनी जमीला बताती हैं कि केरल में पुरुष सेक्सुअली फ़्रस्ट्रेटेड हैं और ‘अच्छे आदमी’ का तमगा बचाए रखने के लिए छुप-छुपकर उनके पास आते हैं। नलिनी ने इस बात पर भी चर्चा की कि कितनी बार लोग उनसे केवल बात करने के लिए, उनके साथ समय बिताने या सलाह लेने के लिए आते है। उन्होंने अपने ग्राहकों के बीच एक वर्ग-विशिष्ट व्यवहार भी देखा। यदि वे निम्न-मध्यम वर्ग के थे तो वे अपने एप्रोच में माइल्ड होते हैं। मध्यम वर्ग के पुरुष पैसे के लिए मूल्य चाहते थे और उच्च वर्ग के पुरुष ज्यादातर कठोर और असभ्य होते है। इन चीजों के साथ वह कहती है कि जैसे हम किसी भी अन्य उत्पाद को बेचते हैं, वैसे सेक्स भी बेचा जा सकता हैं। नलिनी कहती हैं कि एक वैज्ञानिक अपने दिमाग का उपयोग करता है, एक शिक्षक अपनी मौखिक क्षमताओं का उपयोग करता है, एक मजदूर अपने हाथों का उपयोग करता है, उसी तरीके से एक सेक्स वर्कर अपने शरीर का उपयोग करती है। नलिनी इसलिए सेक्स वर्क की कानूनी वैधता के लिए लड़ रही हैं।  

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तस्वीर साभार: Manorama Online

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