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चेतावनी : यौन हिंसा

“छोटे कपड़े पहनने से लड़कियों/औरतों के साथ यौन हिंसा होती है। लड़कियां अगर रात को न निकलें तो उनके साथ होने वाले अपराध अपने-आप रुक जाएंगे। लड़कियों को अकेले बाहर जाने से बचना चाहिए। बलात्कार के बाद सर्वाइवर की इज़्ज़त चली जाती है।” ऐसी न जाने कितनी बातें हर बार कही जाती हैं जब भी यौन हिंसा की कोई घटना होती है। घटना के ख़िलाफ़ आक्रोश भले हो लेकिन कहीं न कहीं घूम-फिरकर सवाल सर्वाइवर पर ही पहुंच जाता है। वह उस वक्त कहां थी, उसने क्या पहना था, क्या वह अकेली थी ऐसे न जाने कितने सवाल किए जाते हैं। भले ही आंकड़े यह कहते हो कि यौन हिंसा करने वाले अधिकतर अपराधी सर्वाइवर की जान-पहचान वाले ही होते हैं। तो आज हम अपने इस लेख में यौन हिंसा से जुड़े ऐसे ही कुछ मिथ्यों को तोड़ रहे हैं।

मिथ्य : बलात्कार की वजह लड़कियों का पहनावा और उनकी जीवनशैली होती है।

तथ्य : बलात्कार की वजह कुंठित मानसिकता है, इसका लड़कियों के पहनावे या जीवनशैली से कोई लेना देना है। क्योंकि बलात्कार छह महीने के बच्ची और सत्तर साल की बूढ़ी महिलाओं से साथ भी होता है, जिन्हें अपने पहनावे क्या अपने खानपान तक का ज्ञान नहीं होता।

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मिथ्य : यौन हिंसा होने पर महिला की इज़्ज़त चली जाती है।

तथ्य : यौन हिंसा महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद क्षति पहुँचाती है। ऐसे में ‘इज़्ज़त’ की अवधारणा उन्हें सीधेतौर पर सामाजिक क्षति पहुँचाती है। ये भी पितृसत्ता की सोच है जिसने महिला की योनि में अपनी इज़्ज़त रखी है। वास्तव में यौन हिंसा करने वाले की इज़्ज़त जाती है।

मिथ्य : शादीशुदा महिलाओं के साथ बलात्कार नहीं हो सकता।

तथ्य : यह गलत धारणा है कि पति अपनी पत्नी का बलात्कार नहीं कर सकता। मर्ज़ी के खिलाफ़ यौन संबंध बनाना हर हाल में  बलात्कार ही है, भले ही बलात्कारी पीड़िता का पति हो। शादी यौन शोषण के लिए खुली छूट नहीं है।

मिथ्य : अगर कोई महिला देर रात तक बाहर रहती है तो ऐसा करके वह खुद की सुरक्षा ही दांव पर लगाती है।

तथ्य : कोई महिला कितनी देर तक बाहर रहना चाहती है, वह कहां और कब जाना चाहती है यह पूरी तरह उसका निजी फैसला है। अगर हम उस महिला को अकेले बाहर जाने या रात को बाहर जाने के दौरान सुरक्षित नहीं महसूस करवा पा रहे हैं तो यह बतौर समाज हमारी असफ़लता है न कि उस महिला की गलती है। 

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मिथ्य : घरेलू हिंसा से खुद को बचाने का एक ही उपाय है, औरतें अपने पार्टनर से अलग हो जाएं। ये पूरी तरह उनके ऊपर है।

तथ्य : एक हिंसक और आक्रामक रिश्ते से निकलना हर महिला के लिए आसान नहीं होता। कई बार उन्हें हिंसा से भरी धमकियां मिलती हैं अगर वे अलग होने की बात करती हैं। कई बार महिलाएं आर्थिक रूप से अपने पार्टनर पर निर्भर होती हैं और उनके पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं होता। साथ ही अलग होने, तलाक को हमारे समाज में एक कलंक की तरह देखा जाता है। एक हिंसक रिश्ते से निकलना सबके लिए आसान नहीं होता।

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तस्वीर:फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए

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