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फेमिनिज़म इन इंडिया अपने बेहतरीन लेखकों में से एक लेखक को हर महीने उनके योगदान का आभार जताने के लिए फीचर करता है। लेखकों के योगदान के बिना फेमिनिज़म इन इंडिया का सफ़र अधूरा होता। जून की फीचर्ड राइटर ऑफ द मंथ हैं मालविका धर। मालविका ने महिला स्वास्थ्य, महिलाओं पर बनने वाली सरकारी नीतियों, योजनाओं और कानून पर कई बेहतरीन लेख लिखे हैं। पितृसत्ता का पाठ पढ़ाना स्कूलों को करना होगा बंद, लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाना समस्या का हल नहीं, श्रम बल में घटती महिलाओं की भागीदारी और कोविड-19 से उपजी चुनौतियां, मैनुअल स्कैवेंजिंग और सफाई का काम क्यों है महिलाओं के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण, उनके कुछ बेहतरीन लेख में शामिल हैं।

फेमिनिज़म इन इंडिया : अपने बारे में हमें बताएं और आप क्या करती हैं?

मालविका धर : कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से हिंदी में बैचलर ऑफ आर्ट्स (ऑनर्स) के बाद मैंने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर्स किया। मैंने स्नातक तो हिंदी भाषा में किया थी लेकिन पत्रकरिता में लिखने का सफर अंग्रेज़ी अख़बार द पायनियर से शुरू हुआ। कुछ सालों तक पत्रकार के रूप में काम करने के बाद मैं बिहार में एक प्राइवेट स्कूल से जुड़ी और वहां कई सालों तक काम की। इस दौरान मुझे लिंग भेद, धार्मिक कट्टरपंथ और अन्य सामाजिक मुद्दों को ज़मीनी तौर पर समझने का मौका मिला। मुझे हमेशा से ही लिखने में रुचि थी। लेकिन यह लोगों तक पहुंचने का माध्यम पत्रकारिता के कारण ही बन पाया। पेशे से मैं एक पत्रकार हूं।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप फेमिनिज़म इन इंडिया से बतौर लेखक कैसे जुड़ीं?

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मालविका धर : फेमिनिज़म इन इंडिया से मैं पिछले साल ही जुड़ना चाहती थी और इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया था पर पिछले साल बैच पूरा हो चुका था। मैं थोड़ा लंबे समय के लिए इससे जुड़ना चाहती थी ताकि नारीवाद को लेकर मेरी समझ अधिक स्पष्ट और मजबूत हो। इसलिए इस साल मैंने दोबारा आवेदन किया और चयन होने के बाद तीन महीने तक इंटर्नशिप की। इसके बाद मुझे स्टाफ राइटर का ऑफर दिया गया। मेरे लिए नारीवाद से जुड़े मुद्दों पर लिखने के लिए यह एक अच्छा मौका और प्लैटफॉर्म था। फेमिनिज़म इन इंडिया एक ऐसा मंच था जहां हिन्दी जैसी बोलचाल की भाषा में रोजमर्रा की जिंदगी के मुद्दों से लेकर राजनीति या कानून और नीति जैसे सभी नारीवादी विषयों पर लिखा जा सकता था।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप कब और कैसे एक नारीवादी बनीं? नारीवाद से जुड़े कौन से मुद्दे आपके बेहद करीब हैं?

मालविका धर : नारीवाद शब्द जानने और समझने के काफी पहले से ही मैं अपने अधिकारों के लिए मुखर रही हूं। बिहार में पले-बढ़े होने पर भी परिवार में मुझे लड़की होने के कारण जीने के अलग तरीके नहीं सिखाए गए। मेरे लिए नारीवाद के मुद्दे अधिकारों के मुद्दे थे। इसलिए यह शब्द भले मेरे लिए नया हो, यह सोच नई नहीं है। वैसे तो, मेरे लिए नारीवाद से जुड़ा हर मुद्दा ही महत्वपूर्ण है पर आम जीवन में तीज त्योहार, सभ्यता या संस्कार के नाम पर हर दिन महिलाओं के साथ किया जा रहा भेदभाव के मुद्दे मेरे करीब हैं। मेरे लिए नारीवादी होने का मतलब हर दिन समाज के पितृसत्तात्मक नियमों से लड़ना है। यह किसी एक दिन किन्हीं मुद्दों से जुड़ना नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली एक यात्रा है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित आपके लेखों में से कौन सा लेख आपको सबसे अधिक पसंद है?

मालविका धर : मुझे अपने लेखों में किस तरह बच्चों को स्कूल में ही पितृसत्ता का पाठ पढ़ाया जाता है और आंतरिक स्त्रीद्वेष पर लेख सबसे अधिक पसंद है। स्कूल बच्चों के शिक्षा, व्यवहार और गुणों की सीख देने वाली सबसे महत्वपूर्ण जगह है जिस पर आमतौर पर कोई सवाल नहीं किए जाते। शैक्षिक संस्थान या शिक्षक खुद कई बार पितृसत्ता के अधीन ऐसी शिक्षा देते हैं जो आजीवन बच्चों के साथ रह जाती है। हमारे पितृसत्तातमक समाज ने हमेशा महिलाओं को एक दूसरे का विरोधी या प्रतिद्वंदी बनाकर पेश किया है। महिलाओं का इन लेबलों से बाहर निकलना ज़रूरी है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : जब आप नारीवादी मुद्दों, जेंडर, सामाजिक न्याय पर नहीं लिख रही होती तब आप क्या करती हैं?

मालविका धर : मुझे लिखना पसंद है। इसलिए जब मैं इन विषयों पर नहीं लिखती हूं, तब मैं कविताएं या अपना ब्लॉग लिखती हूं। मुझे खाना बनाना भी पसंद है। ये मेरे लिए स्ट्रेस बस्टर की तरह है। आजकल लिखने के अलावा फ़िल्म देखने में भी मेरा समय व्यतीत होता है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आपको फेमिनिज़म इन इंडिया और हमारे काम के बारे में क्या पसंद है? आप हमसे और किन-किन चीज़ों की उम्मीद करती हैं?

मालविका धर : फेमिनिज़म इन इंडिया हिंदी में भी नारीवाद या उससे जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं जो बहुत दुर्लभ हैं। यहां भाषा और दी गई जानकारियों का खास ख्याल रखा जाता है। इस संस्था की एडिटोरियल टीम हर व्यक्ति के योगदान और उसके सुझाव का सम्मान करती है। मुझे उम्मीद है कि आगे आने वाले दिनों में ये अन्य भारतीय भाषाओं में ऐप के रूप में भी उपलब्ध होगा।


(फेमिनिज़म इन इंडिया मालविका का उनके योगदान और उनके बेहतरीन लेखन के लिए आभार व्यक्त करता है। हमें बेहद खुशी है कि वह हमारी लेखकों में से एक हैं। आप मालविका को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फॉलो कर सकते हैं।)

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