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क्या आप जानते हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दुनियाभर में हर दिन 10 लाख से अधिक लोग यौन संचारित संक्रमण से संक्रमित होते हैं लेकिन जब भी सेक्स, पीरियड्स या यौन संचारित रोग के बारे में बात होती है तो लोग इस मुद्दे पर बात करने से कतराने लगते हैं। यह बेहद ज़रूरी है कि हम एसटीआई (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन) के बारे में बात करें। एसटीआई पुरुष और महिलाओं दोनों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। बता दें कि एसटीडी एक ऐसा संक्रमण है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक किसी भी तरह के यौन संपर्क में आने से हो सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसटीआई केवल सेक्स की वजह से नहीं फैल सकता। यह ओरल, वजाइनल और सेक्स टॉयज़ जैसे वाइब्रेटर से भी फैल सकता है। कभी- कभी एसटीआई संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल, प्रेग्नेंसी के समय मां से बच्चे में भी फैल सकता है। बात अगर भारत की करें तो हमारे देश की 6 फीसद आबादी यानि कम से कम 3 करोड़ लोग हर साल यौन संचारित रोगों से पीड़ित होते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेश के ही मुताबिक हर साल दुनिया में गोनोरिया, क्लमेडिया, सिफलिस और शैनक्रॉइड के 340 मिलियन केस आते हैं।

क्या हैं यौन संचारित रोग के लक्षण :

अमेरिकन वेबसाइट हेल्थलाइन मीडिया के मुताबिक, अगर कोई महिला एसटीआई यानी यौन संचारित रोग से संक्रमित होती है तो उसमें कुछ ऐसे लक्षण नज़र आ सकते हैं, जैसे: 

  • सेक्‍स करते समय दर्द या बहुत ज्यादा दर्द के साथ जलन महसूस होना।
  • पेशाब के दौरान दर्द या जलन महसूस करना।
  • असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज।
  • पीरियड्स के अलावा भी योनि से खून आना। 
  • योनि के आस-पास के इलाके में खुजली और मस्से होना।
  • हेल्थलाइन के ही मुताबिक कभी -कभी कुछ लोगों में एसटीआई के कोई भी लक्षण नहीं होते हैं, जिससे ऐसे मामलों में वह लोग इलाज नहीं करा पाते हैं और इससे सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा बना रहता है।

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महिलाओं को होने वाले यौन संचारित रोग

गोनोरिया : यह नीसेरिया नाम के जीवाणु के कारण होता है। अमेरिकन एकैडमिक मेडिकल सेंटर मायो क्लिनिक के मुताबिक, इसके वजह से महिलाओं की योनि से पीले और हरे रंग का वेजाइनल डिस्चार्ज निकलता है और ये महिलाओं के सर्विक्स को नुकसान पहुंचता है। गोनोरिआ सबसे ज्यादा वजाइनल, ओरल या एनल सेक्स के कारण फैल सकता है। 

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क्लैमिडिया : यह भी बैक्टीरिया के कारण होता है। अमेरिकन एकैडमिक मेडिकल सेंटर मायो क्लिनिक के मुताबिक के मुताबिक क्लैमिडिया की वजह से औरतों को गर्भ धारण करने में दिक्कत आ सकती है। एक्‍टोपिक प्रेग्‍नेंसी (Ectopic pregnancy) की भी संभावनाएं बनी रहती है।  

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस : (Human papillomavirus (HPV) infection): एचपीवी यानी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस एक बेहद खतरनाक, आम और सबसे तेजी से फैलने वाला वायरस है। यूके पब्लिक हेल्थ सर्विस, एनएचएस और अमेरिक एसोशिएशन ऑफ सेक्सुअल हेल्थ के मुताबिक, 80 फ़ीसद महिलाएं, एक ना एक बार अपने जीवन में HPV से संक्रमित होती हैं। महिलाओं में यदि एचपीवी संक्रमण लगातार जारी रहे तो इससे महिलाओं के गर्भाशय की कोशिकाओं में बदलाव का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। जिससे उनमें गर्भाशय कैंसर होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। एनएचएस के मुताबिक महिलाओं में गर्भाशय कैंसर के 99 फ़ीसद मामले एचपीवी के कारण होते हैं।

एचआईवी यानी एड्स : एचआईवी यानि ह्यूमन इम्यूनो डिफीसिअन्सी वायरस। एचआईवी वायरस से संक्रमित महिलाओं को बार- बार वजाइनल इंफेक्शन, सर्वाइकल कैंसर का खतरा, पीरियड्स में दिक्कत और कम उम्र में मेनपॉज़ जैसी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है

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यौन संचारित रोग के रोकथाम के उपाय 

यौन संचारित रोग के संक्रमण से बचने और फैलने से रोकने के लिए हमेशा कॉन्डम का इस्तेमाल करें। ख़ासकर लैटेक्स वाले कॉन्डम का इस्तेमाल करें

सेक्स से पहले और बाद हाथ धोना ना भूलें। सेक्स से पहले और बाद में पेशाब करने जरूर जाएं।

HIV की जांच करवाएं।

हेपटाइटिस बी की वैक्सीन ज़रूर लें।

यौन संचारित रोग की रोकथाम के लिए कई वैक्सीन भी उपलब्ध हैं। जैसे एचपीवी वैक्सीन। अगर आप सेक्सुअली एक्टिव हैं, तो समय- समय पर डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लें और एसटीआई स्क्रीनिंग करवाएं। एसटीआई एक घातक बीमारी है, इससे बचाव के लिए इस पर खुलकर बात करना जरूरी है। तभी इससे बचा जा सकता है। इसलिए जागरूक रहें, सुरक्षित रहें और स्वस्थ रहें।

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Kirti has completed Hindi Journalism from IIMC, Delhi. Looking for space that she can call home. She loves to bake cake and pizza. Want to make her own library. Making bookmarks, listening to Ali Sethi, and exploring cinema is the only hope to survive in this world.

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