हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Sucheta Chaurasia

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सुचेता चौरसिया टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS) मुंम्बई में मीडिया एंड कल्चरल स्टडीज़ की छात्रा हैं। अपने लेखन के ज़रिए वह समाज के हर भाग के लोगों में समरसता का भाव लाना चाहती हैं। वह पर्यावरण, लैंगिक समानता, फ़िल्म व साहित्य से जुड़े मुद्दों में रुचि रखती हैं। किताबें पढ़ना, बैडमिंटन खेलना, फोटोज़ खींचना उनके अन्य शौक हैं।

ट्रेंडिंग

इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी और सोशल मीडिया पर महिला विरोधी अभियान

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इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल निकला। दहेज के केस से प्रताड़ित पुरुषों की कहानी और महिलाओं के द्वारा झूठे केस से जुड़ी तर्कहीन बातें दी जाने लगी। ट्विटर पर #Genderbaisedlaws और #498A के तहत महिलाओं को शादी के नाम पर मर्दों से पैसा वसूलने का जरिया बनाने की बात कही गई।
फिल्म रक्षाबंधन का ट्रेलरः खुद को प्रगतिशीत बताती इंडस्ट्री के लिए क्या रूढ़िवाद भी मुनाफा कमाने का एक फॉर्मूला बन गया है

फिल्म रक्षाबंधन का ट्रेलरः बॉलीवुड के लिए रूढ़िवाद भी मुनाफ़ा कमाने का एक फॉर्मूला...

भाई बने अक्षय पर अपनी चारों बहनों की शादी करवाने की ज़िम्मेदारी है। उनके लिए दहेज इकठ्ठा करना है। चारों बहनों को ऐसा दिखाया गया है जो ब्राह्मणवादी पितृसत्ता के बनाए पैमानों में फिट नहीं बैठती हैं। किसी की लंबाई कम है, किसी का वज़न ज्यादा है, किसी के बाल छोटे हैं। इन ‘कमियों’ के आधार पर सबका दहेज और भी ज्यादा लगेगा।
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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