इंद्राणी रहमान: जिन्हें हासिल थी क्लासिकल डांस में महारथ| #IndianWomenInHistory
इंद्राणी रहमान: जिन्हें हासिल थी क्लासिकल डांस में महारथ| #IndianWomenInHistory
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इंद्राणी रहमान वह नाम जो एक नर्तकी, ब्यूटी पैजेंट और क्लासिक डांस के क्षेत्र में हमेशा याद किया जाता है। इनका जन्म 19 सितंबर, 1930 को तत्कालीन मद्रास (अब चेन्नई) में एक रईस परिवार में हुआ था। उनके पिता रामलाल बाजपेयी पेशे से एक केमिस्ट थे। उनकी पत्नी, एस्तेर लुएला शर्मन मूल रूप से एक अमेरिकी थीं। उन्होंने बाद में हिंदू धर्म में अपनाकर अपना नाम रागनी देवी रख लिया। इन्द्राणी का जन्म एक बहुसांस्कृतिक सामाजिक परिवेश में हुआ था। उनकी मां ने उन्हें बेहद स्वतंत्र और उदार होना सिखाया। अपनी माँ से ही उन्होंने नृत्य सीखना शुरू किया। महज़ नौ साल की उम्र में अमेरिका में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। नन्ही इंद्राणी ने भरतनाट्यम की भी ट्रेनिंग ली। चोकालिंगम पिल्लई उनके गुरु थे। बाद में वह विजयवाड़ा चली गईं, जहां उन्होंने कोराडा नरसिम्हा राव से कुचिपुड़ी सीखा।

इंद्राणी बचपन से ही स्वतंत्र विचारों की थीं। 15 साल की उम्र में ही हबीब रहमान के साथ भाग गई। हबीब बंगाली मुस्लिम थे और एमआईटी से पढ़े थे। पेशे से वह एक आर्कीटेक्टर थे। आगे चलकर ये दोनों सुकन्या रहमान, एक स्थापित नर्तकी और एक प्रसिद्ध फोटोग्राफर, राम रहमान के माता-पिता बने। वे पहले कलकत्ता में रहते थे, और बाद में दिल्ली चले गए। अपने जीवन में सभी उथल-पुथल का सामना करते हुए इंद्राणी का नृत्य का प्रशिक्षण बेरोकटोक जारी रहा।

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साल 1947 में, इंद्राणी रहमान को डॉ. चार्ल्स फैबरी ने देखा, जिन्होंने उन्हें ओडिसी नृत्य में महारत हासिल करने के लिए उड़ीसा जाने के लिए बहुत प्रेरित किया। कई वर्षों तक गुरु श्री देबा प्रसाद दास और मायाधर मानसिंह जैसे प्रमुख शिक्षक से कठोर और गहन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, वह एक महान ओडिसी नर्तकी के रूप में उभरीं। उन्होंने भारत और विदेशों में अलग-अलग स्थानों पर शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकप्रयिता हासिल की। 

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तस्वीर साभार: India Times

साल 1952 में 22 साल की इंद्राणी ने अपनी माँ के प्रोत्साहन से अमेरिका के कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में आयोजित मिस यूनिवर्स पेजेंट में भाग लिया। वे इस वक़्त दो बच्चों की मां भी थीं। हालांकि, एक सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग लेना एक युवा मां के लिए लगभग अविश्वसनीय था! बहरहाल, इंद्राणी साहसपूर्वक उन जगहों पर गई, जहां पहले बहुत कम लोग गए थे। वे एक बिकनी में दिखाई दीं, उसके माथे पर एक बिंदी और उसके बालों के हिस्से के रूप में एक गजरा भी था। ये सब देखकर वहां मौजूद दर्शक स्तब्ध रह गए थे!

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1950 के दशक के मध्य में, रागिनी-इंद्राणी मां-बेटी की जोड़ी ने कई विदेशी दौरों का आयोजन किया और दुनियाभर के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन किया। दोनों ने ही शास्त्रीय नृत्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साल 1961 में, इंद्राणी रहमान एशिया सोसाइटी द्वारा राष्ट्रीय दौरे पर प्रस्तुत की जाने वाली पहली नर्तकी बनीं। उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी और भारत के प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की वाशिंगटन, डीसी की आधिकारिक यात्रा के दौरान भी अपने नृत्य का प्रदर्शन किया।

उन्होंने साल 1952 में फेमिना मिस इंडिया अवार्ड और साल 1969 में पद्मश्री अपने नाम किया। साल 1981 में नृत्य के क्षेत्र में उनके स्थायी योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।साल 1976 में, इंद्राणी न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित लिंकन सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में जुइलियार्ड स्कूल के नृत्य प्रभाग की संकाय सदस्य बनीं। वह अमेरिका में बस गई और बड़े पैमाने पर यात्रा करने के अलावा उन्होंने विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ाया भी।

इंद्राणी रहमान का 5 फरवरी 1999 को न्यूयॉर्क में 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कई नृत्य रूपों में अपनी महारत के माध्यम से उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रदर्शनों की सूची पर एक अमिट छाप छोड़ी। सुकन्या रहमान, इंद्राणी की नर्तकी बेटी ने अपनी प्रसिद्ध मां और दादी के जीवन से अपनी जीवनी रचना, ‘डांसिंग इन द फैमिली: एन उनकनवेंशनल मेमॉयर ऑफ थ्री वूमेन‘ में स्पष्ट रूप से चित्रण किया है।

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सुचेता चौरसिया टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS) मुंम्बई में मीडिया एंड कल्चरल स्टडीज़ की छात्रा हैं। अपने लेखन के ज़रिए वह समाज के हर भाग के लोगों में समरसता का भाव लाना चाहती हैं। वह पर्यावरण, लैंगिक समानता, फ़िल्म व साहित्य से जुड़े मुद्दों में रुचि रखती हैं। किताबें पढ़ना, बैडमिंटन खेलना, फोटोज़ खींचना उनके अन्य शौक हैं।

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