FII Hindi is now on Telegram

 

स्त्रियों की जीवन दशा में गिरावट आयी है, उनमें पुरुषों के समान ही तथा उनसे भी बढ़कर सामर्थ्यशाली सृजन और संहार की निहित शक्ति का लोप हो गया है तो उसे पुन: परंपरागत आदर्श के आलोक में तदनुरूप व्यवस्थित और स्थापित करना होगा| अन्यथा पश्चिम से आ रही नारी स्वतंत्रता की अविचारित रमणीय आंधी प्रकारांतर से उन्हें उखाड़कर कुएं से निकालकर खाई में डाल देगी और इसप्रकार घर परिवार एवं समाज के निर्माण में, राष्ट्रीय पुननिर्माण और मातृभूमि परमवैभव तक पहुंचाने में उनकी अपेक्षित भूमिका बाधित होगी|

ये विचार है उत्तर प्रदेश के नये माननीय मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट यानी कि योगी आदित्यनाथ के, जिसे इन्होंने अपने लेख ‘मातृशक्ति भारतीय संस्कृति के संदर्भ में‘ के अंतर्गत लिखा है|

योगी आदित्यनाथ जब पहली बार 12वीं लोकसभा में सांसद बने तो उनकी उम्र मात्र 26 साल थी और उन्होंने सबसे कम उम्र के सांसद बनने का इतिहास रच दिया| इसके बाद वह गोरखपुर से 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लोकसभा सांसद बने|

कानों में सोने के मोटे कुंडल पहने और आंखों पर रेबैन का काला चश्मा चढ़ाए आदित्यनाथ हमेशा भगवा में ही नजर आते हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाई और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री घोषित किया है|

Become an FII Member

लोकतंत्र के महापर्व में दलित-सवर्ण, हिंदू-मुस्लिम, अनपढ़-पढ़े-लिखे, महिला-पुरुष यानी की सभी ने बिना किसी भेदभाव के अपनी उम्मीदों पर खरा उतरने की उम्मीद से बीजेपी पर वोटों की बौछार की है| ऐसे में देश के बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के विचार, चर्चा के लिए अहम हो जाते है| किसी भी काम के लिए इंसान के विचार व उनका नजरिया महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वह अपने नजरिए से ही किसी भी समस्या का समाधान या उसके विकास की योजना बनाता है| फिर चाहे वह परिवार के संबंध में हो या प्रदेश के संबंध में|

विकास की परिभाषा के अंतर्गत अक्सर यह कहा जाता है कि विकास वह है जो समाज के आखिरी आदमी तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचे| सत्ता स्थापित करनी हो या विस्थापित लोकतांत्रिक समाज में इसका निश्चय आधी दुनिया के अहम मत से संभव होता है, 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी आधी दुनिया बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और परिणाम सामने है| तो आइये जानते है कि बहुमत की ताज़पोशी वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आधी दुनिया से जुड़े मुद्दों पर उनके क्या विचार है –

महिला-आरक्षण पर ‘योगी विचार’

अपने इस लेख में वे महिला–आरक्षण के संबंध में लिखते हैं – ‘सच तो यह है कि सम्प्रति महिलाएं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में चाहे वह शिक्षा का हो या समाज सेवा का, चाहे राजनीति का हो, चाहे कारोबार का, प्राप्त अवसर का सदुपयोग कर संघर्ष करते हुए अपना स्थान बनाती चली जा रही है और यदि यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब वे पुरुषों से किसी मायने में कम नहीं रह जायेंगी| अत: जो विकास स्वाभाविक रूप से, स्वयं स्फूर्त रूप से घटित हो रहा है उसे हड़बड़ी में आरोपित और विकृत करने की आवश्यकता नहीं है|’

‘महिला का प्रतिनिधित्व यानी घर का नष्ट होना’ ऐसे ‘योगी विचार’ है

उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश था) के पौड़ी जिला स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूर गाँव के राजपूत परिवार के योगी आदित्यनाथ लेख में आगे लिखते है – ‘ग्राम सभाओं, पंचायतों तथा अन्य स्थानीय निकायों में आरक्षण के बाद इनकी स्थिति की समीक्षा कीजिये| इससे घर परिवार में बच्चों की परवरिश में स्त्री की अनिवार्य और महत्वपूर्ण भूमिका पर क्या प्रभाव पड़ता है इसका आकलन कीजिये| यह तय कीजिये कि स्त्री को सक्रिय राजनीति में, बाहरी दुनियादारी में पुरुषों के समान ही हिस्सेदारी देने से कहीं हमारे परिवार की माँ, बहन, बेटी अपने स्वरूप और महत्व को तो नहीं खो देंगी| अभी तक तो जो देखने को मिल रहा है वह बहुत उत्साहवर्धक नहीं है| फिर भी अभी प्रयोग के स्तर पर इसे चलाने की आवश्यकता है|’

मंत्री जी ने अपने इस लेख में महिलाओं को पुरुष की तरह बनाने में और भी कई खतरे का जिक्र करते हुए लिखा है – ‘जब स्त्री पुरुष के समान प्रभावी हो जाती है तो घर नष्ट हो जाता है|’

लेख में लिखी गयी इन बातों से साफ़ है कि मुख्यमंत्री जी के ‘स्वतंत्रता’, ‘समानता’ और खासकर ‘महिला’ के संदर्भ में विचार महिला को ‘इंसान’ समझने से पहले उसके माँ, बहन और पत्नी के रूप स्वीकार करते है| साथ ही, उनके विचारों से साफ़ है कि वह किसी भी मायने समाज में महिला को समान दर्जा देने और प्रतिनिधित्व करने को सही मानते है|

एक हिंदू लड़की बराबर ‘सौ मुस्लिम लड़की’ – योगी गणित

महिलाओं पर माननीय मुख्यमंत्री के विचार यहीं खत्म नहीं हो जाते| साल 2014 में एक वीडियो आया था| जिसमें कथित तौर पर आदित्यनाथ हिंदू मर्दों से आह्वान कर रहे थे कि कम से कम 100 मुस्लिम लड़कियों को हिंदू धर्म कबूल करवायें|

बात चाहे महिलाओं की हो या फिर मुस्लिमों की योगी आदित्यनाथ हमेशा से इन वर्गों के खिलाफ़ अपने विवादित बयानों के लिए जाने गए है और उनके विचार सिर्फ उनके बयानों तक ही सीमित नहीं बल्कि वे बकायदा ब्लॉग व अपने लेखों से अपने विचार का प्रचार-प्रसार अपनी वेबसाइट करते रहे हैं|

‘समलैंगिकता है घटिया तर्कों की उपज’ – योगी आदित्यनाथ

गढ़वाल यूनिवर्सिटी से साइंस ग्रेजुएट होने के बाद योगी पर धर्म रंग इतना गहरा रंग लाया कि वो गोरखनाथ मंदिर के महंत बन गए| योगी हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक हैं और समलैंगिकता पर इनका मानना है कि ‘यह सामाजिक नैतिकता के लिए घातक है|’

योगी आदित्यनाथ के विचारों का सिलसिला कभी नहीं थमा| ‘विवाद पुरुष’ के नाम से जाने-जाने वाले योगी आदित्यनाथ को आज उनके समर्थक यूपी के ‘विकास पुरुष’ के तौर पर प्रस्तुत कर रहे है| ऐसे में यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि किस तरह ‘विवाद’ से ‘विकास’ तक का इतिहास रचा जायेगा|

योगी आदित्यनाथ के सात विवादित बयान

1.

2.

3.

4.

5.

6.

7.

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

Follow FII channels on Youtube and Telegram for latest updates.

नारीवादी मीडिया को ज़रूरत है नारीवादी साथियों की

हमारा प्रीमियम कॉन्टेंट और ख़ास ऑफर्स पाएं और हमारा साथ दें ताकि हम एक स्वतंत्र संस्थान के तौर पर अपना काम जारी रख सकें।

फेमिनिज़म इन इंडिया के सदस्य बनें

अपना प्लान चुनें

Leave a Reply