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हैरेसमैंट या छेड़छाड़, कहने को तो ये छोटा सा शब्द है। पर जिसपर ये बीतता है ये वही जानता है कि ये सिर्फ एक शब्द मात्र नहीं है बल्कि एक वीभत्स घटना है| कहने को तो आज हम आधुनिक समाज का हिस्सा है पर क्या सच में ऐसा है? हमारे कपड़ों, खान-पान और लाइफ स्टाइल में तो खूब बदलाव आ गया है पर सोच में बदलाव कब आयेगा? ये अपने आपमें बड़ा सवाल है| लड़कियों को छेड़ना-धमकाना, आते-जाते परेशान करना या उनको बुरी नीयत से देखना लोगों के लिए आम सी बात हो गई है|

इस शब्द का अजीब हिस्सा ये है कि इस घटना के बाद हर चीज़ के लिए लड़की के पहनावे, रहन-सहन या यों कहें कि उनके अस्तित्व पर को दोष देना ये काम समाज के लोगों को खूब भाता है| पर असल बात तो ये है कि खोट उनके नज़रिए में है। ऐसी ही एक सच्ची घटना से आज आपको वाक़िफ कराती हूं ।

उम्र बेशक छोटी है, पर जिंदगी में अनुभवो की कमी नहीं, थोड़े से समय में बहुत कुछ सीख लिया। हैरेसमेंट जहां लोगों के लिए छोटी सी बात थी| वहीं यह एक शब्द काफी था उसकी जिंदगी को हिलाने के लिए|

शिक्षक को जीवन का बहुत अहम पात्र माना जाता है। पर क्या किया जाए जब वह शिक्षक ही गुनहगार बन जाये। बात एक सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की की है जो पास वाले घर में ट्यूशन पढ़ने जाती थी। घर के पास में ट्यूशन  था तो घरवालों को इतनी फिक्र नहीं थी। क्योंकि मैम के साथ मां की अच्छी बनती थी। एक साल तक सब ठीक था। सर-मैम दोनों  पढ़ाते थे। सर काफी बातुनी थे। लड़की से काफी बात करते थे। लड़की को ड्राइंग का बड़ा शौक था। एक दिन की बात हैं सर ने लड़की से पूछा कि तुम मेरी मदद करोगी, एक काम है? लड़की ने सोचा शायद  पोस्टर या ड्राइंग का कोई काम होगा। उसने कहा कैसा काम? सर ने कहा “तन-मन-धन” कहावत सुनी है? लड़की बोली हां सुनी है। सर ने कहा तुम मेरी तन से संबंधित मदद कर सकती हो? लड़की को कुछ समझ नहीं आया वो सोच-विचार में पड़ गयी कि आखिर तन से कैसे मदद होगी? बस उस दिन से यह कहानी शुरु हुई।

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हमारे कपड़ों, खान-पान और लाइफ स्टाइल में तो खूब बदलाव आ गया है पर सोच में बदलाव कब आयेगा? ये अपने आपमें बड़ा सवाल है|

वो बिना बोले चली गयी। थोड़े दिन बाद फिर दुबारा वही सवाल पूछा गया।  लड़की ने मना कर दिया पर वह ड़र भी गयी कि कुछ गलत तो नहीं हैं। उसने सर‌ से बात करना बंद कर दिया। सर मौके की तलाश में रहते कि कब फिर से वही सवाल पूछ लड़की को परेशान करें। काफी समय बीत गया। एक दिन लड़की अकेली पढ़ रही थी सब जा चुके थे मैम भी नीचे थी। सर पढ़ा रहे थे।  उसने लड़की की कापी पर तीन बिंदु बनाकर फिर वही पूछा। लड़की फिर चुप। उसने लड़की को ‘आई लव यू’ लिखा और फिर पूछा ‘डू यू लव में?’ लड़की को गुस्सा तो आ रहा था पर वह कर भी क्या सकती थी। वह चुपचाप उसकी वाहियात बातें सुनती रही। सर अपनी घिनौनेपन में यह तक भूल चुके थे कि उसका एक बेटा भी है जो उस लड़की से छोटा है। लड़की अब ट्यूशन तक जाने से कतराने लगी थी और मैम के पास ही ज़्यादा पढ़ती थी। समय और गुज़रता गया। अब लड़की नौवीं कक्षा में आ गई| दो साल हो गये थे इस बात को लड़की चुपचाप सहती आ रही थी। इसलिए ही सर की हिम्मत बढ़ती जा रही थी। वो  तरह-तरह के बहाने ढूंढता लड़की को परेशान करने का| उसका हाथ पकड़ कर उससे बातें करने के लिए‌। पर लड़की फिर भी चुप रहती। 

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फिर ज़िन्दगी में वो दिन भी आया जब सर ने हद ही पार कर दी। सर ने उसे अकेले पढ़ने आने को कहा उसने बहाना मारकर मना कर दिया। अगले दिन शाम का वक्त था। ट्यूशन में सिर्फ लड़की, उसकी सहेली और वो सर ही था। सर ने फिर वही सब पूछा और कहा कि दुबारा आकर नोट्स ले जाना| वह ड़रते हुए घर आ गई| उसकी ये बात लड़की को मानसिक रूप से बेहद परेशान करने लगी|

हमारी चुप्पी ही इस अपराध को न केवल बढ़ावा देती है, बल्कि पालती-पोसती भी है|

सब उसे ही गलत समझेंगे ये सोचकर वो किसी को कुछ नहीं बताती। फिर एकदिन अपनी दोस्त को उसने सब बताया । दोस्त ने सलाह दी कि घर पर बता दे जो भी हो रहा है। दो दिन लड़की बहुत बीमार रही इसी चिंता में। तब उसकी दोस्त ने उसकी हालत देखकर लड़की की ताई को बताया। ताई ने मम्मी से सारी बात की। लड़की डर रही थी कहीं वो उसे ही गलत ना समझें। पर उन्होंने सारी बात समझी और लड़की को समझाया की कब से सह रही है यह सब और बताना चाहिए था। फिर पापा से बात हुई उन्होंने ट्यूशन छोड़ देने का फैसला लिया और उसकी दोस्त के पैरेंट्स से सारी बात की। लडकी ने ट्यूशन छोड़ दिया। पर बात यहां खत्म नहीं हुई थी।

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उसकी दोस्त ने मैम को बता दिया की लड़की ट्यूशन छोड़ रही है। मम्मी को टयूशन में बुलाया गया। फिर मैम घर आ गई सारी बात पूछने पर लड़की ने बताया। और मैम उसका ही दोष निकालने लगी। खरी- खोटी सुनाने लगी। सर ने पहले भी पांच लड़कियों के साथ ऐसे ही किया था यह बात वो मानने को तैयार ही ना थी।

यहाँ कसूरवार जितना वो सर था उतना ही हमारा ये समाज भी था| जो हमेशा लड़कियों को ही हर हिंसा में जिम्मेदार मानता है| बस अफ़सोस इसबात का है कि काश लड़की ने पहले आवाज़ उठाई होती और उसकी हरकतों का मुंह-तोड़ जवाब दिया होता। खैर जो होता है अच्छे के लिए होता है, यही सीख लेकर आगे बढ़ जाना ही अच्छा है। यह तो उस लड़की की कहानी थी। पर आज भी कितनी लड़कियों के साथ ना जाने क्या-क्या होता है।  जिसपर चुप्पी तोड़ने और लड़ाई लड़ने की सख्त ज़रूरत है, क्योंकि हमारी चुप्पी ही इस अपराध को न केवल बढ़ावा देती है, बल्कि पालती-पोसती भी है| इसलिए ‘आवाज़ उठाईये और हैरेसमेंट करने वालों को सबक सिखाईये।‘

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यह लेख ईशिका गोयल ने लिखा है|

तस्वीर साभार : Dial A Law

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