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शुभिका गर्ग

हमारे देश में पितृसत्तामक ढाँचे के तहत महिलाओं और पुरुषों के दायरे परिभाषित है| इसलिए हम जब भी किसी काम, वस्तु या व्यवहार को सुनते है तो तुरंत हम उससे जुड़े जेंडर को पहचान लेते है| इसी तर्ज पर, अगर मैं कहूँ ‘मोटरसाइकिल’ तो आपके मन में पहली छवि आएगी ‘पुरुष’| लाजमी है, ये सिर्फ आपके मन में नहीं बल्कि आमजन के मन में भी आएगा| इसीलिए हमारी सड़कों में पुरुष ही ज्यादातर मोटरसाइकिल चलाते दिखते है| पर अब बदलते वक़्त के साथ अब ये वर्जनाएं तोड़ी जा रही है, न केवल सामजिक स्तर पर बल्कि विश्वस्तर पर|

ये बेहद गौरवशाली पल हैं भारत देश के लिए क्योंकि एक बार फिर से देश की एक बेटी ने ना सिर्फ दुनियाभर में अपने देश का नाम रौशन किया है, बल्कि देश में एक नया इतिहास भी रच दिया है। देश की यह प्रतिभासपन्न बेटी है – बैंगलुरु की रहने वाली 23 वर्षीय ‘ऐश्वर्या पिस्से|’ ऐश्वर्या देश की पहली खिलाड़ी ही नहीं पहली भारतीय भी हैं जिन्होंने मोटर स्पोर्ट्स की ऍफ़आईएम प्रतियोगिता में विश्व खिताब जीत लिया है। आज तक इस खिताब को कोई भी भारतीय खिलाड़ी हासिल नहीं कर पाया था। 

अब बदलते वक़्त के साथ अब ये वर्जनाएं तोड़ी जा रही है, न केवल सामजिक स्तर पर बल्कि विश्वस्तर पर|

देश की बेटियां हर उस मुकाम को हासिल कर रही हैं जिन्हें आज तक उनके लिए कठिन माना जाता रहा है। मोटरसाइकिल पर सवार होकर सारी बाधाओं को पार करते हुए विश्वभर की प्रतियोगियों के बीच अपना स्थान बनाना सच में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। ऐश्वर्या ने मोटरस्पोर्ट्स चैंपियनशिप के फाइनल राउंड के बाद हंगरी के वरपलोटा में महिलाओं की श्रेणी में एफआईएम विश्व कप जीता है। इस इवेंट का आयोजन अंतरराष्ट्रीय मोटरसाइकिलिंग संघ ने किया जो कि विश्व में मोटरसाइकिल रेसिंग की शासकीय यूनिट है। ऐश्वर्या ने 65 अंकों के साथ सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। पुर्तगाल की रीटा विएरा दूसरे स्थान पर रहीं जो कि ऐश्वर्या से 4 अंक पीछे थीं।

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गौरतलब है कि ऐश्वर्या का साल 2017 में एक भयंकर एक्सीडेंट हुआ था जिसमें उनकी कॉलर बोन टूट गई थी और सर्जरी के द्वारा उनकी कॉलर बोन में स्टील प्लेट व स्क्रू लगाए गए हैं। हिम्मती और मजबूत इरादों वाली ऐश्वर्या ने हार मानना सीखा ही नहीं था, उन्होंने जल्दी ही अपने प्रिय खेल में वापसी कर ली और आज नतीजा सबके सामने है। ऐश्वर्या आप पर सारे देश को गर्व है। आपको इस शानदार सुनहरी सफलता के लिए हार्दिक बधाई। 

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यह लेख शुभिका गर्ग ने लिखा है, जिससे इससे पहले मामप्रेसो में प्रकाशित किया जा चुका है|

तस्वीर साभार : timesnownews

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