क्रिकेट में भारतीय खेल को एक नई दिशा देने के साथ-साथ उसका नाम पूरी दुनिया में रोशन करने वाली मिथाली दोराई राज ने अब टी20 क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। उनका यह फैसला साल 2021 में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने का तरीका देखा जा रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि राज के फैंस और क्रिकेट प्रेमी उनके इस निर्णय से प्रभावित हुए हैं, लेकिन अब तक के टी20 करियर और साथ ही अन्य क्रिकेट फॉर्म्स में उनका जो प्रदर्शन रहा है उसकी कीमत भी देशवासियों के लिए अमूल्य है।

36 वर्षीय मिथाली राज का जन्म राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई सिकंदराबाद से की और स्कूल में ही क्रिकेट की कोचिंग अपने भाई के साथ शुरू कर दी थी। उन्होंने दस साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और महज़ सत्रह  साल में उन्हें भारतीय टीम द्वारा चुन लिया गया था। उन्हें साल 1997 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में भी खिलाड़ी के तौर पर चुना जाने वाला था लेकिन राज उस समय केवल चौदह साल की थीं जिस कारण वह अपनी जगह टीम में नहीं बना पाईं।

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मिथाली राज एक ऐसी क्रिकेटर है जिन्होंने महिलाओं को यह बताया कि क्रिकेट सिर्फ पुरुषों का नहीं महिलाओं का भी खेल है।

सफ़लताओं वाली मिथाली

उन्होंने अपने वनडे करियर की शुरुआत साल 1999 में आयरलैंड के खिलाफ 114 रन बनाकर की थी। साथ ही टेस्ट क्रिकेट में उनका डेब्यु साल 2001 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ हुआ था। राज केवल एक खिलाड़ी के तौर पर ही नहीं बल्कि एक कप्तान के रूप में भी सफल रही हैं। वे क्रिकेट में पहली ऐसी भारतीय कप्तान है जिसने आईसीसी वन डे क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल में एक से ज्यादा बार टीम का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने साल 2005 और 2017 के वर्ल्ड कप फाइनल में भारतीय टीम की कप्तानी कर यह इतिहास रचा और रिकॉर्ड अपने नाम किया। इसी साल फरवरी में न्यूजीलैंड के साथ हुए वन डे मैच में राज 200 वनडे मैच खेलने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन चुकी है।

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जहां मिथाली राज के करियर की बात आती है वहां उनकी सफलताओं की बात आना लाज़मी है। राज को साल 2003 में अर्जुन अवार्ड से नवाज़ा गया था। साथ ही साल 2015 में उन्हें पद्मश्री मिला। साल 2013 में महिला वर्ल्ड कप में वे नंबर वन खिलाड़ी के रूप में उभर कर आई थीं। जुलाई 2017 में राज वर्ल्ड वन डे इंटरनेशनल क्रिकेट में  6000 रन जोड़ने वाली पहली खिलाड़ी बनीं। उनकी बैटिंग इस तरह चर्चित है कि 703 रेटिंग के साथ वे इस वक्त विश्व की सर्वश्रेष्ठ बैट्समैन है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की “लेडी सचिन तेंदुलकर” भी कहा जाता है।

वे क्रिकेट में पहली ऐसी भारतीय कप्तान है जिसने आईसीसी वन डे क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल में एक से ज्यादा बार टीम का मार्गदर्शन किया है।

जब विवादों में रही मिथाली  

हालांकि ऐसे बहुत से मौके पड़े हैं जब मिथाली राज पर उंगलियां भी उठाई गई हैं। हरमनप्रीत कौर जो कि टी20 में भारतीय महिला क्रिकेट की कप्तान है, उनसे भी राज का मतभेद बहुत सी दफा सामने आया है। लेकिन सबसे बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी साल 2018 में आईसीसी महिला वर्ल्ड टी20 के दौरान देखी गई थी, जब उन्होंने बीसीसीआई को एक खत लिखकर टीम के कोच और बीसीसीआई सीओए के एक सदस्य पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए यह कहा था कि टी20 सेमी फाइनल्स में उन्हें जगह ना देने की साजिश रची गई है। इसके बाद कोच ने पलटवार करते हुए यह बताया कि बैटिंग ऑर्डर में नीचे खेलने की सिफारिश पर राज टी20 खेल से संन्यास लेने की धमकी देती हैं। उनके ऊपर यह भी आरोप लगा कि वह टीम मीटिंग में अपना निम्न योगदान देती हैं और जिम्मेदारियों से बचती हैं। साथ ही टीम प्लान को नजरअंदाज कर अपनी मनमानी भी करती हैं।

खैर जहां टीम की बात आती है वहां मतभेद होना आम बात है। हम केवल विवादों को देखकर खिलाड़ी के योगदान पर सवाल नहीं उठा सकते। मिथाली राज एक ऐसी क्रिकेटर है जिन्होंने महिलाओं को यह बताया कि क्रिकेट सिर्फ पुरुषों का नहीं महिलाओं का भी खेल है। वे भी क्रिकेट खेल सकती हैं, उसमे करियर बना सकती हैं और पूरे विश्व के सामने अपने देश का झंडा लहरा सकती हैं। मिथाली राज एक सशक्त महिला का सटीक उदाहरण हैं। यही कारण है कि जल्द ही उनपर वायकॉम18 एक बायोग्राफी फिल्म बनाने जा रहा है जो अगले साल तक रिलीज़ भी हो जाएगी। हम सभी उम्मीद करते हैं कि अगले विश्वकप में मिथाली राज की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का प्रदर्शन और भी निखर कर सामने आएगा।

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तस्वीर साभार : jansatta.com

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