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मौजूदा समय में हमारा देश विकास की एक बड़ी विचित्र-सी दिशा में आगे बढ़ रहा है। विचित्र इसलिए क्योंकि इस विकास के नतीजे के रूप में जो तस्वीरें सामने आ रही है, वो कहीं से भी सकारात्मक नहीं है। ‘सकारात्मक’ ग़रीबों के संदर्भ में, हाशिए पर रहने वाले समुदायों के संदर्भ में, एक बेहतर ज़िंदगी का सपना देखने वाले आम इंसान के संदर्भ में और पिछड़े इलाक़ों से आने वाले युवाओं के लिए जो उच्च शिक्षा का न केवल सपना देखते हैं बल्कि कठिन परीक्षाओं को पास करके सरकारी यूनिवर्सिटी में दाख़िला लेते हैं, उनके संदर्भ में।

इसी तर्ज़ पर, इन दिनों में दिल्ली का जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय सुर्ख़ियों में हैं, क्योंकि इसे विचित्र से दिखने वाले उसी विकास के नामपर कुचलने की साज़िश रची जा रही है। यह सुर्ख़ियो में है- अपने उस विकास के लिए जिसके तहत स्टूडेंट्स की वाजिब माँगों के लिए उनपर धड़ल्ले से लाठी बरसायी जा रही है। क्योंकि वे उस विकास का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जिसमें उनके मौलिक अधिकारों का दमन कर उन्हें हाशिए पर समेट दिया जाए।

हाल ही में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में होस्टल फ़ीस बढ़ाए जाने के विरोध में छात्रों के संसद मार्च को पुलिस ने रोक दिया है। बीते कई दिनों से छात्र से विश्वविद्यालय में फ़ीस बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनकी आवाज़ को जब नज़रअंदाज़ किया गया तब छात्रों ने अपनी आवाज़ को संसद तक पहुँचाने का तय किया।

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जब जेएनयू के हज़ारों छात्र अपने कैम्पस से संसद तक मार्च करने की कोशिश में जमा हुए तो पुलिस ने उन्हें मेन गेट के पास ही रोक दिया। ग़ौरतलब है कि इसी सोमवार से ही संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ है।पुलिस ने छात्रों को मार्च से रोकने की तैयारी रविवार की रात से ही शुरू कर दी थी, जिसके लिए मेन गेट के दोनों तरफ़ भारी बैरिकेडिंग कर दी गयी और इलाक़े में धारा 144 लगा दी गयी।

सबसे बुरा आवाज़ों का दमन का नहीं बल्कि आवाज़ उठाने की आदत का ख़त्म हो जाना होता है।

अगली सुबह जब छात्र निकले तो वो कैम्पस के मेन गेट से क़रीब 100 मीटर ही आगे बढ़ सके क्योंकि भारी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं। पुलिस ने जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष ऐशी घोष को भी हिरासत में लिया है।छात्रों के मार्च को देखते हुए उद्योग भवन, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया है। मेट्रो ने बयान जारी कर कहा है कि दिल्ली पुलिस के सलाह पर इन तीन स्टेशनों को फ़िलहाल बंद कर दिया गया है।

तस्वीर साभार : sanjeevnitoday

छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद जेएनयू प्रशासन ने बढ़ी हुई फ़ीस में कमी करने की घोषणा कर दी थी। लेकिन छात्रों की माँग है कि पुरानी फ़ीस ही लागू की जाए, उन्हें फ़ीस में किसी भी तरह की बढ़ोतरी उन्हें मंज़ूर नहीं है।

छात्रों ने दोहराया कि वे तब तक नहीं झुकेंगे जब तक सरकार फीस वृद्धि वापस नहीं ले लेती।

अपनी इस माँग को लेकर जब छात्र आगे बढ़े तो पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दी। छात्रों ने प्रदर्शन और इस दौरान पुलिस के कथित लाठीचार्ज में खुद को लगी चोटों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। छात्रों ने अपने हाथों में तख्तियां और बैनर ले रखे थे। ये लोग संसद का ध्यान अपनी मांगों की तरफ खींचना चाहते थे। छात्रों ने दोहराया कि वे तब तक नहीं झुकेंगे जब तक सरकार फीस वृद्धि वापस नहीं ले लेती।

इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासन का दमनकारी रवैया हम साफ़ देख सकते है, फ़ीस बढ़ोतरी के फ़रमान के रूप में और लाठीचार्ज के रूप में। इस दमनकारी सत्ता के ख़िलाफ़ हम सभी को एकजुट होकर आवाज़ उठाने की ज़रूरत है, अपने लिए और आने वाले भविष्य के लिए। क्योंकि सबसे बुरा आवाज़ों का दमन का नहीं बल्कि आवाज़ उठाने की आदत का ख़त्म हो जाना होता है। बाक़ी जेएनयू में दमन का क़िस्सा हम सभी का हिस्सा है, जिसपर बोलना-मुँह खोलना हम सभी के लिए ज़रूरी है!

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तस्वीर साभार : satyahindi.com

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