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बीते दिनों भारतीय लोकतंत्र पूरी दुनिया में सुर्ख़ियों में रहा, अपनी ग़रीबी, बेरोज़गारी या महिला हिंसा के बढ़ते स्तर के लिए नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार की तरफ़ से लाए गये नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ जनांदोलन के लिए। इस जनांदोलन में देश के क़रीब हर कोने से लोगों ने अपना विरोध दर्ज किया।

हाँ, ये अलग बात है कि शुरुआती दौर में जब इस आंदोलन के तहत शांतिपूर्ण तरीक़े से प्रदर्शन किया जा रहा था तब देश में मीडिया का बड़ा तबका इसे नज़रंदाज़ कर मंगल ग्रह और पाकिस्तान की खबरों में व्यस्त था। पर जैसे ही विरोध के स्वर तेज़ होने के साथ-साथ देश के हर दूसरे कोने से आने लगे और किन्हीं जगहों पर यह हिंसात्मक हुए तब मीडिया ने तुरंत सत्ता का पाला पकड़ लिया।

सत्ता की दमन चाल और सदफ़  

सत्ता की दमन चाल ने बेहद सुनियोजित ढंग से सबसे पहले शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर शिकंजा कसा। फिर धीरे-धीरे ये फ़ेहरिस्त लंबी होती चली गयी। पुलिस प्रशासन ने भी सत्ताधारियों के इशारों पर ख़ूब लाठी चलाई और कभी ख़ुद हिंसा कर तो कभी ख़ुद हिंसा का शिकार होकर विरोध के स्वरों को रोकने का पुरज़ोर असफल प्रयास किया।

उत्तर प्रदेश भी इस आंदोलन में बेहद सक्रिय रहा। लेकिन अब जैसे-जैसे पुलिस प्रशासन की तरफ़ से उनके हिंसात्मक और दमनकारी रवैए सामने आ रहे है, वे बेहद शर्मसार करने वाले है। हाल ही में, मुझे अपनी फ़ेसबुक मित्र सदफ़ ज़फ़र की खबर मिली, जो लखनऊ से है। बीते गुरुवार नागरिकता कानून के विरोध में 19 दिसंबर को हुई हिंसा के मामले में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में कुल 34 लोगों के नाम एफआईआर दर्ज़ की गयी, इसमें सदफ़ जफर भी शामिल थी। पूर्व स्कूल टीचर रही सदफ़ मौजूदा समय में कांग्रेस की मीडिया प्रवक्ता भी हैं। ग़ौरतलब है कि उसदिन की उस जगह पर सदफ़ अकेली महिला थी, जिन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार किया था।

द क्विंट के मुताबिक, सदफ़ के परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी लाठियों से पिटाई की। उनके हाथों और पैरों  पर लाठियां बरसाईं गईं और पेट पर लात भी मारी गई जिससे उन्हें इंटरनल ब्लीडिंग होने लगी।

किसी भी महिला के प्रति पुलिस का ये रवैया वास्तव में सत्ताधारियों की डरी और हिली नियत को ही दर्शाता है।

लखनऊ में हुए प्रदर्शन के दौरान जब परिवर्तन चौक पर शरारती तत्वों ने पुलिस पर पत्थर फेंकना शुरू किया तो सदफ़ इसे फेसबुक पर लाइव रिकॉर्ड कर रही थीं, जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया तब भी वह लाइव थीं। सदफ़ की भतीजी सिमरन राज वर्मा ने बताया कि उन्हें लखनऊ जेल में ट्रांसफर किया गया है। उन्हें पुलिस ने बेरहमी से पीटा। सिमरन ने यह भी कहा कि सदफ के खिलाफ तोड़फोड़, हत्या की कोशिश और विस्फोटक रखने से जुड़ी संगीन धाराओं समेत 14 धाराएं लगाई गई हैं। सदफ ने प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा उपद्रव करने और इस पर पुलिस की निष्क्रियता को उजागर करते हुए दो वीडियो भी फेसबुक पर पोस्ट किए थे।

किसी भी महिला के प्रति पुलिस का ये रवैया वास्तव में सत्ताधारियों की डरी और हिली नियत को ही दर्शाता है। मीडिया ने पूरी तरह इस आंदोलन को हिंसा की चादर में लपेटकर इसे एक समस्या के रूप में और पुलिस की हिंसा को इस समस्या के उपाय के रूप में दिखाना और लोगों के दिल-दिमाग़ में बैठाना शुरू किया है, जिससे उनकी क्रूरता का कोई भी सामने आना उन्हें मुश्किल लगता ही।

लेकिन वास्तविकता इससे ठीक उलटी है। दमन के ये क्रूर क़िस्से इतनी आसानी से नहीं छिप सकते है। एक महिला के संदर्भ में पुलिस का, सत्ता का और कई बार समाज का हिंसात्मक रवैया हमेशा इसबात की पुष्टि करता है कि इसे कभी भी कोई बोलती, आगे बढ़ती, सवाल करती और विरोध करती औरत बिल्कुल नहीं भाती है और जिसके दमन के लिए ये सारी हदों को पार करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

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सदफ़ से साथ ‘समर्थन’ की आवाज़

सदफ़ के साथ भी सत्ता ने ऐसा ही कुछ करने की साज़िश रची है। पर अब ये खबर सरोकारों से जुड़ी मीडिया की सुर्ख़ियाँ बन रही है, जिसके बाद धीरे-धीरे देश की तरफ़ से सदफ़ के समर्थन में लोग सामने आ रहे हैं। फिल्मकार मीरा नायर ने ‘ए सूटेबल बॉय’ की अभिनेत्री सदफ जफर की रिहाई की मांग की हैं, जिन्हें लखनऊ में नागरिकता (संशोधन) कानून के एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के चलते गिरफ्तार किया गया था। नायर ने ट्वीट किया, ‘यह अब हमारा भारत है-भय पैदा करने वाला: हैशटैगसूटेबलबॉय अभिनेत्री सदफ जफर को लखनऊ में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए पीटा गया और जेल में डाल दिया गया। उनकी रिहाई की मांग में मेरे साथ जुड़ें।’

फिल्मकार मीरा नायर के साथ सदफ़ ज़फ़र

क्विंट के मुताबिक, सदफ की भतीजी ने कहा, ‘उन्हें अब लखनऊ के जेल में भेज दिया गया है। उन्हें पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा।’ अब सदफ जाफर की रिहाई की मांग कर रहीं मीरा नायर को हंसल मेहता का साथ मिल गया है। मेहता ने ट्विटर पर अभिनेत्री की गिरफ्तारी को ‘चकित करने वाला’ और ‘गंभीर’ बताते हुए निंदा की और कहा, ‘यह चकित करने वाला और गंभीर विषय है।’ किस तरह लोगों ने सरकार को इस तरह हिलाकर रख दिया कि उनके पास प्रदर्शन को रोकने के लिए बर्बरता के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा।

उल्लेखनीय है कि सामाजिक मुद्दों और जनसरोकारों में सक्रिय सदफ़ दो बच्चों की सिंगल मदर भी है और इन सबसे ख़ास वह एक सशक्त महिला भी है, जो अपने विरोध को बुलंद स्वरों में दर्ज करना जानती है। मैं लोकतंत्र में लोक की आवाज़ को ज़िंदा रखने वाली सदफ़ और उनके जैसे हर नागरिक का समर्थन करती हूँ और सत्ता के दमन के ख़िलाफ़ उनकी हर लड़ाई में उनके साथ हूँ।

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तस्वीर साभार : फ़ेसबुक

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