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इंस्टाग्राम आज के समय में सबसे ज्यादा लोकप्रिय जनसंचार का माध्यम बन चुका है। इसमें अनेकों फीचर्स है, उनमें से एक है – ग्रुप बनाकर बातचीत करना। इसी फीचर का इस्तेमाल करते हुए कुछ लड़कों ने बॉयस लॉकर रूम नाम का ग्रुप बनाया। माना जा रहा है, कि इस ग्रुप में 18 वर्ष तक के लड़के शामिल थे, जो लड़कियों की तस्वीरें आपस में शेयर कर रहे थे। उन्होंने लड़कियों के संबंध में अपमानजनक बातें कही और रेप करने जैसे विषय तक चर्चित थे। #boyslockerroom इस वक़्त ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है। करीब 29.3 हज़ार ट्वीट्स इस हैशटैग के साथ फैल रहें हैं। इसके अलावा इंस्टाग्राम पर भी बहुत से लोग इस घटना पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए सामने आए। 

3 मई से इंस्टाग्राम पर लोगों ने अचानक एक ग्रुप के विषय में जानकारी फैलानी शुरू कर दी। यह ग्रुप 18 वर्ष तक के लड़को के ज़रिए चलाया जा रहा था, जिसका नाम बॉयस लॉकर रूम था। लोगों ने इस ग्रुप में होने वाली बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर किए, जिसे पढ़कर यह पता लग था कि ग्रुप के अंदर लड़कियों के संबंध में अपमानजनक बातें हो रहीं थीं। इसके अलावा, ग्रुप के एक सदस्य ने किसी लड़की का गैंगरेप करने की इच्छा जताई, जिस पर किसी अन्य सदस्य ने कहा कि हम कर सकतें हैं, इसका मतलब यह नहीं की हम करें। जबकि पहले सदस्य ने लड़की को फोन करके, गैंगरेप की योजना बनाने को लेकर बात आगे बढ़ाई। हालांकि, इन बातों और स्क्रीनशॉट्स में कितनी सच्चाई है, इसपर कोई शोध शुरू नहीं हुई। पर सोशल मीडिया के जगत में यह मामला सुर्ख़ियों में है। इसके अलावा जिन लड़को को इस ग्रुप का हिस्सा बताया जा रहा था, उनके लिए ऐसा भी माना जा रहा है कि उन्होंने अपने अकाउंट का नाम बदल दिया है या उसे बन्द कर दिया।

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घटना के सुर्ख़ियों में आते ही स्वाति मालीवाल का ट्विटर पर ट्वीट आया, जिसमें उन्होंने लड़कों को गिरफ्तार करने की मांग उठाई। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा,’ इंस्टाग्राम पर बॉयस लॉकर रूम नाम के एक ग्रुप के स्क्रीनशॉट देखे। ये हरकत एक घिनौनी, अपराधी और बलात्कारी मानसिकता का प्रमाण है। मामले को संज्ञान में लेते हुए पुलिस और इंस्टाग्राम को नोटिस जारी कर रहे हैं। इस ग्रुप के सभी लड़के अरेस्ट होने चाहिए, एक कड़ा संदेश देने की ज़रूरत है।’

‘एक लड़की का रेप करना है।’ इस धारणा वाली बलात्कार की संस्कृति किस तरह हमारे समाज में ज़िंदा है, इसका जीवंत उदाहरण है बॉयस लॉकर रूम।

दिल्ली महिला आयोग ने इस ग्रुप के खिलाफ नोटिस जारी किया है, जिसमें कहा गया कि ग्रुप से जुड़े लड़के, नाबालिग लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें साझा कर रहें थे। साथ ही, गैंगरेप जैसे जघन्य अपराध करने को लेकर भी बातचीत कर रहे थे। महिला आयोग ने अपना नोटिस दिल्ली पुलिस और इंस्टाग्राम के लिए जारी किया है। इस पूरे मामले के बाद जहां एक तरफ लोग महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग सामने आए जो इस घटना के पक्ष में अपनी राय दे रहे हैं। उनका यह कहना है कि हमें किसी की निजी बातों को इस तरह उछालना नहीं चाहिए। एक काफी प्रसिद्ध इंस्टाग्राम पेज ने अपनी पोस्ट निकली जिसमें उन्होंने इस मामले को धार्मिक मोड़ दे दिया। पोस्ट में कहा गया कि,’जितने भी लड़के इस ग्रुप में शामिल थे, सभी हिंदू ब्राह्मण समाज से जुड़े हैं। अतः यह ब्राह्मण समाज की रूढ़िवादी परवरिश का ही नतीजा है।’ अब कुछ प्रमुख प्रश्न सामने आते हैं-

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क्या इस समय स्थिति को धार्मिक मोड़ देना उचित है? ये सच में कोई धार्मिक मुद्दा है? किसी निजी ग्रुप में अगर गैंगरेप की धारणा पनप रही हो तो उसे संज्ञान में लेना गलत होगा? क्या रेप कल्चर एवं औरतों के अपमानजनक निरूपण को हमेशा ही सामान्य विषय मानकर टाल दिया जाएगा? क्या इन सारी घटनाओं के बावजूद भी यह देश लड़कियों के कपड़ो की लंबाई- चौड़ाई नापेगा? और क्या इस बार भी महिलाओं को उनके हाव भाव ठीक रखने की नसीहत मिलेगी?

जब भी ऐसी बातें समाज के सामने आती है, हमेशा ही बहुत से विचारों का मेला लग जाता है। पक्ष-विपक्ष रखे जातें हैं। हर सूचना और भाव को तोला जाता है। पर यह सभी कुछ विफल है। क्योंकि जब तक हम सोच पर काम करना नहीं सिखेंगे, इस चित्र में कोई बदलाव नहीं आएगा। अभी कुछ वक़्त पहले ही निर्भया के अपराधियों को फांसी की सज़ा मिली पर ‘एक लड़की का रेप करना है।’ इस धारणा वाली बलात्कार की संस्कृति किस तरह हमारे समाज में ज़िंदा है, इसका जीवंत उदाहरण है बॉयस लॉकर रूम। इस समाज को अपनी सोच की जड़ों में जाकर उसकी त्रुटियां समझने और सुधारने की बहुत ज़रूरत है। 

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तस्वीर साभार : Indian Express

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