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पीरियड्स से पहले पीएमएस या प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की परेशानी तो कई लोगों को होती है। इस समय शारीरिक तकलीफ़ के साथ साथ चिड़चिड़ापन, तनाव, डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं भी महसूस होती हैं। पीएमएस से जूझना ज़्यादा मुश्किल तो नहीं है। आमतौर पर अपने शरीर का ख्याल रखकर, ठीक से खा-पीकर, खुद को आराम देकर इसे दूर किया जा सकता है। पर कभी-कभी परेशानी इतनी गंभीर होती है कि इंसान के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। उसकी ज़िंदगी में बाधा बन जाती है और आत्महत्या तक के बारे में सोचने के लिए मजबूर करती है। अगर पीएमएस इतना गंभीर हो जाए कि आपको एक साधारण ज़िंदगी जीने से रोके, तो इसे ‘प्री-मेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसॉर्डर’ या पीएमडीडी कहते हैं।

पीएमडीडी लगभग 1.8 फ़ीसद से लेकर 5.8 फ़ीसद महिलाओं को होता है। ये पीरियड्स के आने से एक या दो हफ़्ते पहले से शुरु हो जाता है और पीरियड्स खत्म होने के दो-तीन दिन बाद ही जाता है। इसके लक्षण पीएमएस से मिलते-जुलते हैं पर कहीं ज़्यादा गंभीर हैं। शोध से पता चला है कि पीएमडीडी से पीड़ित औरतों को आत्महत्या से ख़तरा दूसरों से कहीं ज़्यादा है। आत्महत्या के बारे में सोचने की संभावना दुगनी है और आत्महत्या की कोशिश करने की संभावना लगभग तीन गुना ज़्यादा है।

मानसिक बीमारियों की सूचि ‘डायगनॉस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैन्युअल ऑफ़ मेंटल डिसॉर्डर्स’ (डीएसएम) में पीएमडीडी के 11 लक्षण दिए गए हैं। अगर आपको इनमें से पांच या उससे ज़्यादा लक्षण महसूस होते हैं तो इसका मतलब आप पीएमडीडी से पीड़ित हो सकते हैं। ये लक्षण हैं – 

1. अतिरिक्त गुस्सा और चिड़चिड़ापन जो आपके रिश्तों को नुकसान पहुंचाए
2. डिप्रेशन और आत्महत्या करने के ख़्याल
3. डर और तनाव
4. ‘पैनिक अटैक’ जिसमें दिल की धड़कन बढ़ जाना, चक्कर आना, बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों
5. अक्सर रोना आना
6. पसंद की चीज़ों में मन न लगा पाना
7. काम में मन न लगा पाना
8. थकान और एनर्जी की कमी
9. बहुत ज़्यादा या कम खाना
10. बहुत ज़्यादा या बहुत कम नींद आना
11. पेटदर्द, सिरदर्द, जोड़ों का दर्द जैसे शारीरिक लक्षण

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पीएमडीडी का कोई ख़ास कारण अभी तक सामने नहीं आया है पर अनुमान ये है कि इसके पीछे दिमाग़ में सेरोटॉनिन की कमी हो सकती है। सेरोटॉनिन वो पदार्थ है जो हमारे दिमाग और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है और ख़ुशी, संतुष्टि जैसी भावनाएं पैदा करता है। सेरोटॉनिन की कमी की वजह से डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं भी होती हैं। पीएमडीडी के पीछे जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं।

पीरियड्स से पहले पीएमएस या प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में शारीरिक तकलीफ़ के साथ चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं भी महसूस होती हैं।

पीएमडीडी की जांच के लिए कोई एक टेस्ट नहीं है। आमतौर पर डॉक्टर ये जांच करते हैं कि इसके लक्षण पीरियड्स की शुरुआत के आसपास ही नज़र आते हैं और इनके पीछे एंग्जायटी या डिप्रेशन जैसी कोई और मानसिक बीमारी नहीं है। इलाज के तौर पर ‘एंटी डिप्रेस्सेंट’ दवाइयां दी जा सकती हैं, जिससे सेरोटॉनिन की मात्रा बढ़ती है। बर्थ कंट्रोल की गोलियां भी दी जाती हैं, जिससे शरीर के हॉर्मोनल बैलेंस में बदलाव आता है। कई बार मनोवैज्ञानिक थेरपी या काउंसलिंग का सुझाव भी दिया जाता है।

अगर आपको लगता है कि आपको पीएमडीडी है, तो इन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है – 

1. पहले निश्चित हो जाइए कि आपको ये लक्षण सिर्फ़ पीरियड्स के आसपास ही महसूस होते हैं। अगर ये बाकी दिनों में भी महसूस हो रहे हैं तो इनके पीछे पीएमडीडी नहीं, कोई और मानसिक समस्या हो सकती है।

2. डॉक्टर को दिखाएं और डॉक्टर के सुझाव के बग़ैर कोई दवा न लें। एंटी-डिप्रेस्सेंट जैसी दवाइयां प्रेस्क्रिप्शन के साथ ही लेनी चाहिए नहीं तो समस्या और गंभीर हो सकती है।

3. अगर आपको लगता है कि आप आत्महत्या करने वाली हैं या किसी भी तरह ख़ुद को नुकसान पहुंचाने वाली हैं तो तुरंत डॉक्टर को या अपने नज़दीकी अस्पताल में फ़ोन करें।

4. ख़ुद को समझाते रहिए कि ये भावनाएं स्थायी नहीं हैं और आप थोड़े ही समय में बेहतर महसूस करेंगी। मानसिक स्थिति बुरी होने के दौरान कोई बड़ा फ़ैसला लेने से ख़ुद को रोकें।

पीरियड्स के दौरान या आसपास शारीरिक और मानसिक तौर पर खुद को ठीक रखने के लिए आप ये चीज़ें कर सकती हैं:

1. खाने-पीने पर ध्यान दें। फल, सब्ज़ियां, मेवे बड़ी मात्रा में खाने से शरीर पोषित रहता है और महीने के इन दिनों सेहत बनाए रखने की ताकत मिलती है।

2. व्यायाम करें। इसके लिए जिम में वर्कआउट करने की ज़रूरत नहीं है। आधे घंटे टहलने से भी शरीर और मन दोनों ठीक रहते हैं।

3. अच्छी नींद लें। कोशिश करें कि रोज़ आठ घंटे तक की नींद मिले। सोने से पहले ये ध्यान रखें कि बेडरूम आरामदायक और साफ़-सुथरा है ताकि आप चैन से सो सकें।

4. पानी पिएं। ख़ासकर गर्मी के मौसम में पानी पीना बेहद ज़रूरी है।

5. किसी मनोवैज्ञानिक से अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करें। आपको कब और किस तरह का मानसिक तनाव महसूस होता है इसका विश्लेषण करें, ताकि इसके ख़िलाफ़ कदम उठाए जा सकें।

सबसे ज़रूरी है इस बात का ध्यान रखना कि आप अकेली नहीं हैं और लगभग हर औरत को पीरियड्स से जुड़ी कोई न कोई शारीरिक या मानसिक समस्या ज़रूर होती है। अगर हर तरह से खुद का ध्यान रखा जाए तो इन समस्याओं को मिटाया जा सकता है।

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तस्वीर साभार : healthshots

Eesha is a feminist based in Delhi. Her interests are psychology, pop culture, sexuality, and intersectionality. Writing is her first love. She also loves books, movies, music, and memes.

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