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पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में आकर बुरी तरह प्रभावित हुई है। अमेरिका, स्पेन, इटली जैसे बड़े विकसित देश जिनकी स्वास्थ्य सेवाओं की चर्चा की जाती थी थोड़ी सी ढील के कारण धराशयी हो गए। अमूमन ऐसे बड़े संकट ही किसी देश की प्रबंधन स्थिति और उससे लड़ने के हौसले को दर्शाते हैं। आज एक शक्तिशाली देश कहे जाने वाले अमेरिका में कोरोना संक्रमण के मामले 50 लाख तक पहुंच गए हैं। वहीं, भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगभग 20 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है।

इन विकसित और विकासशील देशों के प्रदर्शन की लड़ाई में कई ऐसे देश भी मौजूद हैं जिन्होंने अपनी सूझबूझ और रणनीति से इस कोरोना महामारी को मात दी। इनकी खास बात यह रही कि इन देशों में कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में महिला नेताओं ने एक अहम भूमिका निभाई है। इस लड़ाई में कुछ देशों की महिला प्रतिनिधियों ने अपनी बुद्धिमता और सूझबूझ का लोहा मनवाया और पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की। अपने कौशल के कारण ही इन महिला नेताओं की चर्चा पूरे विश्व में हो रही है। अपने देश में लॉकडाउन के सख्ती से पालन करने, स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर प्रयोग, योजनागत तरीके से की गई तैयारियों के ज़रिए इन्होंने ये बता दिया कि किसी भी बड़े संकट से लड़ने के लिए बड़े नाम या रुतबे की जरूरत नहीं होती बल्कि कुशल रणनीति और सूझबूझ ही संकट को मात दे सकती है। कोरोना की इस जंग में सबसे कारगर जो रणनीति इन देशों में साबित हुई वह 3 टी की रणनीति है यानी ट्रेस, टेस्ट और ट्रीटमेंट।

इन महिलाओं की रणनीति का ही नतीजा है कि आज उन देशों में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या और संक्रमितों लोगों का आंकड़ा दूसरे देशों के मुकाबले बेहद कम है। वहां आम लोगों की जिन्दगी भी पहले की तरह ही सामान्य हो चली है। विशेषज्ञों का कहना है कि टेस्टिंग और मृत्यु दर में अच्छे प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 10 देशों की सूची में 7 देश का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है।

1. न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न

तस्वीर साभार: टाइम मैगज़ीन

जैसिंडा अर्डर्न ने न्यूजीलैंड की सत्ता संभालने के बाद जितनी तेज़ी से लोकप्रियता बटोरी है वह वाकई में काबिले तारीफ़ है। जैसिंडा ने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए काफी सख्त और निर्णायक फैसले लिए। नतीजतन न्यूजीलैंड में एक समय ऐसा आया जब कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया जिसकी जानकारी खुद जैसिंडा अर्डर्न ने खुद दी। इस देश में अब लॉकडाउन को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। जब देश में 102 मामले हुए तो 23 मार्च को अर्डर्न ने 28 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की। इसी के साथ अपने देश की सभी सीमाएं सील कर दी और बाहर से आ रहे अपने नागरिकों को 14 दिन क्वारंटीन में रहने का एक सख्त आदेश दिया। बाहरी नागरिकों के न्यूजीलैंड में प्रवेश की पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई। अब न्यूजीलैंड में हालात सामान्य हो चले है और लोगों की दिनचर्या भी पहले की तरह की चलने लगी है।

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2. आइसलैंड की प्रधानमंत्री कात्रिन जेकब्सदोत्तिर

तस्वीर साभार: स्पाइगल

कोरोना के खिलाफ लडा़ई में आइसलैंड की प्रधानमंत्री कात्रिन जेकब्सदोत्तिर की भूमिका की भी काफी सराहना की जा रही है। उन्होंने अपने देश के सभी नागरिकों के लिए मुफ्त कोरोना जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई। यह सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्होंने देश के हर नागरिक के लिए जांच करवाना अनिवार्य कर दिया। आइसलैंड में कोरोना की जांच को प्राथमिकता देते हुए तेजी के साथ ट्रैकिंग सिस्टम की सहायता से मरीज़ों की और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करके उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप वहां पर कोरोना मरीजों की संख्या काफी कम देखने को मिल रही है और इस महामारी पर काबू पाने में यह नीति काफी कारगर साबित हुई है।

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3. ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन

तस्वीर साभार: द स्ट्रेट टाइम्स


कोरोना महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। इसका बड़ा कारण यह रहा कि इससे पहले भी ताइवान एक वायरस का सामना कर चुका था। साल 2003 में ताइवान में SARS वायरस फैला था। इस वायरस से सबक लेकर इस बार ताइवान ने एक योजनागत रणनीति बनाई और कोरोना को मात दी। जैसे ही ताइवान को ये यह जानकारी मिली कि चीन के वुहान प्रांत से कोरोना का संक्रमण फैला है उसके बाद फौरन चीन से आने वाले लोगों की मेडिकल जांच शुरू कर दी गई। यह जानकर आश्चर्य होगा कि ताइवान ने चीन से पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन को वायरस के बारे में सूचित किया लेकिन उस समय ताइवान द्वारा दी गई जानकारी को नजरअंदाज किया गया। राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन की समझदारी के चलते ताइवान में लॉकडाउन लगाने की जरूरत ही महसूस नहीं की गई।

कोरोना महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में कुछ देशों की महिला प्रतिनिधियों ने अपनी बुद्धिमता और सूझबूझ से पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की।

4. जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल

तस्वीर साभार: यूरो न्यूज़


जर्मनी में कोरोना के मामले शुरुआत में बहुत तेजी से फैलते हुए दिखाई दिए लेकिन इस बिगड़ती हुई स्थिति को देखते हुए चांसलर एंजेला मर्केल ने सख्ती के साथ कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए। जिसका परिणाम यह रहा कि आज जर्मनी में कोरोना से जुड़े मामले दूसरे बड़े देशों के मुकाबले कम हैं। मर्केल ने किसी भी बड़े देश की तुलना में सबसे ज़्यादा लोगों की जांच करने पर अपना सारा ध्यान केंद्रत किया और वायरस के फैलने की शुरुआत से ही कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए थे। अब हालात सुधरने के साथ ही जर्मनी में लॉकडाउन में ढील दी गई है और स्थितियों में सुधार होना शुरू हो गया है। इन सबके पीछे मर्केल का नेतृत्व कौशल, प्रांतीय सरकारों की समझदारी, बेहतर तैयारी और वहां मौजूद अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा योगदान है।

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5. नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग

तस्वीर साभार: द पॉलिटिक

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग ने भी ऐसे सख्त फैसले लिए जिसकी वजह से ही आज इनकी तारीफ की जा रही है। एर्ना ने कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए वर्चुअल रूप में अपने देश के सभी बच्चों से संवाद किया और यह समझाया कि इस प्रकार की बीमारी से कैसे लड़ा जाए। इस संवाद के दौरान छोटे बच्चों ने उनसे अपनी बर्थडे पार्टी नहीं मनाने या अपनी दोस्तोॆ के घर क्यों नहीं जाने जैसे सवाल पूझे, जिसका जवाब भी उन्होंने बड़ी ही समझदारी से दिया। इसके अलावा एर्ना ने इमरजेंसी शक्ति के द्वारा सार्वजनिक और निजी संस्थानों को बंद कर दिया। इसके बाद जब हालात काबू में आने लगे तो धीरे-धीरे लॉकडाउन में ढील दी गई और आज नार्वे में भी हालात सामान्य है।

6. फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन

तस्वीर साभार: पीबीएस

फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन दुनिया की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री हैं, जो किसी देश का नेतृत्व कर रही हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने में सना ने युवाओं और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय ऐसे लोगों का साथ लिया जिनके माध्यम से देश की जनता को आसानी से समझाया जा सके। उन्होंने कोरोना से जुड़ी सारी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी ही आसानी के साथ आम नागरिकों तक पहुंचाई और इससे बचने के उपाय बताए। सना का मानना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल आज सभी लोग करते है, लोगों का ज्यादातर समय अखबार या टीवी की जगह सोशल मीडिया पर बीतता है। इसलिए कोरोना वायरस से जुड़े सभी पहलुओं से लोगों को अवगत कराने और निपटने के सुझाव के लिए सोशल मीडिया एक कारगर माध्यम है। फिलहाल फिनलैंड में कोरोना वायरस के मामले बेहद कम हैं।

7. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन

तस्वीर साभार: सीसीई न्यूज़

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन का सख्ती से करने के आदेश दिए। इसके अलावा लोगों को महामारी की मुसीबत से बाहर निकालने के लिए बहुत पहले ही एक आर्थिक पैकेज की घोषणा कर दी थी। उनकी सरकार ने मार्च में ही पूर्ण बंदी कर दी थी। इसी का नतीजा है कि अब वहां स्थितियां बेहतर हो रही है। हालांकि ये साफ कर दिया गया है कि यदि मामले बढ़ते हैं तो दी गई ढील को वापस ले लिया जाएगा। सरकार ने अपनी अर्थव्यस्था को महामारी के प्रकोप से बचाए रखने के लिए नागरिकों और कंपनियों को आर्थिक सहायता भी देनी शुरू कर दी है।

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तस्वीर साभार : गूगल

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