मल्टीमीडियावीडियो वीडियो: देखें, नारीवादी पेरियार की कहानी

वीडियो: देखें, नारीवादी पेरियार की कहानी

पेरियार का मानना था कि महिलाओं को राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और घरों से बाहर निकलना चाहिए।

पेरियार का जन्म 17 सितंबर को 1879 में तमिलनाडु के ईरोड ज़िले में एक संपन्न परिवार में हुआ था। महज़ 19 साल की उम्र में ही उनकी शादी 13 साल की नागम्मई से कर दी गई। साल 1933 में नागम्मई की मौत हो गई। धीरे-धीरे पेरियार हिंदू रीति-रिवाजों और जाति व्यवस्था के तहत होने वाले भेदभाव का विरोध करने लगे। साल 1919 में पेरियार के राजनीतिक जीवन सफ़र की शुरुआत हुई जब वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। लेकिन पेरियार के जीवन में अहम मोड़ वैकौम सत्याग्रह और उनके द्वारा शुरू किए गए आत्मसम्मान आंदोलन के ज़रिए आया। वैकौम सत्याग्रह की शुरुआत साल 1924 में हुई थी। यह सत्याग्रह मुख्य रूप से दलितों के मंदिर में प्रवेश करने से जुड़े भेदभाव से था।

पेरियार उन कुछ समाज सुधारकों में शामिल थे जो अपने वक्त से आगे की सोच रखते थे। उनका मानना था कि महिलाओं को राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और घरों से बाहर निकलना चाहिए। उन्हें पहली बार ‘पेरियार’ की उपाधि साल 1938 में एक दलित महिला मीनामबल ने ही दी थी। शादी की संस्था के बारे में पेरियार का मानना था कि महिलाओं के पास अपना जीवनसाथी चुनने की आज़ादी होनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि महिलाओं को घर के कामों और बच्चों की परवरिश की ज़िम्मेदारी अकेले उठाने से मुक्ति दी जानी चाहिए और यह पूरी तरह महिलाओं का फैसला होना चाहिए कि वे बच्चे चाहती भी हैं या नहीं। वह यह भी मानते थे कि गर्भनिरोधक का इस्तेमाल महिलाओं को उनके जीवन पर अधिकार और स्वतंत्रता देने का एक ज़रिया है।

 

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