FII Hindi is now on Telegram

फेमिनिज़म इन इंडिया अपने बेहतरीन लेखकों में से एक लेखक को हर महीने उनके योगदान का आभार जताने के लिए फीचर करता है। लेखकों के योगदान के बिना फेमिनिज़म इन इंडिया का सफ़र अधूरा होता। नवंबर की फीचर्ड राइटर ऑफ द मंथ हैं गायत्री यादव। ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य, सामाजिक, राजनीतिक मुद्दों से लेकर छात्र राजनीति, लैंगिक समानता, नारीवाद, स्वास्थ्य के मुद्दों पर लिखने वाली गायत्री ने हमारे लिए कई मुद्दों लेख लिखे हैं। मिर्ज़ापुर सीज़न 2 : स्त्री द्वेष और हिंसा का कॉकटेल परोसती वेब सीरीज़, ख़ास बात : सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में सक्रिय रहीं स्टूडेंट एक्टिविस्ट चंदा यादव, राष्ट्रीय महिला किसान दिवस’ – महिलाओं के पास क्यों नही है ज़मीन का मालिकाना हक़ उनके कुछ बेहतरीन लेख में शामिल हैं।

फेमिनिज़म इन इंडिया: अपने बारे में हमें बताएं और आप क्या करती हैं?

गायत्री: मैं उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के एक गांव से हूं। मेरे माता-पिता किसान हैं। फ़िलहाल, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में बीए थर्ड ईयर हिस्ट्री पढ़ रही हूं।

फेमिनिज़म इन इंडिया: आप फेमिनिज़म इन इंडिया से बतौर लेखक कैसे जुड़ी?

Become an FII Member

गायत्री: विश्वविद्यालय आकर मैं ‘जेंडर इशूज़’ के बारे में लगातार पढ़ती रही, इसी क्रम में ‘फेमिनिज़म’ से अवगत हुई। बाद में, किसी मुद्दे पर रिसर्च करते हुए मुझे फेमिनिज़म इन इंडिया के बारे में पता चला, फिर तो मैं इसकी नियमित पाठक बन गई। बाद में मैंने इसके इंटर्नशिप प्रोग्राम के बारे में पढ़ा और इस तरह मैं फेमिनिज़म इन इंडिया से जुड़ गई।

फेमिनिज़म इन इंडिया: आप कब और कैसे एक नारीवादी बनीं? नारीवाद से जुड़े कौन से मुद्दे आपके बेहद करीब हैं?

गायत्री: मुझे लगता है, मैं नारीवादी बनने की प्रक्रिया में हूं। फिलहाल मैं पूरी तरह से अपने आप को नारीवादी नहीं मानती क्योंकि ग्रो करने की प्रक्रिया में समाज से बहुत सारे इनबिल्ट पितृसत्तात्मक तत्व मेरे व्यवहार में सम्मिलित हुए हैं, जिन्हें अभी तक कि शिक्षा और ‘एक्सपोज़र’ में पूरी तरह से काउंटर नहीं किया जा सका था, हालांकि विभिन्न माध्यमों से जुड़कर और नारीवादी साहित्य पढ़ते हुए मैंने बहुत हद तक समस्या चिन्हित कर लिया है। मैं अपने आप को इन्टरसेक्शनल नारीवाद के ज़्यादा क़रीब पाती हूं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के नाते मेरा प्रयास है कि गांवों तक लैंगिक मुद्दों पर बातचीत व सहजता पैदा करने की दिशा में काम किया जाए और अलग-अलग स्तरों पर मौजूद विभिन्न पहचानों के साथ समान व्यवहार किया जाए।

फेमिनिज़म इन इंडिया: हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित आपके लेखों में से कौन सा लेख आपको सबसे अधिक पसंद है?

गायत्री: राष्ट्रीय महिला किसान दिवस’ – महिलाओं के पास क्यों नही है ज़मीन का मालिकाना हक़ मेरे पसंदीदा लेखों में से एक है।ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के नाते मैंने हमेशा अपनी मां को खेतों में काम करते देखा है, जबकि ज़मीन उनके नाम नहीं है। न ही उनके मायके की ज़मीन पर उनका अधिकार। यह स्थिति मेरे गांव की सभी महिलाओं के साथ है। इसलिए मुझे यह लेख पसंद है क्योंकि इसके माध्यम से मैं आंकड़े जमाकर के इस अंतर को देख पा रही हूं।

फेमिनिज़म इन इंडिया: जब आप नारीवादी मुद्दों, जेंडर, सामाजिक न्याय पर नहीं लिख रहे होते तब आप क्या करती हैं?

गायत्री: मुझे साहित्य और इतिहास में दिलचस्पी है। मैं यूनिवर्सिटी स्तर पर डिबेट्स में भी भाग लेती हूं।

फेमिनिज़म इन इंडिया: आपको फेमिनिज़म इन इंडिया और हमारे काम के बारे में क्या पसंद है? आप हमसे और किन-किन चीज़ों की उम्मीद करती हैं?

मेरे अपने अनुभव के लिहाज़ से फेमिनिज़्म इन इंडिया ने भारत में ‘नारीवाद’ पर एक अलग तरह से बातचीत करना शुरू की है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो हिंदी में भी नारीवाद पर बात कर रहा है, यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण बात थी। आमतौर पर इस तरह के मुद्दे अंग्रेज़ी भाषी होते हैं, जिससे असल समस्या से जूझ रहे लोग अपने आप को जोड़ नहीं पाते। दूसरी बात, नारीवादी स्पेस में एक इंटर्न के रूप में काम करना मेरे लिए काफ़ी सहज रहा। फेमिनिज़म इन इंडिया से मेरी उम्मीद है कि ग्रामीण क्षेत्रों में साल में कम से कम एक वर्कशॉप आयोजित की जाए जिससे पिछड़े इलाके के लोगों को लैंगिक रूप से संवेदनशील बनाया जाए तथा महिलाओं को उनके अधिकारों और शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की दिशा में जानकारी दी जाए।


फेमिनिज़म इन इंडिया गायत्री का उनके योगदान और उनके बेहतरीन लेखन के लिए आभार व्यक्त करता है। हमें बेहद खुशी है कि वह हमारी लेखकों में से एक हैं। आप गायत्री को फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर फॉलो कर सकते हैं।

Follow FII channels on Youtube and Telegram for latest updates.

नारीवादी मीडिया को ज़रूरत है नारीवादी साथियों की

हमारा प्रीमियम कॉन्टेंट और ख़ास ऑफर्स पाएं और हमारा साथ दें ताकि हम एक स्वतंत्र संस्थान के तौर पर अपना काम जारी रख सकें।

फेमिनिज़म इन इंडिया के सदस्य बनें

अपना प्लान चुनें

Leave a Reply