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इक्वैलिटी नाउ और स्वाभिमान सोसाइटी की रिपोर्ट: ‘न्याय से वंचित: यौन हिंसा और इंटरसेक्शनल भेदभाव, हरियाणा में दलित लड़कियों और महिलाओं तक न्याय तक पहुंचने में आने वाली बाधाएं ‘ हरियाणा में यौन हिंसा की दलित सर्वाइर्स न्याय पाने की प्रक्रिया में जिन बाधाओं का सामना करती हैं उसका विश्लेषण करती है। यह रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा में यौन हिंसा का इस्तेमाल दबंग जाति के पुरुषों द्वारा दलित महिलाओं और लड़कियों के उत्पीड़न के लिए किया जाता है। दलित महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा की दर बेहद अधिक है, जबकि आरोपियों को सज़ा दिलवाने की दर बेहद कम। साथ ही समुदाय न्याय तक पहुंचने में एक बाधा की भूमिका निभाता है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि सर्वाइवर्स के लिए समर्थन सेवाओं की कमी है और उन्हें अनुचित मेडिकल प्रक्रियाओं से भी गुज़रना पड़ता है। साथ ही इन सर्वाइवर्स के लिए न्याय पाने की प्रक्रिया के दौरान कई बाधाएं मौजूद होती हैं और दलित महिलाओं और लड़कियों को दबंग जाति के पुरुषों द्वारा ख़ासतौर पर निशाना बनाया जाता है। इस अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर हमने हरियाणा में बढ़ती हिंसा और उसके समाधान के मुद्दे पर बात की जातिगत हिंसा और भेदभाव के ख़िलाफ काम कर रही मनीषा मशाल से।

इस अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर हमने हरियाणा में बढ़ती हिंसा, उसके समाधान और इस हिंसा को खत्म कैसे किया जाए, इन मुद्दों पर बात की स्वाभिमान सोसाइटी की संस्थापक मनीषा मशाल से। तो देखिए इस वीडियो में क्या कहना है मनीषा मशाल का इन मुद्दों पर

यौन हिंसा के सर्वाइवर्स दलितों के लिए न्याय तक पहुँचने की बाधाओं के कारण बहुत कम संभावना है कि यौन हिंसा के अपराधियों पर मुकदमा चलाया जाएगा या उन्हें दोषी ठहराया जाएगा। इस असुरक्षा को दूर करने के लिए, हरियाणा सरकार को जाति आधारित यौन हिंसा के मामलों में अपनी प्रतिक्रिया में सुधार करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकार को यह कदम उठाने चाहिए:

– पुलिस की जवाबदेही और प्रभावी पीड़ित और गवाह संरक्षण का प्रावधान।

– खाप पंचायतों पर प्रतिबंध लगाने सहित यौन हिंसा के मामलों में सामुदायिक हस्तक्षेप पर अंकुश लगाना।

– यौन हिंसा की रोकथाम और प्रतिक्रिया कार्यक्रमों के लिए मौजूदा धनराशि का पुनर्विकास और उपयोग।

– जाति आधारित अल्पसंख्यकों को अत्याचार और भेदभाव से बचाने के उद्देश्य से कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन।

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