FII is now on Telegram
4 mins read

पूरी दुनिया में पुरुष वर्चस्व का बोलबाला होने के बावजूद ऐसे समुदाय भी हमारे बीच मौजूद हैं जो पितृसत्तात्मक व्यवस्था के लिए एक चुनौती के समान हैं। वैश्विक स्तर कई ऐसे समुदाय हैं जहां सारे अधिकार औरतों के पास मौजूद हैं। जहां समाज में स्त्रियों की परंपरा के माध्यम से परिवार चलाया जाता है। हम आज कुछ ऐसे समुदायों की चर्चा करेंगे जहां परिवार की मुखिया भी महिला होती है, खानदान की पहचान भी महिला होती है। वैश्विक स्तर पर आज भी मौजूद स्त्री प्रधान समाज अपने आप में एक अनूठा उदाहरण है क्योंकि आज का आधुनिक विश्व पुरुष प्रधान संस्कृति से घिरा हुआ है। यहां राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक लगभग हर पहलू में पुरुष वर्चस्व को वरीयता दी जाती है इसके बावजूद ऐसे समुदायों का अभी भी बने रहना समाज को एक बड़ी सीख भी देता है।

अक्सर जनजातीय समुदायों को पिछड़ी नज़रों से देखा जाता है क्योंकि वे, उनका रहन-सहन, मुख्यधारा की दुनिया में रह रहे लोगों से बिल्कुल अलग होती है। उनकी सोच तकनीक में नहीं बल्कि संस्कृति और प्रकृति पर आधारित होती है। इन समुदायों में ऐसी बहुत सी खूबियां है जिससे सभी को सीख लेनी चाहिए। पर्यावरण का सरंक्षण, संस्कृति को बनाए रखने की ललक, अपनी भाषा को महत्व देना, सभ्यता की बहुत सारी ऐसी विशेषताएं जो आज के समाज में लुप्त हो चुकी हैं।

और पढ़ें : जानें : महिला लीडरशीप की ज़रूरत और इसके 6 फ़ायदे

मिनांगकबाऊ समुदाय (इंडोनेशिया)

मिनांगकबाऊ समुदाय, तस्वीर साभार: Town and Country

स्त्री प्रधान समाज का पहला उदाहरण है इंडोनेशिया का मिनांगकबाऊ समुदाय। यह दुनिया का सबसे बड़ा मातृसत्तात्मक समाज माना जाता है। यहां पुरूष शादी के बाद ससुराल जाते हैं। पैतृक धन-संपत्ति मां से बेटियों को दी जाती है और बच्चों को पिता के नाम के बजाय मां का नाम मिलता है। सभी प्रकार के निर्णयों में महिलाओं की ही अहम भूमिका होती है और परिवार से जुड़े विवादों का निपटारा भी महिलाएं ही करती है। इस समुदाय में मां का दर्जा सबसे अहम माना जाता है।

खासी समुदाय (भारत, मेघालय)

खासी समुदाय, तस्वीर साभार: DW

इस सूची में दूसरा स्त्री प्रधान/मातृवंशी समुदाय भारत से है जिसकी जड़ें पूर्वोत्तर के मेघालय राज्य में खासी समुदाय से जुड़ी है। खासी एक बेहद ही शांति प्रिय समुदाय है। इनकी मातृ भाषा ही खासी है। इस समाज की सबसे खास चीज है इस जनजातीय समुदाय की मातृवंशी व्यवस्था, यानी यहां सर्वोपरि मां होती हैं। बच्चों का उपनाम मां के नाम पर होता है। यहां संपत्ति का अधिकार महिला को ही मिलता है। खासी समुदाय में अरेंज्ड मैरिज को नहीं माना जाता और तलाक के मामलों में महिलाओं को पूरी आजादी होती है क्योंकि उसकी पसंद पर किसी तरह के सवाल खड़े नहीं किए जा सकते हैं। इस समुदाय में महिलाएं नहीं बल्कि पुरुष शादी के बाद अपनी पत्नी के घर आते हैं और पूरा जीवन अपनी सास के घर में ही बिताते हैं। हालांकि समय के साथ इस समुदाय की परंपराओं में कई बदलाव भी आए हैं।

उमोजा गांव (केन्या)

गांव उमोजा की एक तस्वीर, तस्वीर साभार: The Guardian

तीसरा सबसे चर्चित समुदाय अफ्रीकी देश के उत्तरी केन्या में संबुरु काउंटी में स्थित एक गांव उमोजा है जो आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
दरअसल इस गांव की शुरुआत 15 रेप सर्रवाइवर महिलाओं ने की थी जिन्होंने साल 1990 में इस गांव का निर्माण किया, लेकिन बाद में यहां पर बाल विवाह, खतना प्रथा, घरेलू हिंसा से पीड़ित औरतें भी आकर रहने लगी। यहां रह रही औरतें खाने, कपड़े और घर के लिए नियमित आय की व्यवस्था खुद ही करती हैं। इस गांव में पुरुष प्रवेश नहीं कर सकते क्योंकि यहां रह रही महिलाएं समाज के पितृसत्तामक वर्ग से पीड़ित थी और उनके जीवन का एकमात्र सहारा यह उमोजा है जहां वे सुख शांति से अपना जीवन व्यतीत कर सकती है। इसके अलावा पर्यटक मामूली फीस देकर उमोजा गांव की सैर कर सकते हैं।

मोस्यू समुदाय (चीन)

मोस्‍यू समुदाय, तस्वीर साभार: The Diplomat

चीन और तिब्‍बत के कुछ इलाकों में रहने वाले मोस्‍यू समुदाय में घर से लेकर व्यवसाय तक के सारे फैसले घर की मुखिया यानी नानी या दादी लेती हैं। इस समुदाय में पुरुषों की भूमिका सिर्फ बेहद सीमित होती है जो कि महिलाओं के शासन वाले समाज को बढ़ाना के लिए होती हैं। यहां बच्‍चा पैदा करने वाली महिलाओं के लिए प्राइवेट रुम बनाए गए होते हैं। मोस्‍यू महिलाओं को यह तक नहीं मालूम होता है कि उसके बच्‍चों का पिता कौन हैं, इस समुदाय में बच्‍चे अपनी मां के नाम से जाने जाते हैं। जानवरों की देखभाल का काम पुरुषों की ज़िम्मेदारी मानी जाती है। द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोस्‍यू समाज में पिता या पति जैसे शब्दों की कोई जगह नहीं होती।

बिब्री समुदाय (कोस्टा रिका)

बिब्री समुदाय, तस्वीर साभार: The Independent

ब्रिब्री भी एक जनजातीय समुदाय है जो कोस्टा रिका और पनामा के क्षेत्रों में निवास करता है। केवल महिलाएं ही ब्रिब्री के बीच भूमि विरासत में ले सकती हैं और समारोहों में इस्तेमाल के लिए अनुष्ठान के तौर पर कोको तैयार कर सकती हैं। इस समुदाय में स्त्रियों की वरीयता का मूल एक किंवदंती से जुड़ा हुआ है जिसमें कहा गया था कि एक महिला इतिहास में सिबू नाम के एक बिलारी देवता के कैकोव पेड़ में बदल गई थी। यहीं कारण है कि केवल महिलाएं ही पवित्र कोको पेय को तैयार कर सकती हैं। साथ ही महिलाओं के पास ही अपनी संपत्ति को अपने बच्चों को देने का अधिकार होता है।

और पढ़ें : महिला आरक्षण बिल : राजनीति में महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व की जंग का अंत कब?


Support us

Leave a Reply