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कमर में रिवॉल्वर, लड़कों के कपड़े, ऊनी टोपी और बूट्स इनकी पोशाक था। अपने काम के प्रति निष्ठा, बेबाक और निडर स्वभाव इनके व्यक्तित्व की ख़ास बात थी। यह कहानी है अमरीका की स्टार रूट मेल कैरियर, पहली ब्लैक महिला मैरी फील्ड्स की। जहां उस समय ब्लैक महिलाओं को दुनिया में कहीं भी केवल नाम की स्वतंत्रता दी गई थी, मैरी फील्ड्स ज्यादातर पुरुषों से भी कहीं अधिक स्वतंत्रता का आनंद लेती थी। मैरी पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी शर्तों को न मानने वाली महिला थी।मैरी फील्ड्स का जन्म साल 1832 में हिकमैन कंट्री, टेनेसी अमेरिका में हुआ था। वह दौर दास-प्रथा का दौर था। साल 1865 में अमरीका के ब्लैक नागरिकों की गुलामी को गैर-कानूनी घोषित करने के बाद मैरी फील्ड्स आज़ाद हो पाई। उस समय मैरी जज एडमंड ड्यूने के घर में काम किया करती थी। जब साल 1883 में ड्यूने की पत्नी जोसेफिन की मृत्यु हुई, तो वह परिवार के पांच बच्चों को ओहियो के टोलेडो में उनकी चाची, मदर मैरी अमेडियस के पास ले आई। मदर मैरी अमेडियस एक उर्सुलाइन कॉन्वेंट की अध्यक्ष थी। 

साल 1884 में मदर अमेडियस को कैस्केड में अमरीकी मूल की लड़कियों के लिए एक स्कूल स्थापित करने के उद्देश्य से मोंटाना क्षेत्र में भेजा गया था। वहां अमेडियस की निमोनिया से ग्रसित होने की खबर पाते ही, मैरी फील्ड्स तुरंत उनके पास मोंटाना को रवाना हो गई। इसके बाद मोंटाना से ही उनके संघर्षपूर्ण और अभूतपूर्व जीवन की शुरुआत हुई। अगले दस साल तक उन्होंने कान्वेंट के लिए सेंट पीटर्स में रहते हुए काम किया। उन्होंने समाज द्वारा पुरुषों के लिए तय किए गए कई सामाजिक काम जैसे माल ढोना, कपड़े धोना, सब्जियां उगाना, मुर्गियों को पालना और इमारतों की मरम्मत करने जैसे काम किए। मिशन में उन्होंने ट्रेन स्टेशन से आए मेहमानों को संभालने का ज़िम्मा लिया था। वह अकसर अपने यात्रियों के इंतजार में रात बिताती थी। उन्होंने कॉन्वेंट के लिए ज़रूरी सामानों की आपूर्ति का काम भी किया। सामाजिक नियम, मौसम या सड़क की स्थिति की परवाह किए बिना मैरी फील्ड्स की निरंतरता और निष्ठा से काम करना उन्हें अद्वितीय बनाता है।

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उन्होंने समाज द्वारा पुरुषों के लिए तय किए गए कई सामाजिक काम जैसे माल ढोना, कपड़े धोना, सब्जियां उगाना, मुर्गियों को पालना और इमारतों की मरम्मत करने जैसे काम किए

हालांकि कॉन्वेंट की सिस्टर्स मैरी को दैनिक काम और सेवा में भाग लेने और कैथोलिक प्रार्थना का अभ्यास करने के लिए आमंत्रित करती लेकिन उन्हें पुरुषों के लिए तय किए गए कान्वेंट के बाहरी कामों में दिलचस्पी थी। उस वक्त जहां महिलाओं को सामाजिक दायरों के अधीन रहना होता था, मैरी अपने पुरुष सहकर्मियों के साथ कदम से कदम मिलाती हुई नज़र आई। कहा जाता है कि पुरुष सहकर्मी के तरह वह कई बार उनके साथ शराब का सेवन करती, पंजे लड़ाती, विभिन्न विषयों पर चर्चा करती, हंसी-ठिठोली करती और सिगार का भी सेवन करती थी। साल 1894 में कई शिकायतें और एक पुरुष के साथ गनप्ले की घटना के बाद बिशप ने उन्हें कॉन्वेंट छोड़ने का आदेश दिया था। कॉन्वेंट की सिस्टरों की उनके पक्ष में दी गई दलीलें भी बिशप के आगे काम न आई और आखिरकार उन्हें कॉन्वेंट छोड़कर कैस्केड में बसना पड़ा। शुरुआती सालों में उन्होंने अमेडियस की मदद से भोजनालय चलाने की कोशिश की लेकिन उनकी गरीब और ज़रूरतमंदों को मुफ़्त खाना खिलाने की आदत की कारण भोजनालय को बंद करना पड़ा।

लगभग 60 वर्षों तक सभी बाधाओं को पार करने के बाद मैरी ने पास के उर्सलाइन ननों की मदद से एक ‘स्टार मार्ग’ अनुबंध हासिल किया, जो अपने मिशन के लिए उन पर निर्भर थे। इस घटना ने मैरी फील्ड्स को अमरीकी डाक सेवा (स्टार रूट मेल कैरियर) के लिए काम करने वाली पहली ब्लैक महिला बना दिया। साल 1885 में कैस्केड, मोंटाना से सेंट पीटर मिशन तक की अमरीकी मेल की डिलीवरी, स्टार मार्ग का अनुबंध मैरी फील्ड्स को मिला था। 1895 से 1899 तक और 1899 से 1903 तक उन्होंने दो चार-वर्षीय अनुबंधों के लिए अमरीकी डाक सेवा में काम किया। मैरी यहां भी अपने काम के प्रति निष्ठा और निडरता के लिए जानी गई और पूरे मोंटाना में सब की विश्वसनीय और लोकप्रिय बन गई। अपने घोड़ों और खच्चरों के साथ डाक सेवा प्रदान करती मैरी एक दिन भी अपने काम से नहीं चूकती थी। उनकी निरंतरता और भरोसेमंद होने के कारण लोगों ने उन्हें ‘स्टेजकोच’ उपनाम दिया था। यदि उनके घोड़े गहरी बर्फ पर चढ़ाई न कर पाते तो वह खुद स्नोशूज पहने बोरियों को अपने कंधों पर उठा कर मेल वितरित किया करती थीं।

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वह कैस्केड में एक सम्मानित महिला थी। हर साल उनके जन्मदिन को मनाने के लिए शहर में स्कूलों को बंद रखा जाता था। जब मोंटाना में महिलाओं पर सैलून जाने की पाबंदी लगाई गई तो कैस्केड के मेयर ने उन्हें सैलून जाने की विशेष छूट दी थी। 1903 में, 71 वर्ष की आयु में, मैरी फील्ड् स्टार रूट मेल कैरियर सेवा से सेवानिवृत्त हुई। उन्होंने कैस्केड के कई बच्चों को पालने और अपने घर से कपड़े धुलाई का काम जारी रखा। 1914 में ग्रेट फॉल्स के कोलंबस अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

उन्होंने समाज के थोते आदर्शों की परवाह नहीं की। कई मायनों में उन्होंने उस युग की महिलाओं के लिए पारंपरिक लैंगिक सीमाओं को पार किया था। उन्होंने न तो शादी की और न ही चर्च के सहारे पर निर्भर रही। उन्होंने अपना पूरा जीवन न केवल महिलाओं के साथ की गई भेदभाव के ख़िलाफ आवाज़ बुलंद की बल्कि डाक सेवा कर ‘पुरुषों की नौकरी’ की। यहां तक कि उन्होंने लोगों की परवाह किए बिना अपने शारीरिक गठन के कारण पोशाक भी वैसा ही चुनी थी। निश्चय ही मैरी फील्ड्स का नाम एक ऐसी ब्लैक महिलाओं के इतिहास में लिखा जाएगा जिन्होंने ब्लैक महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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तस्वीर साभार : History.com

कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से हिंदी में बी ए और पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद बतौर पत्रकार और शिक्षिका मैंने लम्बे समय तक काम किया है। बिहार और बंगाल के विभिन्न क्षेत्र में पले-बढ़े होने के कारण सामाजिक रूढ़िवाद, धार्मिक कट्टरपन्त, अंधविश्वास, लैंगिक और शैक्षिक असमानता जैसे कई मुद्दों को बारीकी से जान पायी हूँ। समावेशी नारीवादी विचारधारा की समर्थक, लैंगिक एवं शैक्षिक समानता ऐसे मुद्दें हैं जिनके लिए मैं निरंतर प्रयासरत हूँ।

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