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सदियों से साहित्यकारों का उद्देश्य अपनी रचना के द्वारा मनुष्य की अंतरात्मा को रौशन करना रहा है। ऐसे ही साहित्य से ग़हरा ताल्लुक रखने वाली और अपनी लेखनी से मनुष्य की अंतरात्मा को झकझोरने वाली थी एक लेखिका थी कुर्अतुल ऐन हैदर। वह न सिर्फ उर्दू की मशहूर लेखिका थी बल्कि भारतीय साहित्य में भी उनका योगदान स्मरणीय है। कुर्अतुल ऐन हैदर का जन्म 20 जनवरी 1927 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता सज्जाद हैदर यलदरम उर्दू के लेखक के साथ-साथ अलीगढ़ विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार थे। अधिकारों और आज़ाीदी के हक में वह हमेशा लिखते रहे। कुर्अतुल ऐन हैदर की मां नज़र ज़हरा उर्दू की उन पहली लेखिकाओं में शामिल थीं जिन्होंने साल 1910 में समाज सुधार पर उपन्यास लिखकर नारी की दुर्दशा का खुला रूप समाज के सामने प्रस्तुत किया था।

कुर्अतुल ऐन हैदर को लिखने की कला अपने परिवार से ही मिली थी। वह छह साल की उम्र से ही लिखना शुरू कर चुकी थी। उनकी पहली कहानी ‘बी चुहिया’ बच्चों की पत्रिका फूल में छपी थी। सन् 1945 में जब वह 17-18 साल की थी उनका पहला कहानी संकलन ‘शीशे का घर’ छप गया था। सन् 1947 में प्रकाशित उनके पहले कहानी संग्रह ‘सितारों के आगे’ को उर्दू की नई कहानी का प्रस्थान बिंदु समझा जाता है। बचपन में वह कहानियां लिखती थी फिर उपन्यास, लघु उपन्यास, सफरनामें लिखने लगी और इस तरह से उन्होंने उर्दू साहित्य में उन्होंने एक खा़स मुकाम हासिल किया। उन्हें प्यार से ऐनी आपा के नाम से जाना जाता है।

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ऐनी आपा ने जीवन भर लिखा और जमकर लिखा, 21 अगस्त, 2007 की उस तारीख तक भी, जब वह दुनिया को छोड़ चली नहीं गईं।

कुर्अतुल ऐन की प्रारंभिक शिक्षा लालबाग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश स्थित गांधी स्कूल से हुई। दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से भी अपनी शिक्षा हासिल की। पिता की मौत और देश के बंटवारे के बाद कुछ समय के लिए वह अपने भाई मुस्तफा के साथ पाकिस्तान चली गई थी। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे लंदन चली गईं। साहित्य लिखने के अलावा उन्होंने अंग्रेजी में पत्रकारिता भी की। उन्होंने स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बीबीसी लंदन में काम किया। द टेलीग्राफ में भी उन्होंने रिपोर्टर का कार्य किया और इम्प्रिंट पत्रिका में वह बतौर प्रबंध-संपादक रहीं। साथ ही वह इलस्ट्रेटेड वीकली पत्रिका से भी जुड़ी। साहित्य अकादमी में उर्दू सलाहकार बोर्ड की वे दो बार सदस्य भी रहीं। जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में वह विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहीं। इसके अलावा विज़िटिंग प्रोफेसर के रूप में कैलिफोर्निया, शिकागो और एरीज़ोना विश्वविद्यालय से भी जुड़ी रहीं। काम के सिलसिले में उन्होंने खूब घूमना-फिरना किया। आज के दौर में भी यह समाज एक हिन्दुस्तानी औरत के लिए अकेले जीना बेहद मुश्किल करता है लेकिन उस दौर में भी वह न केवल अविवाहित रहीं, बल्कि अकेली भी।

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कुर्अतुल ऐन हैदर उर्दू में लिखती और अंग्रेज़ी में पत्रकारिता भी करती थीं। उन्होंने तकरीबन बारह उपन्यास और ढेरों कहानियां लिखीं। उनकी प्रमुख कहानियां में ‘पतझड़ की आवाज, स्ट्रीट सिंगर ऑफ लखनऊ एंड अदर स्टोरीज, रोशनी की रफ्तार जैसी कहानियां शामिल हैं। उसके बाद उन्होंने हाउसिंग सोसायटी, आग का दरिया (1959), सफ़ीने- ग़मे दिल, आख़िरे- शब के हमसफर जैसे उपन्यास भी लिखें, जिसे हिंदी में अनुवादित करके निशांत के सहयात्री नाम दिया गया था। आख़िरे- शब के हमसफर उपन्यास के लिए इन्हें 1967 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1989 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी नवाजा़ गया था। उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें साल 1984 में पद्मश्री से नवाजा़ गया और साल 1989 में उन्हें पद्मभूषण से भी पुरस्कृत किया गया। आग का दरिया’ उनका सबसे चर्चित उपन्यास है। इस उपन्यास को आजादी के बाद लिखा जाने वाला सबसे बड़ा उपन्यास माना गया था। आग का दरिया एक ऐतिहासिक उपन्यास है जो चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल (4 ई. पू.) से लेकर 1947 के बंटवारे तक भारत और पाकिस्तान की कहानी सुनाता है। यह दक्षिण एशिया पर आधारित सबसे महत्वपूर्ण किताबों में से एक है। ‘आग का दरिया’ को जो लोकप्रियता मिली, वह किसी दूसरे उर्दू उपन्यास को नसीब नहीं हुई।

कुर्अतुल ऐन हैदर के लेखन ने आधुनिक उर्दू साहित्य को एक नई दिशा दी। उनकी कहानियों और रचनाओं में पूरे भारत का इतिहास और संस्कृति झांकता है। उनका लेखन लोगों को सोचने समझने पर मजबूर कर देता था। ऐनी आपा ने जीवन भर लिखा और जमकर लिखा, 21 अगस्त, 2007 की उस तारीख तक भी, जब वह दुनिया को छोड़ चली नहीं गईं। उर्दू साहित्य जगत आज तक उर्दू की इस नायाब शख्सियत को शिद्दत से याद करते हुए अपनी श्रद्धांजलि देता है।

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A very simple girl with very high aspirations. An open-eye dreamer. A girl journalist who is finding her place and stand in this society. A strong contradictor of male-dominant society. Her pen always writes what she observes from society. A word-giver to her observations.

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