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कुछ दिन पहले प्रयागराज में मेरी एक दोस्त अपने एक दोस्त (पुरुष ) के साथ शाम के 7 बजे गंगा के किनारे चाय की एक दुकान पर बैठी थी। तभी दो पुलिस वाले आकर उनसे उनका नाम और पता पूछने लगते हैं और उनसे अपने-अपने घर पर फ़ोन लगाने को कहते हैं। यह जानने के लिए कि उन्होंने जो पता पुलिस वालों को बताया वह उनके ही घर पर पता है या नहीं। साथ ही क्यों वे दोनों एक-दूसरे के साथ इस वक़्त वहां घूम रहे हैं। जब उन दोनों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और जानने कि कोशिश की कि पुलिसवाले ये सब क्यों कर रहे हैं तो पुलिस वालो ने धमकी देनी शुरू कर दी कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो वे उन दोनों को अभी पुलिस थाने ले जाएंगे और उनकी गाड़ी के नंबर से उनके घर पर नोटिस भिजवा देंगे। ज़्यादा बहस करना उचित ना समझकर उन दोनों ने पुलिसवालों की बात मान ली और इस बात को वहीं रफा-दफा कर दिया। उन पुलिसवालों का राह चलते किसी से भी से ऐसे सवाल करना किसी मायने में भी सही नहीं हैं। यह उनका अपना व्यक्तिगत मामला था उसमें किसी और कि दखलअंदाज़ी की ज़रूरत नहीं थी। लेकिन भारत में किसी का प्रेम में होना एक निजी मामला बिल्कुल नहीं होता।

भारतीय समाज हमेशा से ही अपनी संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन आज इस संस्कृति का मतलब बदल चुका है। संस्कृति की रक्षा के पर इसका दुरूपयोग किया जा रहा है। आज अक्सर समाज में हम लोगों को भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए ये कहते सुनते हैं कि लड़कियों का छोटे कपड़े पहनना, बाहर काम करना आदि हमारी भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इस रूढ़ीवादी सोच से ग्रसित लोगों ने आज समाज में प्रेम को भी अपना निशाना बनाया हुआ है। भारत में इतने वर्षों के बाद आज भी अविवाहित हो या विवाहित सभी प्रेम करने वाले लोगों को गलत नज़र से ही देखा जाता है। अगर भारतीय समाज में कोई अपनी मर्ज़ी से अपना जीवनसाथी चुनता है तो उन्हें तुच्छ और घृणा की नज़र से देखा जाता है, मानो उन्होंने कोई अपराध कर दिया हो। उन्हें समाज के ताने सुनने पड़ते हैं।

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हमारे समाज में प्रेम संबंधों के प्रति नफरत इस कदर हावी है कि अगर लड़की के घर पर उसके प्रेम संबंध के बारे में पता चलता है तो परिवार के सदस्य इसे समाज में अपनी बेइज़्ज़ती और सम्मान पर लगा दाग समझते हैं। जिसका उदाहरण हम अपने आस पास भी देखते हैं, अक्सर हम देखते हैं कि यदि कोई जोड़ा घरवालों की सहमति के साथ प्रेम विवाह करता है तो लड़की के घर वाले यह बात समाज के सामने उजागर नहीं होने देते और सभी रिश्तेदार आदि से छिपा लेते हैं। साथ ही वे इसे अरेंज्ड मैरिज ही बताते हैं क्योंकि प्रेम विवाह को यह समाज भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ किया गया एक काम समझता है। समाज में फैली ऐसी ही रुढ़ीवादी विचारधारा ‘ऑनर किलिंग’ आदि जैसे अपराधों की भी बढ़ावा देती हैं।

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भारतीय समाज हमेशा से ही अपनी संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन आज इस संस्कृति का मतलब बदल चुका है।

पर क्या ये वास्तव में भारतीय संस्कृति के खिलाफ है? जवाब है बिल्कुल नहीं। भारतीय संस्कृति प्रेम के ख़िलाफ़ नहीं करती है यह बस उन रुढ़ीवादी लोगों की अवधारणा है जो हमेशा से ही पितृसत्ता के हक में रहे हैं। किसी लड़की का अपनी मर्ज़ी से अपना साथी चुनना पितृसत्ता की नींव को हिला देता है। इसलिए लोग प्रेम विवाह के विरुद्ध कई तरह के अभियान चलाते हैं। उदाहरण के तौर पर बजरंग दल, जिनका मानना होता है कि वैलेंटाइन्स डे यानी 14 फरवरी विदेशी संस्कृति है जो युवाओं को भ्रमित कर रही और अभद्रता फैलाकर भारतीय संस्कृति पर धब्बा लगा रही है। यह दल वैलेंटाइन्स डे के दिन सार्वजनिक स्थलों, सड़क आदि पर दिखने वाले हर जोड़े को, यहां तक साथ दिखने वाले हर लड़का और लड़की को बिना जाने कि वे प्रेमी जोड़े है भी या नहीं, उनपर लाठीचार्ज और मारपीट शुरू कर देते हैं। यही नहीं भारत में प्रेम संबंधों के प्रति लोगों में नफरत फैलाने के लिये कई प्रयास किए भी जाते हैं।

भले ही आज बालिग लड़का लड़की को अपनी इच्छा अनुसार जीवनसाथी चुनने को या लिवइन रिलेशनशिप आदि को कानूनी तौर पर मान्यता दे दी गई है पर आज भी सामाजिक तौर पर इन्हें नहीं अपनाया गया है। समाज में अभी भी प्रेम के ख़िलाफ़ वही रुढ़ीवादी अवधारणाएं फैली हुईं हैजो कि भारतीय नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन करती है ।

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तस्वीर साभार : Guardian

मैं ख़ुशी वर्मा इलाहाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी की छात्रा हूं। पढ़ाई के साथ साथ मैं लेखन कार्यों में भी रुचि रखती हूं जैसे कहानियां, गज़ल, कविताएं तथा स्क्रिप्ट राइटिंग । मैं विशेष तौर पर नारीवाद तथा लैंगिक समानता जैसे विषय पर लिखना तथा इनसे जुड़े मुद्दों पर काम करना भी पसंद करती हूँ ।

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