आज FII के इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं मैरिटल रेप यानि वैवाहिक बलात्कार की। उस अपराध की जो शादी के बाद एक पति अपनी पत्नी के साथ करता है पर उसे उसकी कोई सज़ा नहीं मिलती। आइए जानते हैं कैसे? पितृसत्तात्मक मूल्यों पर आधारित शादी की संस्था के तहत हमारे देश में मैरिटल रेप आज भी कानूनी रूप से वैध है। सरकार और समाज की तरफ से दिए जाने वाला यह तर्क कि कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित कर देने से शादी और परिवार की संस्था खतरे में पड़ जाएगी एक बेतुका है। घर के बंद दरवाज़ों के पीछे होने वाला शारीरिक शोषण अपराध है, क्राइम है। सिर्फ इसलिए कि शोषणकर्ता महिला का पति है इसलिए उसे अपराधी नहीं कह सकते!! इस पर सोचने की ज़रूरत है
मैरिटल रेप भारत में एक अपराध क्यों नहीं है?
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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान
संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|
बामा : एक नारीवादी लेखिका जिनकी रचनाओं के बारे में जानना ज़रूरी है
पेरियार और बाबा साहब आबंडेकर को आदर्श मानने वाली बामा अपने लेखों से ईसाई और हिन्दू धर्म की कुरीतियों पर प्रकाश डालती हैं। जाति और लिंग से जुड़े मुद्दों को वह राजनीतिक विषय मानती हैं।
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने
पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
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लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?
गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!
नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।













































