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फेमिनिज़म इन इंडिया अपने बेहतरीन लेखकों में से एक लेखक को हर महीने उनके योगदान का आभार जताने के लिए फीचर करता है। लेखकों के योगदान के बिना फेमिनिज़म इन इंडिया का सफ़र अधूरा होता। सितंबर की फीचर्ड राइटर ऑफ द मंथ हैं पूजा राठी। पूजा ने लैंगिक हिंसा, जेंडर आधारित खबरें, जातिगत भेदभाव व शोषण, स्वास्थ्य, महिला कानून व अधिकार जैसे मुद्दों पर कई बेहतरीन लेख लिखे हैं। कन्यादान से कन्यामान : प्रगतिशीलता की चादर ओढ़ बाज़ारवाद और रूढ़िवादी परंपराओं को बढ़ावा देते ऐड, शादी के रूढ़िवादी और पितृसत्तामक ढांचे को बढ़ावा देते मैट्रिमोनियल विज्ञापन, महिलाओं के यौन-प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकार को ताक पर रखती ‘दो बच्चों की नीति’ उनके कुछ बेहतरीन लेख में शामिल हैं।

फेमिनिज़म इन इंडिया : अपने बारे में हमें बताएं और आप क्या करती हैं? 

पूजा : खुद के बारे में बताने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। खुद को व्यस्त रखना पंसद है। छोटी-छोटी चीजों में खुश हो जाती हूं। खुद को एक ज़िम्मेदार नागरिक और बेहतर इंसान बना पाऊ इस कोशिश में लगी हुई हूं, बाकी संघर्ष चालू है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप फेमिनिज़म इन इंडिया से बतौर लेखक कैसे जुड़ीं? 

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पूजा : मुझे फेमिनिज़म इन इंडिया की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली थी। धीरे-धीरे इसकी नियमित पाठक बन गई। इसी दौरान इंटर्नशिप प्रोग्राम के बारे में मालूम हुआ और आवेदन कर दिया। चयन होने के बाद से फेमिनिज़म इन इंडिया से लेखक के तौर पर जुड़ गई।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आप कब और कैसे एक नारीवादी बनीं? नारीवाद से जुड़े कौन से मुद्दे आपके बेहद करीब हैं?

पूजा : सच तो यह है कि स्कूल-कॉलेज के पढ़ाई होने तक मैं नारीवाद से परिचित ही नहीं थी। मैं कब नारीवादी बनी यह कहना मेरे लिए मुश्किल है लेकिन मैं आज भी समावेशी नारीवादी होने की प्रक्रिया में खुद को पाती हूं। पानी का गिलास लाने की जिम्मेदारी मेरी ही क्यों है इस सवाल को मैं बहुत पहले से पूछती थी। आज थोड़ा बहुत पढ़ने-समझने के बाद मेरे आसपास पितृसत्तात्मक रीतियों में जकड़ी कई महिलाओं को देखती हूं जो उस स्पेस में अपनी बात रख रही हैं। मेरे लिए वह नारीवाद का पहला अध्याय है। अपने रोज़ के व्यवहार में बहुत सी चीजें अनलर्न करना चाहती हूं। खुद को बेहतर करने की कोशिश में जाति-धर्म, जेंडर और राजनीति वे पहलू हैं जिन्हें मैं और अधिक संवेदनशीलता से समझना चाहती हूं।

फेमिनिज़म इन इंडिया : हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित आपके लेखों में से कौन सा लेख आपको सबसे अधिक पसंद है?

पूजा : मैंने अपने इस पड़ाव में खबर आधारित लेख ज्यादा लिखे हैं। आंकड़ो के साथ अनपे अनुभव से इकट्ठा विचार भी सामने रखे हैं। यहां लिखने के दौरान घटनाओं को देखने का तरीका बदला है। खिलाड़ियों को ‘बेटी’ कहने वाला पितृसत्तात्मक समाज उनके संघर्ष पर क्यो चुप हो जाता है? यह लेख कई कारणों से मेरा पंसदीदा लेख है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : जब आप नारीवादी मुद्दों, जेंडर, सामाजिक न्याय पर नहीं लिख रहे होते तब आप क्या करती हैं?

पूजा : मैंने एक लंबी टू-डू लिस्ट बनाई हुई है, वक्त मिलते ही उसे पूरा करने लग जाती हूं। बागवानी और कला से जुड़ा काम मेरा सबसे पंसदीदा काम है।

फेमिनिज़म इन इंडिया : आपको फेमिनिज़म इन इंडिया और हमारे काम के बारे में क्या पसंद है? आप हमसे और किन-किन चीज़ों की उम्मीद करती हैं?

पूजा : मेरे अपने अनुभव से फेमिनिज़म इन इंडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो समावेशी नारीवाद के नजरिये से जमीनी व प्रांरभिक विषयों पर बात कर रहा है। इसका हिंदी भाषा में होना बहुत महत्वपूर्ण है, अमूमन फेमिनिज़म जैसे वेिषय अंग्रेजी में उपलब्ध होते है। हिंदी के पाठकों को समावेशी नारीवाद की जानकारी उनकी भाषा में मिलना बहुत ज्ञानवर्धक है। भाषा और विषय को लेकर जो संवेदनशीलता मैंने यहां सीखी है वह मेरी एक निजी कमाई भी है। मैं ग्रामीण क्षेत्र से आती हूं और फेमिनिज़म इन इंडिया की पहुंच छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्र में व्यापक तौर पर देखना चाहती हूं। मुझे लगता है ऐसे क्षेत्रों में समय-समय पर इससे संबधित कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए।


(फेमिनिज़म इन इंडिया पूजा का उनके योगदान और उनके बेहतरीन लेखन के लिए आभार व्यक्त करता है। हमें बेहद खुशी है कि वह हमारी लेखकों में से एक हैं। आप पूजा को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फॉलो कर सकते हैं.)

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