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तस्वीर साभार : preen.ph
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पितृसत्ता में सुंदरता को महिलाओं के लिए सबसे ज़रूरी गुण माना जाता है और सुंदरता का मानक बक़ायदा पितृसत्ता ही तय करती है, जिसमें गोरी रंगत और छरहरी काया जैसे तमाम गुण सदियों से बताए और बक़ायदा जमाए गए। वक्त बदला लेकिन पितृसत्ता का मूल टस से मस नहीं हुआ। आधुनिकता के इस दौर में पितृसत्ता बाज़ार के रूप हर दिन अपने आप को अपडेट कर महिलाओं पर अपना वर्चस्व क़ायम किए हुए है, जिसका उदाहरण है – वजाइना की स्किन को गोरी करने, इसकी स्किन को टाइट करने और इसे हमेशा सुगंधित रखने के नामपर बेचे जानी वाली ढ़ेरों क्रीम, जेल और ट्रीटमेंट। जी हाँ, जब भी एक परफ़ेक्ट वजाइना की कल्पना की जाती है तो इसके लिए – वजाइना की गोरी, टाइट और ख़ुशबूदार स्किन को दर्शाया जाता है।  

इसलिए वजाइना की डार्क स्किन के लिए बाज़ार में इसके लिए वाइटनिंग क्रीम उपलब्ध है। वजाइना को हमेशा सुगंधित रखने के लिए बाज़ार में इसके लिए ख़ुशबू वाले ख़ास स्प्रे भी मौजूद है। इतना ही नहीं, वजाइना की स्किन को हमेशा टाइट रखने के लिए बाज़ार में क्रीम भी उपलब्ध है।

पर आपको बताऊँ! वास्तव में हमारे वजाइना को इनमें से किसी भी प्रॉडक्ट की ज़रूरत नहीं है। पर हां हम ज़रूर इस पितृसत्ता के मज़बूत एजेंट बाज़ार का शिकार हो चुके है जिसकी वजह से  हम हर प्राकृतिक चीजों को बदलकर अपने अनुसार करना चाहते है। बाज़ार हमें इंटिमेट हाइजीन के नामपर ढ़ेरों सामान बेचता है, अलग-अलग तर्कों से इसे हमारे इंटिमेट एरिया के लिए ज़रूरी बताता है। पर ये इंटिमेट हाइजीन के नामपर बिकने वाले प्रॉडक्ट्स की ज़रूरत क्या वाक़ई हमें है? ये अपने आप में ज़रूरी सवाल है, पर वास्तव में इंटिमेट हाइजीन है क्या? आइए जानते है  –

इंटिमेट का हिंदी शाब्दिक अर्थ है – अंतरंग। पर जब हम इंटिमेट हाइजीन की बात करते है तो यहाँ इंटिमेट का मतलब गुप्तांगों से है। शाब्दिक अर्थ में इंटिमेट हाइजीन का मतलब है ‘गुप्तांगों की स्वच्छता।‘ इंटिमेट हाइजीन, पर्सनल हाइजीन का एक ज़रूरी हिस्सा इंटिमेट हाइजीन है।इसलिए  इंटिमेट हाइजीन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, जिससे हम न केवल वे क्लीन और फ़्रेश महसूस करें बल्कि उन्हें किसी भी तरह के इंटिमेट इंफ़ेक्शन या  यूटीआई जैसी गंभीर समस्याओं का सामना न करना पड़े।

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पितृसत्ता महिलाओं को पुरुषों के उपभोग की वस्तु मानती है, इसलिए इसने बक़ायदा सुंदरता की परिभाषा पुरुषों की ज़रूरतों के अनुसार गढ़ी है। फिर बात चाहे वजाइना की गोरी स्किन की हो या फिर वजाइना की टाइट स्किन की, ये विचार सिर्फ़ पुरुषों के यौन सुख को केंद्रित है जिसमें महिलाओं की भूमिका उनकी यौन संतुष्टि की एक वस्तु मात्र है।

इंटिमेट हाइजीन के नामपर आज बाज़ार में ढ़ेरों प्रॉडक्ट उपलब्ध है। पर क्या वाक़ई में ये काम करते है और क्या इंटिमेट हाइजीन इनके बिना संभव नहीं? तो आइए अब बात करते है इंटिमेट हाइजीन के प्रॉडक्ट्स और इनके जुड़े मिथ्य के बारे में –

मिथ्य : इंटिमेट वाश प्रॉडक्ट वजाइना को क्लीन करते हैं।

अक्सर एड में ये दिखाया जाता है कि इंटिमेट वाश प्रॉडक्ट वजाइना को क्लीन करते है, इसलिए ये वजाइना की सफ़ाई के लिए ये ज़रूरी है, जो पूरी तरह ग़लत है। वास्तव में हमारा वजाइना सेल्फ़ क्लिनिंग करता है, जिससे वजाइना का पीएच लेवल मेंटेंन रहता है। ये उन सभी अच्छे बैक्टीरिया को हमारे वजाइना में बनाए रखता है जो वजाइना को हेल्दी और क्लीन बनाए रखने के लिए ज़रूरी है। पर हां कई बार ये इंटिमेट वाश वजाइना के इस नेचिरल क्लीनिंग सिस्टम को प्रभावित ज़रूर करता है। तो इसलिए आपको अपनी इंटिमेट हाइजीन के लिए किसी भी तरीक़े से इंटिमेट वाश का इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं है।

और पढ़ें : वजाइना को वॉश के बाज़ार से ज़्यादा स्वतंत्र छोड़ने की ज़रूरत है

मिथ्य : वजाइना की डार्क स्किन बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

रंगभेदी सोच के चलते कई बार हमें लगता है कि वजाइना का रंग भी गोरा होना चाहिए पर आपको बताऊँ वजाइना की डार्क स्किन बिल्कुल नॉर्मल है और इसके कुछ भी बुरा नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कई बार वजाइना की ये डार्क स्किन प्यूबर्टी की वजह से होती है। स्किन केयर एक्स्पर्ट का भी मानना है कि आपको किसी भी तरह के लाइटनिंग या ब्राइटनिंग प्रॉडक्ट की ज़रूरत नहीं है। कई बार एडल्ट फ़िल्म और टीवी एड  के ज़रिए गोरी स्किन वाले वजाइना को प्रमोट किया जाता है, जिसके लिए कई बार ब्लीच करने की सलाह भी जाती है, जो फ़ायदेमंद कितना होगा ये कह पाना मुश्किल है, लेकिन ये आपकी स्किन को नुक़सान ज़रूर पहुँचा सकता है।

मिथ्य : वजाइना टाइटनिंग क्रीम से हमेशा वर्जिन फ़ील करना।

अपने स्किन को हमेशा एक जैसा रखना और इसे एक जैसा बनाए रखने के लिए अलग-अलग प्रॉडक्ट का इस्तेमाल करना ख़तरनाक हो सकता है। पर जब हम वजाइना को टाइट करने की बात करते है या वर्जिन फ़ील करने की बात करते है तो ये सिर्फ़ मेल प्लेजर को केंद्रित विचार है, जिसमें महिला को किसी प्रॉडक्ट की तरह देखा जाता है। अपने शरीर को किसी दूसरे के लिए बेहतर बनाना और उसके लिए अलग-अलग प्रॉडक्ट या प्रोसेस का इस्तेमाल करना कहीं से भी सही नहीं है, क्योंकि एक समय के बाद ये न केवल हमारे शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जोखिमपूर्ण हो जाता है।

पितृसत्ता महिलाओं को पुरुषों के उपभोग की वस्तु मानती है, इसलिए इसने बक़ायदा सुंदरता की परिभाषा पुरुषों की ज़रूरतों के अनुसार गढ़ी है। फिर बात चाहे वजाइना की गोरी स्किन की हो या फिर वजाइना की टाइट स्किन की, ये विचार सिर्फ़ पुरुषों के यौन सुख को केंद्रित है जिसमें महिलाओं की भूमिका उनकी यौन संतुष्टि की एक वस्तु मात्र है। समय के साथ अपडेट होते पितृसत्ता के रंग और बाज़ार में घुलते इसके रंग को हमें पहचानना बेहद ज़रूरी है।

इंटिमेट हाइजीन के नामपर फैले बाज़ार को हमें समझना होगा नहीं तो ये न केवल हमें शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी बुरी तरह प्रभावित करेगा। इसके लिए ज़रूरी है सबसे पहले हम खुद अपने शरीर से प्यार करना सीखें और इसपर प्रॉडक्ट का इक्स्पेरिमेंट करना बंद करे। और ये तय करें कि कोई भी दूसरा ये तय नहीं करेगा कि आपका इंटिमेट एरिया कैसा होना चाहिए, कैसा दिखना चाहिए और कैसा महसूस होना चाहिए, चाहे वो आपका पार्ट्नर हो या बाज़ार। ध्यान रखें कि आपके शरीर पर सिर्फ़ आपकी स्वायतता है। इसलिए रंगभेदी पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा देने की बजाय अपने शरीर को स्वीकार करें और इसका सम्मान करें।   

और पढ़ें : वजाइना के हाइजीन से जुड़े प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों का भ्रमजाल


तस्वीर साभार : preen.ph

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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