वजाइनल हाइजीन से जुड़े प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों का भ्रमजाल
वजाइनल हाइजीन से जुड़े प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों का भ्रमजाल
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महिला के शरीर की तथाकथित खूबसूरती और स्वच्छता के नाम पर उत्पादों का एक विशाल बाज़ार बन गया है। टीवी, ई-कॉमर्स वेबसाइट और अख़बारों में छाए इस तरह के विज्ञापन महिलाओं के गोरे रंग, अंडरआर्म्स की त्वचा में निखार से लेकर यौन रिश्तों के सुधार और उसे खुशनुमा बनाने तक पहुंच गए हैं। कंपनियों के करोड़ो रुपये के फलते-फूलते कारोबार में ये प्रॉडक्ट्स महिला स्वास्थ्य के लिए नई समस्या बनकर सामने आ रहे हैं। त्वचा के सौंदर्य के साथ अब बाज़ार में वजाइना की सुंदरता के लिए भी बहुत से उत्पाद मौजूद हैं। इसकी मांग पूरी दुनिया की महिलाओं में बढ़ती जा रही है। वजाइना की स्वच्छता और उसकी सुंदरता को बनाने के लिए वजाइनल वॉश, वजाइन स्प्रे, वजाइना वाइप, वाइटनिंग क्रीम और वजाइना डियो जैसे बहुत से प्रॉडक्ट्स उपलब्ध हैं।

फीमेल जेनिटल ऑर्गन की ज़रूरत और स्वास्थ्य के नाम पर मौजूद इन प्रॉडक्ट्स के प्रचार को इतना विश्वसनीय बनाकर दिखाया जाता है कि लोग बिना किसी डॉक्टरी सलाह के प्रचार को ही असली उपचार मान बैठते हैं। रसायनिक क्रिया से बने वजाइनल वॉश और ब्यूटी प्रॉडक्ट के इस्तेमाल से वजाइना के प्राकृतिक रूप को बहुत हानि पहुंचाते हैं। इससे वजाइना के पीएच लेवल पर असर पड़ता है जिससे यूरीन इन्फेक्शन, कैंसर, यूटीआई जैसी बीमारियां हो जाती हैं। वजाइना हेल्थ हाइजीन के नाम पर चल रहे बाज़ार से इतर वजाइना शरीर का ऐसा अंग है जो अपनी सफाई खुद करता है। वजाइना प्राकृतिक रूप से निर्मित बैक्टीरिया से अपनी क्लीनिंग का काम खुद करता है। इसलिए उसे सफाई के लिए किसी भी तरह के साबुन, वॉश की तो बिल्कुल जरूरत नहीं होती है।

ऐसे उत्पाद वजाइना को कीटाणुओं से बचाने के लिए पीएच लेवन बनाए रखने, खुशबूदार बनाने और चमकदार बनाने की सिर्फ बात करते हैं। इसमें मेडिकल टर्मलॉजी के साथ स्वास्थ्य के मुद्दे को एक कारोबार बनाया गया है जिसमें वजाइना को ताजगी से भरपूर और गंध से दूर रखने के नाम पर लोगों को फंसाया जा रहा है।

आमतौर पर वजाइना को एक ‘सेल्फ क्लीनिंग ओवन’ की तरह कहा गया है। इसमें बहुत से अच्छे बैक्टीरिया मौजूद हैं जो इसकी सफाई खुद ही करते हैं। साथ ही कुछ ऐसे ग्लैंड्स है जो आंतरिक अंगों की सफाई, डेड सेल्स और अवांछित कणों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह जानना बहुत ज़रूरी है कि वजाइना वॉश कोई मेडिकल उत्पाद नहीं है। ऐसे उत्पाद वजाइना को कीटाणुओं से बचाने के लिए पीएच लेवन बनाए रखने, खुशबूदार बनाने और चमकदार बनाने की सिर्फ बात करते हैं। इसमें मेडिकल टर्मलॉजी के साथ स्वास्थ्य के मुद्दे को एक कारोबार बनाया गया है जिसमें वजाइना को ताजगी से भरपूर और गंध से दूर रखने के नाम पर लोगों को फंसाया जा रहा है।

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महिला शरीर और मार्केटिंग

‘द प्रोडक्ट इज वैरी गुड’, हाई ली रिकमेंड, ग्रेट प्रॉडक्ट फॉर वुमन।’ ये लोकप्रिय ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर उपलब्ध वजाइना ‘टाइटनिंग और ब्राइटिंग’ क्रीम की कुछ समीक्षाएं हैं। कुछ प्रमुख प्रॉडक्ट के बारे में इंटरनेट पर वजाइना की खूबसूरती को लेकर ऐसे बहुत विचार मिलते हैं जो इनकी खरीद का भी एक कारण बनते हैं। इन वेबसाइट्स पर इंटीमेट एरिया की तथाकथित खूबसूरती और देखभाल के नाम उसको गुलाबी और चमकदार बनाने के लिए बहुत से विकल्प मौजूद हैं। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह बाजार पूरी तरह से इन रूढ़िवादी विचारों को बेचकर करके मुनाफा कमा रहा है। पितृसत्तात्मक विचारों को बल देता यह बाजार वजाइना को हर उम्र में जवान होने के दावे पेश करता है। साथ ही उत्पाद बेचने के लिए विज्ञान और स्वास्थ्य के मुद्दे को इस्तेमाल कर लोगों के अंदर उनके शरीर के प्रति एक असुरक्षा की भावना पैदा की जा रही है।

वजाइनल प्रॉडक्ट्स का इतिहास

वर्तमान में कई अरब डॉलर के वजाइना हाइजीन के कारोबार की शुरुआत 1800 के दशक में हुई थी। महिलाओं को स्वच्छता के नाम पर ‘सशक्त’ बनाने के अलावा आज यह विशाल बाजार बन गया है। 3 मार्च 1873 में अमेरिका में एक बिल पारित किया गया। यह बिल बाद में ‘द कॉम्स्टॉक ऐक्ट’ के नाम से जाना गया। इस ऐक्ट के तहत गर्भनिरोधक और ऐसी कोई भी चीज जो सेक्स से जुड़ी हुई है उसको बेचने और उनका विज्ञापन करना अवैध बना दिया गया था।

साल 1924 के आसपास जोनाइट और लाइजॉल ने अपने प्रॉडक्ट की मार्केटिंग के लिए ‘फेमिनन हाईजीन’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। यह दोनों प्रॉडक्ट लोकप्रिय घरेलू कीटाणुनाशक प्रॉडक्ट हैं। अब ये कंपनियां फेमिनन हाईजीन शब्द का इस्तेमाल कर कानूनी दांव पेंज से अपने प्रॉडक्ट दोबारा बेचना शुरू कर चुकी थी। लाइजॉल ने लोकप्रिय वजाइनल डूश ब्रांड के नाम से अपना प्रॉडक्ट बेचा गया। साल 1920 और साल 1930 के समय में ये कंपनियां अमेरिका के सभी डिपाॉर्टमेंटल स्टोर, मेडिकल स्टोर में उत्पाद बेच सकती थी। 

1950 के दशक के मध्य में हाईजीन प्रॉडक्ट के विज्ञापनों में शर्म, असुरक्षा, अयोग्यता की भावनाओं को बढ़ावा दिया गया। महिलाओं को पति के छोड़ने का डर, दोस्तों के बीच अपमान की बात कही गई।

20वीं सदी आते-आते फेमिनन हाईजीन ने नाम पर पीरियड्स के प्रति एक रूढ़िवादिता को कामय कर दिया गया। वजाइना की सुंदरता, स्वच्छता और शर्म के थीम को आधार बनाकर इन प्रॉडक्ट का प्रचार करना शुरू कर दिया गया। इन विज्ञापनों में मेन्ट्रूशनल बॉडी की एक काल्पनिक छवि बनाई गई। 1950 के दशक के मध्य में हाईजीन प्रॉडक्ट के विज्ञापनों में शर्म, असुरक्षा, अयोग्यता की भावनाओं को बढ़ावा दिया गया। महिलाओं को पति के छोड़ने का डर, दोस्तों के बीच अपमान की बात कही गई। यहां तक कि यह भी कहा गया कि यदि हाईजीन प्रॉडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया गया तो इससे जीवन बर्बाद है।  

कॉस्मोपोलिटन में डॉ ड्वेक के अनुसार यह दुर्भाग्य है कि महिलाओं में वजाइना के बारे में असुरक्षित भावना पैदा करना सामान्य होता जा रहा है। यह एक बहुत ही जोखिम भरा विचार है। भले ही ये प्रॉडक्ट एक शीट मॉस्क या क्रीम की तरह हो लेकिन इनमें वजाइना के खिलाफ काम करने वाले तत्व हो सकते हैं। जिनमें ग्लिसरीन जो इन्फेक्शन पैदा करने का काम करती है। खुशबू की तरह प्रयोग होने वाले प्रॉडक्ट में खुजली और जलन पैदा करने वाले तत्व हो सकते हैं। पेट्रोलियम जैसे तत्व सीधे वजाइना के पीएच लेवल को बदलकर इन्फेक्शन का कारण बन सकते है।

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विज्ञापनों के माध्यम से वजाइना को खुशबूदार बनाने पर बहुत ज्यादा जोर दिया जा रहा है। गुलाब या चमेली की खुशबू की तरह के महकाने के लिए विज्ञापनों को ऐसे प्रस्तुत किया जाता है जैसे वजाइना की स्मेल को छिपाना कितना ज़रूरी है। वजाइना को खुशबूदार बनाने के लिए बाजार में मौजूद प्रॉडक्ट पर डॉ ड्वेक का कहना है कि यदि आप वास्तव में अपनी वजाइना की गंध के बारे में चिंतित हैं, तो आपको इसके लिए अपने डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है न कि दवा की दुकान पर। यदि वजाइना से आनेवाली गंध एक बड़ी समस्या बनती जा रही है तो इसके लिए डॉक्टर की जांच की आवश्यकता है। इससे आगे उनका कहना है कि रोजमर्जा के जीवन में अपने चेहरे पर उत्पादों को लगाने से कोई भी बदलाव नहीं होते हैं तो वजाइना पर इस जादू की भी कोई उम्मीद न करें।

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वजाइना की खूबसूरती को बढ़ाने और देखभाल वाले उत्पादों का बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार फेमिनन हाइजीन प्रॉडक्ट की मॉर्केट वैल्यू 2020 में 38.9 अरब डॉलर थी, जो साल 2030 तक 68.7 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। साल 2021 से साल 2030 तक के समय में इस इंडस्ट्री में 6.1 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है।

वजाइना की देखभाल के लिए मौजूद प्रॉडक्ट विज्ञान की तकनीकी भाषा का इस्तेमाल कर प्रॉडक्ट को बेचने का काम कर रहे हैं। ये प्रॉडक्ट सुंगध रहित होने के साथ-साथ किसी प्रकार की खुजली और अन्य इंफेक्शन न होने का भी 100 प्रतिशत दावा करते नजर आते हैं। प्राकृतिक या आर्गेनिक के नाम पर भी वजाइना को साफ-सुथरा बनाने का एक बड़ा बाज़ार बनता जा रहा है। दूसरी और ब्लॉगिंग के माध्यम से भी वजाइना को खूबसूरत बनाने के लिए घरेलू उपाय के तहत अज़ीब-अज़ीब फॉर्मेलू बनाकर मध्यवर्ग की महिलाओं को नींबू, टमाटर, शहद जैसी चीजों को अपनाने के लिए कहा जा रहा है।  

यह बात स्पष्ट है कि वजाइना की देखभाल के लिए किसी तरह के वॉश, जेल, तेल और दवाई की जरूरत नहीं है। अगर कोई समस्या है तो उसके लिए सीधा डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है। अपने शरीर की देखभाल और उसको सुंदर बनानेवाले उत्पादों का बाजार और प्रचार तंत्र सिर्फ एक भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। पितृसत्ता के मानकों पर आधारित यह कारोबार यह जताने की कोशिश में लगा हुआ है कि जैसा विज्ञापनों में दिखाया जाता है वजाइना को वैसा होना चाहिए। अगर वजाइना की स्थिति ऐसी नहीं है तो आप इसके लिए आप दोषी हैं, केवल वजाइना ब्यूटी और हाइजीन प्रॉडक्ट्स ही इसका एकमात्र समाधान है। विज्ञापनों के द्वारा महिलाओं के शरीर की सुंदरता के लिए लगातार स्त्रीद्वेष से भरपूर भावनाओं को प्रचारित किया जा रहा है। वजाइना को साफ-सुथरा रखने की आवश्यकता के अतिवादी विचारों को फैलाया जा रहा है। पूंजीवादी दौर में महिलाओं के वजाइना की सुंदरता और स्वच्छता के नाम पर खड़ा यह बाजार सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए है। इसका वास्तव में लोगों के स्वास्थ्य से कोई मतलब नहीं है।

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मैं पूजा राठी पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली हूँ। अपने आसपास के माहौल मे फ़िट नहीं बैठती हूँ।सामाजिक रूढ़िवाद, जाति-धर्मभेद, असमानता और लैंगिक भेद में गहरी रूचि है। नारीवाद व समावेशी विचारों की पक्षधर हूँ। खुद को एक नौसिखिया मानती हूँ, इसलिए सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखती हूँ।

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