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पेट, सिर, पैर, हाथ, आँख-कान जैसे शरीर के अंगों से जुड़ी किसी भी समस्या को हम आसानी ज़ाहिर कर पाते हैं। लेकिन जैसे ही बात गुप्तांगो की आती है तो उस पर बात कर पाना उतना ही जटिल हो जाता है। जब ये समस्या महिला गुप्तांगों से जुड़ी हो तो उस पर बात करना और भी ज़्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि इसे अक्सर शर्म से जोड़ा जाता है, जिसकी वजह से कई बार महिलाएं संकोचवश चुप रह जाती हैं और उनकी चुप्पी इन समस्याओं को और भी गंभीर रूप देने लगती है। इन्हीं समस्याओं में से एक है– यूटीआई। यूरिन में जलन की समस्या, बार-बार यूरिन होना। तो कभी ‘पेट के निचले हिस्से दर्द और जलन की समस्या। ये कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिसका सामना कई बार लोगों को करना पड़ता है, जिसे यूटीआई या फिर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन कहते हैं।

कई रिपोर्ट्स में यह पाया गया कि क़रीब चालीस फ़ीसद महिलाओं को कभी न कभी अपने जीवन में यूटीआई का सामना करना पड़ता है। बदलती लाइफ़स्टाइल के चलते धीरे-धीरे यूटीआई आजकल महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या बनती जा रही है। लेकिन इसके बावजूद महिलाएं इस समस्या पर बात करने के लिए सहज नहीं हो पाती हैं, जिसकी वजह है हमारा पितृसत्तात्मक समाज, जो महिलाओं को उनके शरीर पर और उससे जुड़ी समस्याओं पर बात करने का स्पेस नहीं देता है। कई बार महिलाएं शर्म की वजह से इंफ़ेक्शन के शुरुआती दौर में इसे इग्नोर करती हैं, जिसकी ये समस्या और भी गंभीर होती जाती है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि यूटीआई सिर्फ़ महिलाओं से जुड़ी समस्या है, बल्कि पुरुषों, टीनएज और बच्चों में अब ये समस्या देखने को मिल रही है। लेकिन इसमें महिलाओं की संख्या ज़्यादा देखने को मिलती है।

कई रिपोर्ट्स में यह पाया गया कि क़रीब चालीस फ़ीसद महिलाओं को कभी न कभी अपने जीवन में यूटीआई का सामना करना पड़ता है। लेकिन इसके बावजूद महिलाएं इस समस्या पर बात करने के लिए सहज नहीं हो पाती हैं, जिसकी वजह है हमारा पितृसत्तात्मक समाज, जो महिलाओं को उनके शरीर पर और उससे जुड़ी समस्याओं पर बात करने का स्पेस नहीं देता है।

क्या होता है ये यूटीआई?

यूरिन इंफेक्शन यूरिनरी कॉर्ड में होने वाले इंफ़ेक्शन की वजह से होता है, जिसे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी कहा जाता है। यूटीआई की समस्या तब होती है जब तब बैक्टीरिया मूत्रमार्ग के ज़रिए हमारे मूत्र पथ में प्रवेश करते हैं और मूत्राशय के अंदर संक्रमण की समस्या को बढ़ाने लगते हैं। मूत्राशय और इसकी नली के बैक्टीरिया से संक्रमित होने पर यूटीआई होता है। यह बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट (Urinary Tract) के जरिए शरीर में घुसकर ये हमें नुक़सान पहुंचते हैं और हमारे यूरिनरी ट्रैक्ट यानी मूत्र मार्ग में ब्लैडर, किडनी, यूरेटर (ब्लैडर और किडनी को जोड़नेवाली ट्यूब), यूरेथ्रा (शरीर से पेशाब को बाहर निकालनेवाली ट्यूब ) मुख्य रूप से शामिल होते हैं। आमतौर पर इसके संक्रमण का मुख्य कारण ई-कोलाई बैक्टीरिया होता है। 

यूटीआई जितनी आम समस्या है, अगर इस पर सही समय पर ध्यान नहीं दिया गया और सही इलाज नहीं करवाया गया तो ये उतनी ही गंभीर समस्या भी बन जाती है। यह सामान्य समस्या जटिल न बने इसके लिए ज़रूरी है कि हमें इसके बारे सही जानकारी हो, तो आइए अपनी जानकारी को और बढ़ाते है और बात करते है यूटीआई  से जुड़े कुछ मिथ्यों पर।

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मिथ्य: यूटीआई घरेलू नुस्ख़ों से या फिर कई बार अपने आप ठीक हो जाता है।

यूटीआई  होने पर ज़्यादा पानी पीने, साफ़-सफ़ाई रखने, नींबू या खट्टे फल खाने जैसी ढ़ेरों सलाह दी जाती है। कई बार ये भी मान लिया जाता है कि ये समस्या अपने आप ठीक हो सकती है, यह एक मिथ्य मात्र है। बेशक खट्टे फल खाना और साफ़-सफ़ाई रखना हमें यूटीआई की समस्या से बचाने में मदद कर सकता है, पर इंफ़ेक्शन होने पर ये इलाज नहीं हो सकता है। वास्तव में यह इन्फेक्शन बिना इलाज के खत्म नहीं होता है इसलिए लक्षण महसूस होते ही बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और बिना देर किए सही ट्रीटमेंट शुरू करना चाहिए।  

यूरीन से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या होने पर हम इसे नज़रंदाज़ न करें और न ही संकोचवश इसपर चुप्पी साधे क्योंकि कई बार ये चुप्पी हमें शारीरिक रूप से नुक़सान पहुंचा सकती है।

मिथ्य: सेक्स करने की वजह से यूटीआई की समस्या होती है।

यूटीआई को लेकर कई बार लोग ये भी मानते हैं कि ये सेक्स की वजह से होता है जो कि एक मिथ्य है। वास्तव में यूटीआई होने की मल्टीपल साथियों के साथ सेक्स के अलावा और भी कई वजहें होती है, जैसे- गंदा पानी पीना, गंदे टॉयलेट का इस्तेमाल करना, डायबिटीज़ की समस्या, साफ़-सफ़ाई का ध्यान न रखना और कई बार ये जेनेटिक भी हो सकता है। इसलिए सिर्फ़ ये कहना कि सेक्स की वजह से यूटीआई होता है, पूरी तरह ग़लत है।

मिथ्य: यूटीआई से बचना मुश्किल है।  

यूटीआई की समस्या आम है, लेकिन ये लाइलाज बिल्कुल भी नहीं है। यूटीआई का इलाज संभव है और अगर सही समय पर इसका इलाज करवाया जाए तो कम समय में इसका इलाज संभव है।

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मिथ्य : यूटीआई होने पर कोई भी एंटीबॉयोटिक का इस्तेमाल किया जा सकता है।  

यूटीआई के इलाज के लिए एंटीबॉयोटिक के सेवन की सलाह दी जाती है, लेकिन इसका मतलब क़तई नहीं है कि हम अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवा का सेवन करें। इसके लिए हमें बक़ायदा डॉक्टर से सलाह लेकर इससे जुड़े ज़रूरी टेस्ट करवाने के बाद ही किसी दवा का सेवन करना चाहिए।

मिथ्य: कुछ दिनों तक ही यूटीआई की दवा लेने पर ये समस्या दूर हो जाती है।  

किसी भी बीमारी में अक्सर हम दवा का सेवन तब करते हैं जब तक हमें आराम मिलता है और उसके बाद हम दवा का सेवन करना छोड़ देते हैं, जो उस बीमारी को जड़ से ख़त्म नहीं करता है। ठीक इसी तरह अगर यूटीआई की समस्या होने पर भी अगर हम राहत मिलने तक दवा का सेवन करते हैं तो इससे ये समस्या और भी जटिल होती जाती है। इसलिए ज़रूरी है कि यूटीआई होने पर इसके इलाज का पूरा कोर्स किया जाए।

यूटीआई की समस्या से बचने के लिए ज़रूरी है कि हम अपने खानपान और साफ़-सफ़ाई का ख़ास ध्यान दें और इससे जुड़े मिथ्यों को दूर करें। इसके साथ ही ये ज़रूरी है कि यूरीन से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या होने पर हम इसे नज़रंदाज़ न करें और न ही संकोचवश इसपर चुप्पी साधे क्योंकि कई बार ये चुप्पी हमें शारीरिक रूप से नुक़सान पहुंचा सकती है।

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Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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