डॉ. मैरी पुथिसेरिल वर्गीज़: एक डॉक्टर जिन्होंने विकलांग लोगों के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया| #IndianWomenInHistory
डॉ. मैरी पुथिसेरिल वर्गीज़: एक डॉक्टर जिन्होंने विकलांग लोगों के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया| #IndianWomenInHistory
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मैरी पुथिसेरिल वर्गीज़ भारत की एक जानी-मानी फिज़ीशियन थीं। उन्होंने उस दौर में चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पहचान कायम की जब इस क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ पुरुषों का बोल-बाला था। मैरी पुथिसेरिल का जन्म केरल के कोच्चि शहर में 21 मई, 1925 को हुआ था। उनके पिता स्थानीय चर्च से जुड़े हुए थे और उनका समाज में काफी सम्मान था। मैरी आठ भाई-बहन में से सातवें नंबर पर थीं। मैरी एक संपन्न परिवार से आती थीं इसीलिए उन्हें शिक्षा प्राप्त करने के लिए ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। वह पढ़ने में बचपन से ही बहुत होशियार थीं। उन्होंने अपनी यूनियन हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद महाराजा कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की।

कॉलेज के दिनों में हुई ट्रेनिंग के दौरान ही मैरी की दिलचस्पी स्त्री रोग में विशेषज्ञ बनने की ओर थी। इस काम में उनकी बहुत रुचि थी और वह इस काम को करने के लिए हमेशा तैयार रहती थीं। 1946-1952 में इन्होंने अपनी मेडिकल की शिक्षा पूरी की थी। इसके बाद वह स्त्री विभाग में शामिल हो गई थी। मैरी पुथिसेरिल एक धार्मिक महिला थीं और भगवान में अटूट विश्वास करती थीं। वह अपने दोस्तों के साथ ज्यादा बातचीत नहीं करती थीं लेकिन उससे ज्यादा वह अपना समय अपने धर्म और ईश्वर को देती थीं। वह एक चिकित्सक तो थीं लेकिन उनका व्यवहार बहुत अलग और नरम था। जो भी बीमार व्यक्ति उनके पास आता था वह उनके दुख को समझती थीं। वह साफ दिल की थी और अपना काम बिल्कुल ईमानदारी से करती थीं। वह जिस भी क्लीनिक गई, उन्होंने अपने काम के माध्यम से वहां पर विश्वास और एक अच्छे डॉक्टर की नींव रखी।

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एक दुर्घटना ने मैरी को बुरी तरह हताश कर दिया था। उन्हें अपना डॉक्टर बनने का सपना खुद से दूर होता नज़र आ रहा था। लेकिन इस बीच उनकी ज़िंदगी में उम्मीद की किरण बनकर आए मशहूर सर्जन डॉ. पॉल ब्रैंड। उन्होंने ही मैरी को सलाह दी कि वह अपने तय किए गए मेडिकल पेशे को बदलकर कुछ अलग करें। वह व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही कुष्ठ रोगियों के हाथ का ऑपरेशन कर सकती हैं।

रीढ़ की हड्डी की चोट और उसके बाद का संघर्ष

साल 1954, जनवरी 30 की तारीख़ उनके जीवन की एक अहम तारीख़ साबित हुई। इस दिन वह अपने कुछ दोस्तों और सहकर्मियों के साथ यात्रा कर रही थीं, इसी यात्रा के दौरान उनकी कार दुर्घटना का शिकार हो गई। इस दुर्घटना ने मैरी के जीवन को बदलकर रख दिया। इस एक्सीडेंट में मैरी पुथिसेरिल की रीढ़ की हड्डी बुरी तरह टूट गई। साथ ही उनका चेहरा भी बुरी तरह चोटिल हो गया था। धीरे-धीरे करके उनके सभी दोस्त ठीक हो गए थे लेकिन उनकी रीढ़ की हड्डी टूट जाने से वह पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी।

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इस दुर्घटना ने मैरी को बुरी तरह हताश कर दिया था। उन्हें अपना डॉक्टर बनने का सपना खुद से दूर होता नज़र आ रहा था। लेकिन इस बीच उनकी ज़िंदगी में उम्मीद की किरण बनकर आए मशहूर सर्जन डॉ. पॉल ब्रैंड। मैरी का इलाज भी वही कर रहे थे। उन्होंने ही मैरी को सलाह दी कि वह अपने तय किए गए मेडिकल पेशे को बदलकर कुछ अलग करें। वह व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही कुष्ठ रोगियों के हाथ का ऑपरेशन कर सकती हैं। शायद मैरी उस वक्त की इकलौती सर्जन थीं जो व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही लोगों का ऑपरेशन कर पा रही थीं।  

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तस्वीर साभार: CMI Journal

अपने बेहतरीन काम के बलबूते पर उन्हें न्यूयॉर्क के इंस्टिट्यूट ऑफ फिज़िकल रिहैबिलिटेशन एंड मेडिसिन से फेलोशिप भी मिली। साल 1962 में अपनी फेलोशिप पूरी करने के बाद वह क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर में भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास विभाग की हेड ऑफ द डिपार्टमेंट का ओहदा संभालने के लिए भारत लौट आईं। उन्होंने 1966 में पुनर्वास संस्थान की शुरुआत भी की। वह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी की चोट, कुष्ठ रोग और मस्तिष्क की चोट से पीड़ित लोगों के इलाज में लगी रहीं। अपने काम के लिए मैरी को कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया। चिकित्सा विभाग में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए इन्हें साल 1972 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं, साल 1982 में इन्हें वर्ल्ड विजन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

तस्वीर साभार : विकीपीडिया

              

मैरी वर्गीज का दिसंबर 1986 में वेल्लोर में निधन हो गया। उनके द्वारा स्थापित पुनर्वास संस्थान का नाम उनके सम्मान में रखा गया है। मैरी वर्गीज़ के काम को हमेशा मेडिकल की दुनिया में एक सम्मान की नज़रों से देखा जाएगा। विकलांग व्यक्तियों और कुष्ठ रोगियों के प्रति उनके समर्पण ने कई लोगों के जीवन को बदलकर रख दिया।

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स्रोत:
Wikipedia
CMI Journal

My name is Arushi Parihar. I'm From Himachal Pradesh. I'm 18 years old. I have just completed my+2 and now I'm a Rural Development student at sajhe sapne in himachal pradesh. I have lots of dreams but my favourite hobby I want to become dancer and air hostess and I love dancing and listening to music

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