समाजकार्यस्थल प्रोफेशनलिज़्म की आड़ में लिंक्डइन पर बढ़ती लैंगिक हिंसा

प्रोफेशनलिज़्म की आड़ में लिंक्डइन पर बढ़ती लैंगिक हिंसा

नवंबर 2025 में छपी द गार्डीअन में एक रिपोर्ट मुताबिक उन बीते हफ्तों में सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म पर दर्जनों महिलाओं ने यह रिपोर्ट किया कि जैसे ही उन्होंने अपना जेंडर ‘मेल’ किया या अपनी प्रोफाइल की भाषा को ज़्यादा आक्रामक, जार्गन-भरी और तथाकथित ‘ब्रो-कोडेड’ स्टाइल में बदला, उनकी विज़िबिलिटी और एंगेजमेंट में अचानक ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का ज़्यादा हिस्सा बनती जा रही है, वैसे-वैसे इसका इस्तेमाल महिलाओं और लड़कियों को नए और खतरनाक तरीकों से नुकसान पहुंचाने के लिए भी किया जा रहा है। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के सालों में टेक्नोलॉजी की मदद से महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ़ हिंसा तेज़ी से बढ़ी है, जिससे दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा की दिशा में गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अक्सर जो ऑनलाइन बदसलूकी के तौर पर शुरू होता है, वह तेज़ी से ऐसे खतरे में बदलता है जो स्क्रीन और सीमाओं से परे फैल जाता है, जिससे कई महिलाएं घर, काम की जगह या पब्लिक जगहों पर असुरक्षित महसूस करती हैं।

डिजिटल दुनिया सभी के लिए एक सुरक्षित जगह होनी चाहिए। अगर सोशल मीडिया का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह सीखने, आगे बढ़ने और लोगों से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। आज सोशल मीडिया केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। लोग यहां नए कौशल सीख रहे हैं, नौकरी के अवसर खोज रहे हैं और कंटेंट के ज़रिए अपना करियर बना रहे हैं। कई लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और एक-दूसरे से सीख भी रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने पूरी दुनिया को एक साझा कार्यक्षेत्र में बदल दिया है।

नवंबर 2025 में छपी द गार्डीअन में एक रिपोर्ट मुताबिक उन बीते हफ्तों में सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म पर दर्जनों महिलाओं ने यह रिपोर्ट किया कि जैसे ही उन्होंने अपना जेंडर ‘मेल’ किया या अपनी प्रोफाइल की भाषा को ज़्यादा आक्रामक, जार्गन-भरी और तथाकथित ‘ब्रो-कोडेड’ स्टाइल में बदला, उनकी विज़िबिलिटी और एंगेजमेंट में अचानक ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।

हालांकि, हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की अपनी भूमिका और उपयोगिता होती है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और सामाजिक संवाद के लिए जाने जाते हैं। वहीं, लिंक्डइन को खासतौर पर प्रोफेशनल नेटवर्किंग और करियर से जुड़े संवाद के लिए बनाया गया है। समस्या तब शुरू होती है, जब कुछ लोग इस बुनियादी अंतर को नजरअंदाज कर देते हैं। वे प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म्स को निजी बातचीत या व्यक्तिगत प्रस्ताव भेजने की जगह समझने लगते हैं। इससे प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कमजोर पड़ता है।

आज लिंक्डइन जो दुनिया भर के प्रोफेशनल्स को जोड़ने का दावा करता है, कई महिला यूज़र्स के लिए असहज अनुभवों का कारण बनता जा रहा है। नेटवर्किंग के नाम पर शुरू हुई बातचीत कब और कैसे निजी संदेशों में बदल जाती है, यह कई महिलाओं के लिए एक आम अनुभव बन चुका है। इस संदर्भ में यह सवाल ज़रूरी है कि क्या कुछ लोग लिंक्डइन को डेटिंग ऐप की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं। यह भी जरूरी है कि हम समझें इस तरह के व्यवहार का महिलाओं के करियर और पेशेवर पहचान पर क्या असर पड़ रहा है।

कहने को लिंक्डइन एक प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म है, लेकिन थोड़ी बातचीत के बाद ही लोग फ्लर्ट करने लगते हैं। नेटवर्किंग के नाम पर तुरंत नंबर मांगना और मिलने की बात करना अब आम हो गया है।

लिंक्डइन पर लैंगिक असमानता और हिंसा  

लिंक्डइन को अक्सर एक प्रोफेशनल और मेरिट-आधारित प्लेटफ़ॉर्म माना जाता है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। यहां लैंगिक भेदभाव न सिर्फ मौजूद है, बल्कि कई बार इतनी सूक्ष्म होती है कि पहचान में ही नहीं आती। शोध बताते हैं कि पुरुषों की प्रोफाइल्स को एल्गोरिदम से ज़्यादा विज़िबिलिटी मिलते हैं, नेतृत्व वाली भूमिकाओं के लिए पुरुषों को प्राथमिकता दिया जाता है, और महिलाओं के करियर ब्रेक या पार्ट-टाइम अनुभव को कमतर आँका जाता है। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक महिलाओं को अक्सर ‘सपोर्टिंग रोल्स’ या ‘कम्युनिकेशन-फोकस्ड’ नौकरियों से जोड़ा जाता है, जबकि टेक, लीडरशिप और स्ट्रैटेजिक भूमिकाओं में पुरुषों का प्रतिनिधित्व ज़्यादा दिखता है।

इसके अलावा, महिलाओं की उपलब्धियों पर कम एंगेजमेंट और पुरुषों की समान पोस्ट्स पर ज़्यादा तारीफ़ भी इस बायस को मज़बूत करती है। यह भेदभाव केवल यूज़र्स तक सीमित नहीं है। एल्गोरिदम, रिक्रूटमेंट टूल्स और नेटवर्किंग डायनेमिक्स भी इसे बढ़ावा देते हैं। नवंबर 2025 में छपी द गार्डीअन में एक रिपोर्ट मुताबिक उन बीते हफ्तों में सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म पर दर्जनों महिलाओं ने यह रिपोर्ट किया कि जैसे ही उन्होंने अपना जेंडर ‘मेल’ किया या अपनी प्रोफाइल की भाषा को ज़्यादा आक्रामक, जार्गन-भरी और तथाकथित ‘ब्रो-कोडेड’ स्टाइल में बदला, उनकी विज़िबिलिटी और एंगेजमेंट में अचानक ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।

नेटवर्किंग के नाम पर शुरू हुई बातचीत कब और कैसे निजी संदेशों में बदल जाती है, यह कई महिलाओं के लिए एक आम अनुभव बन चुका है। इस संदर्भ में यह सवाल ज़रूरी है कि क्या कुछ लोग लिंक्डइन को डेटिंग ऐप की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि हालांकि लिंक्डइन  ने इससे साफ़ तौर पर इनकार किया है कि उसके रैंकिंग सिस्टम में किसी भी तरह का जेंडर-आधारित महत्व दिया जाता है। फिर भी यह ट्रेंड उन महिलाओं की पोस्ट्स से शुरू हुआ जिन्होंने कहा कि लिंक्डइन के हालिया एल्गोरिदम बदलावों के बाद उनकी रीच में काफ़ी गिरावट आ गई थी। इसके बाद, कुछ महिलाओं ने सिस्टम को सीधे परखने का फ़ैसला किया। उन्होंने या तो अपना जेंडर बदलकर देखा या फिर अपनी प्रोफाइल और पोस्ट्स की भाषा को ज़्यादा ‘मेल-कोडेड’ बना दिया।

प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म पर निजी संदेशों का बढ़ता जाल

लेकिन, इससे भी बड़ी चिंताजनक बात यह है कि आज लिंक्डइन लैंगिक हिंसा का एक उभरता माध्यम बन रहा है। लिंक्डइन का उद्देश्य साफ है। यह एक प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म है, जहां लोगों को उनके काम, कौशल और पेशेवर अनुभव के आधार पर जोड़ा जाता है। यहां बातचीत का केंद्र काम, करियर और नेटवर्किंग होना चाहिए। लेकिन कई महिलाओं के अनुभव इससे बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं। अक्सर यह मान लिया जाता है कि जो महिलाएं लिंक्डइन पर सक्रिय हैं, पोस्ट लिखती हैं या अपने विचार सार्वजनिक रूप से साझा करती हैं, वे निजी बातचीत के लिए भी सहज होंगी।

इसी गलत सोच के कारण कुछ लोग प्रोफाइल फोटो पर टिप्पणियों से बातचीत शुरू करते हैं। कई बार नेटवर्किंग के नाम पर फोन नंबर या निजी जानकारी मांगी जाती है। कई मामलों में बातचीत बहुत जल्दी प्रोफेशनल दायरे से बाहर निकलकर निजी हो जाती है। यह अनुभव किसी एक या दो घटनाओं तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा व्यवहार है, जो बार-बार सामने आता है और कई महिलाओं को प्रभावित करता है।

फोर्ब्स में छपी एक रिपोर्ट अनुसार करीब 91 प्रतिशत महिला लिंक्डइन यूज़र्स ने बताया कि उन्हें इस प्लेटफॉर्म पर अनचाहे, रोमांटिक या असहज कर देने वाले संदेश मिले हैं। यह डेटा साफ दिखाता है कि प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा और सीमाओं का सम्मान अब भी एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है।

पासपोर्ट फोटो ऑनलाइन के किए गए एक सर्वे आधारित फोर्ब्स में छपी एक रिपोर्ट अनुसार करीब 91 प्रतिशत महिला लिंक्डइन यूज़र्स ने बताया कि उन्हें इस प्लेटफॉर्म पर अनचाहे, रोमांटिक या असहज कर देने वाले संदेश मिले हैं। यह डेटा साफ दिखाता है कि प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा और सीमाओं का सम्मान अब भी एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। इसी सर्वे में यह भी सामने आया कि लगभग 31 प्रतिशत संदेश सीधे डेटिंग या निजी प्रस्तावों से जुड़े होते हैं।

इस विषय पर गुरुग्राम की एक पीआर फर्म में मीडिया और कंटेंट मैनेजर के तौर पर काम कर रही अपर्णा त्रिपाठी कहती हैं, “कहने को लिंक्डइन एक प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म है, लेकिन थोड़ी बातचीत के बाद ही लोग फ्लर्ट करने लगते हैं। नेटवर्किंग के नाम पर तुरंत नंबर मांगना और मिलने की बात करना अब आम हो गया है।” वहीं एक मीडिया कंपनी में इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ी मेघा कन्याल बताती हैं, “जब मैं लिंक्डइन के ज़रिए नौकरी तलाश रही थीं, तो कई लोगों ने यह कहकर संपर्क किया कि वे उन्हें हायर करना चाहते हैं। लेकिन बातचीत बहुत जल्दी निजी संदेशों में बदल गई। इन अनुभवों के बाद अब मैं किसी भी नए कनेक्शन को अपना फोन नंबर देने से बचती हूं।”

नौकरी की तलाश के दौरान मुझे चार लोगों के बारे में रिपोर्ट करना पड़ा। हैरानी इस बात की होती है कि अच्छे पदों पर काम करने वाले लोग भी काम की आड़ में निजी बातें शुरू कर देते हैं।

फोर्ब्स की रिपोर्ट मुताबिक इन अनुभवों का सीधा असर महिलाओं की प्रोफेशनल मौजूदगी पर पड़ता है। सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसे अनुभवों के बाद लिंक्डइन पर कम सक्रिय हो जाती हैं। कई महिलाएं नए कनेक्शन बनाने से बचने लगती हैं। कुछ मामलों में महिलाएं धीरे-धीरे इस प्लेटफॉर्म से दूरी बना लेती हैं। यह स्थिति न सिर्फ मानसिक दबाव पैदा करती है, बल्कि उनके करियर से जुड़े अवसरों को भी सीमित कर देती है। इस विषय पर आईटी कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर काम कर रही आभा दुबे बताती हैं, “नौकरी की तलाश के दौरान मुझे चार लोगों के बारे में रिपोर्ट करना पड़ा। हैरानी इस बात की होती है कि अच्छे पदों पर काम करने वाले लोग भी काम की आड़ में निजी बातें शुरू कर देते हैं।” वहीं रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़ी साक्षी शर्मा का अनुभव भी इससे अलग नहीं है। वह कहती हैं, “मैं लिंक्डइन पर बहुत ज़्यादा सक्रिय भी नहीं हूं, फिर भी प्रोफाइल फोटो या पोस्ट पर टिप्पणी करके निजी बातचीत शुरू करने की कोशिश की जाती है।” इन सभी अनुभवों की पृष्ठभूमि अलग-अलग है लेकिन समझ आता है कि कैसे महिलाओं की प्रोफेशनल विज़िबिलिटी को उनकी पर्सनल उपलब्धता समझ लिया जाता है।

ऐसे अनुभव महिलाओं के व्यवहार को कैसे बदलते हैं

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बार-बार मिलने वाले अनुचित संदेश महिलाओं के व्यवहार को बदल देते हैं। कई महिलाएं अपनी प्रोफाइल अपडेट करना, खुलकर बोलना या नेटवर्किंग करना कम कर देती हैं। यह आत्म-सुरक्षा धीरे-धीरे आत्म-नियंत्रण में बदल जाती है, जिससे उनकी पेशेवर संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यह समस्या सिर्फ लिंक्डइन तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल वर्क कल्चर की है। ऑनलाइन स्पेसेज़ भी वर्कप्लेस होते हैं और वहां होने वाला ऐसा व्यवहार यौन उत्पीड़न का डिजिटल रूप है। नीतियां मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन कमजोर है। रिपोर्टिंग प्रक्रिया भी महिलाओं को भरोसेमंद नहीं लगती। समाधान का बोझ महिलाओं पर नहीं डाला जा सकता। प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म्स को सख़्त मॉडरेशन और जवाबदेही तय करनी होगी। डिजिटल वर्कस्पेस तभी बराबरी का होगा, जब सम्मान डिफॉल्ट व्यवहार बने और सीमाएं उल्लंघन करने वालों को समझाई जाएं।

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