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कोविड-19 ने छात्रों से सुनहरा दौर छीन लिया, सरकार की लापरवाही से उपजे गंभीर हालात

कोविड-19 : लापरवाह सरकार से उपजे गंभीर हालात ने विद्यार्थियों से सुनहरा दौर छीन...

पूरी दुनिया में जो कोरोना महामारी बनकर तांडव कर रहा है उसे हमने कमज़ोर पिद्दी समझ लिया। मास्क नाक से नीचे और अक्सर चेहरे से हटाए जाने लगे, बाज़ारों में भीड़भाड़ रहने लगी, लोग सटकर चलने लगे। आख़िर एक तरफ धुंआधार रैलियां कर हमारे नेता भी यहीं संदेश दे रहे थे कि देखिए कोरोना हमसे डरकर भाग गया है।
ख़ास बात: पिंजरा तोड़ की एक्टिविस्ट और जेल में बंद नताशा के पिता महावीर नरवाल से

ख़ास बात : पिंजरा तोड़ की एक्टिविस्ट और जेल में बंद नताशा के पिता...

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महावीर नरवाल कहते हैं,“बहुत प्यारी है मेरी बच्ची और बहुत बहादुर भी। उसे कोई चीज़ डरा नहीं सकती। उसके भीतर बहुत ठहराव और हिम्मत है। मुझे गर्व है इस बात पर की वो अपने अधिकारों के लिए लड़ना और सही को सही बोलना जानती है। मैं उसके साथ खड़ा हूँ। पहले नताशा को मेरी बेटी के नाम से जाना जाता था, आज मुझे उसके पिता के नाम से पहचाना जाता है। मुझे उसपर पूरा विश्वास और गर्व है।”
स्लीपिंग पार्ट्नर : सेक्स और हिंसा के रंग उकेरती दमदार औरत की कहानी|नारीवादी चश्मा

शादी के फ़िल्टर से सेक्स, हिंसा के रंग और स्लीपिंग पार्टनर की चुनौती| नारीवादी...

जैसे ही बीना को रविश नाम का स्लीपिंग पार्टनर मिला वो काफ़ी बेहतर महसूस करने लगी। उसे ख़ुद में आत्मविश्वास महसूस होने लगा।

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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