इंटरसेक्शनलLGBTQIA+ LGBT की भाषा अगर पल्ले नहीं पड़ती तो आपके लिए है ये वीडियो

LGBT की भाषा अगर पल्ले नहीं पड़ती तो आपके लिए है ये वीडियो

आयुषी ने इस वीडियो के ज़रिये बेहद सरल हिंदी भाषा में जेंडर और यौनिकता की परतों को उजागर करते हुए इसपर दर्शकों की समझ बनाने का सार्थक प्रयास किया है|

अक्सर हम अपनी बातों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते है जिसके बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं होती है और शायद यही वजह है कि हम अक्सर उन शब्दों को लेकर भ्रमित रहते है| खासकर तब जब हम बात करते है महिला और पुरुष के खांचे से इतर अन्य जेंडर की| ऐसे में भ्रमित होना लाजमी है क्योंकि इसपर हमारी पीढ़ी में तो क्या हमारे पूर्वजों के बीच भी चर्चा नहीं हुई| लेकिन बदलते समय के साथ ये मौजूदा समय की ज़रूरत है कि हम पितृसत्तात्मक समाज के परिभाषित जेंडर के दो खांचे से परे अन्य जेंडर के बारे में भी समझें|

वैसे तो इन विषयों पर अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा आम हो चुकी है, लेकिन हिंदी भाषा में अभी भी इन विषयों को समझने की दिशा में उपलब्ध सामग्री बेहद सीमित है| हिंदी के इस सीमित दायरों को बढ़ाने की दिशा में आयुषी वर्मा की यूट्यूब वीडियो इनदिनों काफी चर्चित हो रही है| इस वीडियो के ज़रिये आयुषी ने बेहद सरल हिंदी भाषा में जेंडर और यौनिकता की परतों को उजागर करते हुए इसपर दर्शकों की समझ बनाने का सार्थक प्रयास किया है|  

वीडियो की शुरुआत दर्शकों के सिर पर समाज के लगाये हुए लेबल को इंगित करते हुए शुरू होती है, जो यह दर्शाती है कि जिन मनुष्यों को वे ‘मनुष्य के प्रकार’ के रूप में जानते हैं, वे सभी लेबल वाले मनुष्यों में से ‘एक’ प्रकार के मनुष्य हैं।

वैसे तो इन विषयों पर अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा आम हो चुकी है, लेकिन हिंदी भाषा में अभी भी इन विषयों को समझने की दिशा में उपलब्ध सामग्री बेहद सीमित है|

इस वीडियो में आयुषी ने अपनी माँ को जेंडर की विविधता समझाते हुए साझा की है| इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग चित्रों का इस्तेमाल भी किया है,  इस संबंध में जब हमने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि किसी भी बदलाव की शुरुआत हमें खुद से करनी होती है| बजाय दूसरे या चौथे व्यक्ति से| इसलिए मैंने खुद को इन चित्रों के ज़रिये तलाशने और समझने की कोशिश की और इस वीडियो को ऐसे रूप में तैयार किया कि कोई भी इंसान अगले इंसान को इन अवधारणाओं के बारे में कैसे समझा सकता है? लेकिन आमतौर पर हम इन मुद्दों पर चर्चा अपने घर से इतर अपने हमउम्र के साथ करना ज्यादा पसंद करते है, ये सोचकर कि घरवाले नहीं समझेंगें| इस मिथ्य को भी आयुषी ने अपनी वीडियो के ज़रिये बखूबी तोड़ते हुए ये समझाया है कि अगर आप सरलता, सहजता और तर्कों के साथ अपने घर में बात करते है तो उन्हें समझा, स्वीकारा और सराहा भी जाता है| बाकी आप खुद ही देखिये आयुषी वर्मा की इस वीडियो को –

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Comments:

  1. Alice Jacson says:

    LGBT यह कोई समस्या नहीं है, न ही कोई सामाजिक बुराई है, यह हमारे जैसे ही समान्य व्यक्ति है जो अलग विचारधारा रखते है, Thatspersonal इस प्रकार के समुदाय का पूर्णतः सम्मान करती है, तथा समाज में उन्हें समानता का हक़ दिलाने का प्रयास करते है. .

  2. LGBT
    या और भी जो विभिन्न तरीके से दिखाई देता है वह खुद ही इंसान का दूसरा स्वरूप है
    जैसा पहले हम जन जातियों को स्वीकार नहीं करते थे परंतु वर्तमान में वह समाज का हिस्सा बन चुकी है उसी तरह ज्ञान की सीमाओं के साथ ही यह भी समाज का हिस्सा वह भी पूर्ण रूप से अधिकारों के साथ बन जाएंगे

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